कोटा: BJP के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने किया JK लोन अस्पताल का औचक निरीक्षण, फिर...

अस्पताल के सूत्रों ने पुष्टि की कि यहां आवश्यक और जीवन रक्षक श्रेणियों में आने वाले 60 फीसदी से अधिक उपकरण काम नहीं कर रहे हैं. 

कोटा: BJP के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने किया JK लोन अस्पताल का औचक निरीक्षण, फिर...
सतीश पूनिया रविवार को अस्पताल का औचक निरीक्षण करने पहुंचे.

जयपुर: राजस्थान में कोटा स्थित जे. के. लोन अस्पताल के आईसीयू में एक ही बिस्तर पर दो से तीन बीमार बच्चों का होना एक सामान्य सी बात बनी हुई है. बीजेपी के एक शीर्ष नेता ने दावा किया है कि इन मासूम बच्चों को सांस लेने के लिए जगह और स्वच्छ हवा के लिए काफी संघर्ष करना पड़ता है. यही नहीं, बीजेपी नेता का कहना है कि अव्यवस्था के बीच गंभीर बीमारियों से जूझते इन बच्चों की देखभाल के लिए नर्स नहीं, बल्कि उनकी मां खड़ी रहती हैं.

हाल ही में कोटा का यह अस्पताल काफी सुर्खियों में रहा है. क्योंकि यहां अकेले दिसंबर महीने में ही 77 बच्चों की मौत हो गई, जबकि पिछले हफ्ते 48 घंटों के अंदर यहां 10 बच्चों ने अपनी जान गंवा दी.

अस्पताल के सूत्रों ने पुष्टि की कि यहां आवश्यक और जीवन रक्षक श्रेणियों में आने वाले 60 फीसदी से अधिक उपकरण काम नहीं कर रहे हैं. लापरवाही व उदासीनता की इतनी हद है कि अस्पताल प्रबंधन का कोई भी अधिकारी इस बात पर ध्यान नहीं देता कि कुछ उपकरणों को फिर से ठीक किया जा सकता है. कुछ धूल फांक रहे उपकरण तो ऐसे भी हैं, जिन्हें महज दो रुपये की कीमत के एक तार के छोटे से टुकड़े की मदद से फिर से चलाया जा सकता है.

नतीजतन कई नेबुलाइजर, वार्मर और वेंटिलेटर काम नहीं कर रहे हैं. संबंधित अधिकारियों ने मामले की सूचना दी है, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ. साथ ही अस्पताल में संक्रमण की जांच के लिए एकत्रित 14 नमूनों की परीक्षण रिपोर्ट सकारात्मक (पॉजीटिव) आई है. ये परीक्षण बैक्टीरिया के प्रसार का आकलन करने में मदद करते हैं. इस रिपोर्ट को अधिकारियों को सौंपे जाने के बावजूद, बड़ी संख्या में बैक्टीरिया के प्रसार को साबित होने पर भी कोई कार्रवाई नहीं की गई.

राजस्थान बीजेपी अध्यक्ष सतीश पूनिया रविवार को अस्पताल का औचक निरीक्षण करने पहुंचे. इस दौरान उन्होंने कहा, 'इस परिप्रेक्ष्य में राज्य सरकार के प्रशासन को दोष क्यों नहीं देना चाहिए?'

उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा, 'मैंने देखा कि प्रत्येक बिस्तर पर दो से तीन बच्चे लेटे थे और उनकी देखभाल करने के लिए बिस्तर के किनारे ही उनकी उनकी मां भी खड़ी थीं. स्पष्ट रूप से संक्रमण के प्रसार की जांच के लिए कोई सावधानी नहीं बरती जा रही है'. उन्होंने कहा, 'अस्पताल में सफाई नहीं थी. हैरानी की बात यह है कि इन बच्चों के वार्ड के आसपास कोई नर्स नहीं दिखी'.

इससे पहले बच्चों की मौत की सूचना के तुरंत बाद राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने दावा किया था कि इस अस्पताल में 900 बच्चों की मौत का आंकड़ा पिछले छह सालों में सबसे कम है. 

बाद में स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा ने भी विभिन्न वर्षो में हुई मौतों को गिनाते हुए कहा कि 2014 में 1,198 बच्चों की मृत्यु हुई, 2015 में 1,260 बच्चे मारे गए, 2016 में 1,193, 2017 में 1,027 बच्चों और 2018 में 1,005 बच्चों की मृत्यु हुई. मौतों की संख्या पर खेली जा रही राजनीति का हवाला देते हुए पूनिया ने कहा कि इसे रोकने की जरूरत है.