भीलवाड़ा: कुकर्म का आरोपी मौलाना निकला बेकसूर, जानिए किसने रची थी झूठी साजिश?

12 मई 2019 को मौलाना इकबाल के खिलाफ मदरसे में पढ़ने आए एक बच्चे के परिजनों की और से मौलाना पर कुकर्म करने का आरोप लगाते हुए हंगामा खड़ा कर दिया. 

भीलवाड़ा: कुकर्म का आरोपी मौलाना निकला बेकसूर, जानिए किसने रची थी झूठी साजिश?
मौलाना ने बच्चों के पढ़ाई के प्रति अपना फर्ज समझते हुए जाने से इंकार कर दिया.

दिलशाद खान, भीलवाड़ा: कहा जाता है कि सच कभी छिपता नहीं. कानून में भी यहीं कहां गया है कि एक गुनहगार छूट जाए, फर्क नहीं पड़ता, लेकिन एक बेगुनाह को सजा हो जाए, इससे फर्क पड़ता है. 

आज हम जिस मामले के बारे में आपको बताना चाहते हैं, उसकी कहानी कुछ ऐसी ही है. कानून पर विश्वास और खुद पर यकीन की इस कहानी से कुकर्मी का दंश झेल रहे एक युवक को फिर से जीने का मकसद दे दिया है.

हुआं यूं कि भीलवाड़ा के बीगोद क्षेत्र का रहना वाला युवक इकबाल प्रदेश के चुरू जिले के रतनगढ़ में एक मदरसे में बच्चों को तालीम देने के लिए गया. 12 मई 2019 को मौलाना इकबाल के खिलाफ मदरसे में पढ़ने आए एक बच्चे के परिजनों की और से मौलाना पर कुकर्म करने का आरोप लगाते हुए हंगामा खड़ा कर दिया. धार्मिक स्थान पर मौलाना के कुकर्म की खबरों ने भी तेजी से जोर पकड़ा और इस मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए प्रथम दृष्टया मौलाना इकबाल को आरोपी मानते हुए गिरफ्तार कर जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा दिया.

सभी से लगाता रहा मौलाना गुहार
घटना के दिन से ही मौलाना इकबाल अपनी बेगुनाही को लेकर सभी से गुहार लगाता रहा, लेकिन मामला 11 साल के मासूम बच्चे के कुकर्म का था, इसलिए किसी ने मौलाना इकबाल की एक न सुनी. पुलिस ने मामले में घटना के दिन मौलाना का मेड़िकल करवाया और चार्जशीट तैयार कर कोर्ट मे पेश कर दी. कोर्ट में 5 महीनों तक चली सुनवाई के बाद दूध का दूध और पानी का पानी हो गया. जो मौलाना घटना के समय अपनी बेगुनाही की दुहाई दे रहा था, मेड़िकल रिपोर्ट ने भी उसकी बेगुनाही को साबित कर दिया.

बच्चे ने भी घटना से किया इंकार
यहीं नहीं, मामले में कुकर्म का शिकार बताए गए 11 साल के मासूम ने भी कोर्ट में हुई गवाही में किसी भी तरह की अप्राकृतिक घटना उसके साथ होने से इंकार कर दिया है. मेड़िकल रिपोर्ट और पीड़ित की गवाही के आधार पर विशेष न्यायाधीश, विशेष न्यायालय, लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण मामलात, चूरू पीठासीन अधिकारी राजेंद्र कुमार सैनी ने फैसला सुनाते हुए मौलाना इकबाल पुत्र अब्दुल सत्तार लौहार निवासी बीगोद को आईपीसी की धारा 377, 5एफ,एन/6 पॉक्सो अधिनियम, 2012 के आरोप से साक्ष्य अभाव में दोशमुक्त कर दिया. प्रकरण में कोर्ट ने परिस्थितियों को देखते हुए पीड़ित बालक को धारा 357क के तहत पीड़ित प्रतिकर योजना के तहत प्रतिकर राशि दिलाए जाने की भी अनुशंसा की है.

क्या था पूरा मामला
गौरतलब है कि मई 2019 में बीगोद निवासी मौलाना इकबाल लौहार को रतनगढ़ की मस्जिद मौहम्मदी, नीलगिरान मोहल्ले में बतौर मौलाना स्थानीय कमेटी द्वारा बुलाया गया था. मोहल्ले में ही कमेटी के दो गुटों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था और एक गुट मोहल्ले से मस्जिद को हटवाना चाहता था. मस्जिद के निर्माण के दौरान भी दोनों पक्षों में विवाद के हालात पैदा हुआ थे. ऐसे में दूसरे गुट ने पहले गुट द्वारा बुलाए गए मौलाना इकबाल को मस्जिद से चले जाने को कहा लेकिन मौलाना ने बच्चों के पढ़ाई के प्रति अपना फर्ज समझते हुए जाने से इंकार कर दिया. 

इसी बीच द्वेषता रखने वाले लोगों ने 10 मई 2019 को क्षेत्र के एक 11 वर्षीय मासूम बच्चे को मस्जिद में पढ़ने भेजा और अगले ही दिन 12 मई को उक्त बच्चे के कुकर्म का आरोप लगाते हुए मस्जिद के बाहर हंगामा खड़ा कर दिया गया. हंगामे की सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस ने मौके की स्थिति को भांपते हुए मौलाना इकबाल को प्रथम दृष्टया आरोपी मानते हुए हिरासत में ले लिया और मेड़िकल कराने के बाद न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे चुरू जेल भेज दिया गया. करीब 5 माह चली सुनवाई के बाद जब मौलाना इकबाल की बेगुनाही साबित हुई तो जिंदीगी जीने की आस छोड़ चुके इकबाल में कानून के प्रति सम्मान तो बड़ा ही साथ ही खोई हुई इज्जत को फिर से पाकर सम्मान के साथ जीने का जज्बा जागा. उन्होंने बीगोद में ही फिर से मौलाना बनकर अपने काम को आगे बढ़ाया है.