बीजेपी का गढ़ है झालावाड़ लोकसभा सीट, दुष्यंत सिंह ने लगातार 4 बार जीत की है दर्ज

बारां-झालावाड़ संसदीय क्षेत्र में 1984 के बाद से कांग्रेस कभी नहीं जीति. इस संसदीय सीट से वर्ष 1951 में कांग्रेस के नेमीचंद कासलीवाल जीते थे.

बीजेपी का गढ़ है झालावाड़ लोकसभा सीट, दुष्यंत सिंह ने लगातार 4 बार जीत की है दर्ज
दुष्यंत सिंह से पहले पूर्व मुख्यमंत्री इस क्षेत्र से सांसद रह चुकी हैं.

झालावाड़: बारां-झालावाड़ संसदीय क्षेत्र से सांसद दुष्यंत सिंह लगातार चार बार से यहां सांसद बनते आ रहें है. इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे यहां से सांसद रही थीं. सांसद दुष्यंत सिंह के राजनीतिक सफर की बात करे तो राजनीति इन्हें वसुन्धरा राजे से विरासत में मिली है. वसुन्धरा राजे इस लोक सभा क्षेत्र से सांसद रही ओर इसके बाद चार बार से दुष्यंत सिंह यहां से सांसद हैं.

इतिहास
बारां-झालावाड़ संसदीय क्षेत्र में 1984 के बाद से कांग्रेस कभी नहीं जीति. इस संसदीय सीट से वर्ष 1951 में कांग्रेस के नेमीचंद कासलीवाल जीते थे. इसके बाद 1957 में ओंकारलाल, 1967 में बृजराजसिंह, 1971 में फिर से बृजराजसिंह जीते थे. 1977 और 1980 में जनता पार्टी के उम्मीदवार चतुर्भुज नागर जीते, लेकिन 1984 में कांग्रेस के जूझारसिंह ने इस सीट पर कब्जा किया. इसके बाद 1989, 1991, 1996, 1999 में भाजपा प्रत्याशी वसुंधरा राजे तथा 2004, 2009 और 2014 में वसुंधरा राजे के पुत्र दुष्यंतसिंह ने बारां-झालावाड़ संसदीय सीट पर कब्जा बरकरार रखा.

बारां-झालावाड़ संसदीय क्षेत्र में बारां जिले के किशनगंज, छबडा, बारां, अंता विधानसभा क्षेत्र आते हैं और झालावाड़ के भी चार विधानसभा क्षेत्र जिसमें खानपुर, मनोहर थाना, झालरापाटन और डग आते हैं

विकास कार्यो की बात करे तो बारां- झालावाड़ लोक सभा में जनता को सबसे बड़ी सौगात 'ते परवन सिंचाई परियोजना' मिली और 7 हजार करोड़ की इस परियोजना से दो जिलों को सौगात मिली है. इस परियोजना से लाखों हैक्टेयर बीघा भूमि सिंचित होगी और सैकडों गांवों में पीने के लिए पानी मिलता है. वहीं झालावाड़ में मेडिकल कॉलेज , और बारां में इंजीनरिंग कॉलेज और जिला चिकित्सालय के नवीन भवन का निर्माण भी किया गया है. वहीं करोडों की लागत की दोनों जिलें में सडकें ओर अन्य विकास कार्य इस लोक सभा क्षेत्र में हुऐं है.