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कोटा: ग्लूकोमा की जांच सस्ते दर पर होगी उपलब्ध, एमबीएस हॉस्पिटल ने की पहल

अस्पताल के नेत्र विभाग में एक सप्ताह 42 लाख की लागत से 'आप्टिकल कोहेरेंस टोमोग्राफी' जांचने की मशीन लगी है.

कोटा: ग्लूकोमा की जांच सस्ते दर पर होगी उपलब्ध, एमबीएस हॉस्पिटल ने की पहल
ग्लूकोमा की जांच मरीज आसानी से करवा सकेंगे.

मुकेश सोनी, कोटा: आंख की बीमारी ग्लूकोमा पीड़ित मरीज सम्भाग के एमबीएस अस्पताल में ग्लूकोमा मुफ्त जांच करवा सकेंगे. अस्पताल के नेत्र विभाग में एक सप्ताह 42 लाख की लागत से 'आप्टिकल कोहेरेंस टोमोग्राफी' जांचने की मशीन लगी है.

मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ गिरीश वर्मा ने अपने आंखों की जांच करवाकर मशीन का उद्घाटन किया. इस दौरान अस्पताल अधीक्षक डॉ नवीन सक्सेना, नेत्र विभाग के एचओडी डॉ अशोक मीणा सहित नर्सिंग स्टाफ मौजुद रहे.

क्या है ग्लूकोमा 

ग्लूकोमा को साइलेंट कीलर भी कहा जाता है. डॉक्टरों को इसके लक्षण नहीं मिलते हैं. यह दो तरह का होता है. एंगल क्लोजर और ओपन एंगल. ओपन एंगल बहुत ज्यादा कॉमन है. इसे ही साइलेंट कीलर के तौर पर जाना जाता है. इसमें बार-बार चश्मा बदलने की नौबत आए तो आंखों की जांच करा लेनी चाहिए. आई स्पेशलिस्ट इसलिए इसका जल्द इलाज कराने की सलाह देते हैं.

चिकित्सकों के अनुसार, जिन लोगों का नम्बर की वजह से बार बार चश्मा बदल रहा हो, जिनको इंद्र धनुष जैसी सर्कल दिखाई दे रही हो, ब्लड प्रेशर, डाइबिटीज हो. जिनकी उम्र 40 से ज्यादा हो उन्हें एक बार ग्लूकोमा जाच अवश्य करानी चाहिए. 

रियायती दरो पर होगी जांच 

नेत्र विभाग के एचओडी डॉक्टर अशोक मीणा ने बताया कि अस्पताल में अबतक फंड्स फ्लोरेंस एंजियोग्राफी, ग्रीन लेजर मशीन से मरीजों का इलाज किया जा रहा था. लेकिन ग्लूकोमा की जांच के लिए मरीजों को निजी अस्पताल में जाना पड़ रहा था. जहां इस जांच के लिए करीब 2 हजार रुपये खर्च करने पड़ते थे. लेकिन इस सुविधा के शुरू होने के बाद मरीजों को न्यूनतम दर पर जांच की सुविधा मिल सकेगी. मीणा ने बताया कि अस्पताल के नेत्र विभाग ओपीडी में रोजाना 150 से 200 मरीज पहुंचते हैं. इनमे से 10 से 15 मरीज ग्लूकोमा बीमारी से ग्रसित होते है.