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राजस्थान कांग्रेस लिया संगठन को मजबूत करने के लिए अभियान चलाने का फैसला

प्रदेश कांग्रेस कार्यसमिति ने लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार की जिम्मेदारी लेते हुए पीसीसी में हुई इस बैठक में राहुल गांधी के अध्यक्ष पद पर बने रहने का प्रस्ताव पारित किया गया. 

राजस्थान कांग्रेस लिया संगठन को मजबूत करने के लिए अभियान चलाने का फैसला
प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित कर दिया एआईसीसी को भिजवा दिया गया है.

जयपुर: राजस्थान लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद आज प्रदेश कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक आयोजित हुई. प्रदेश कांग्रेस कार्यसमिति ने लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार की जिम्मेदारी लेते हुए पीसीसी में हुई इस बैठक में राहुल गांधी के अध्यक्ष पद पर बने रहने का प्रस्ताव पारित किया गया. प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित कर दिया एआईसीसी को भिजवा दिया गया है. बैठक में आने वाले दिनों में कांग्रेस के संगठन के मजबूत करने के लिए बड़े स्तर पर अभियान चलाने का निर्णय लिया.

लोकसभा चुनाव में राजस्थान की सभी 25 सीटें गंवाने के बाद मचे बवाल के चलते लग रहा था कि आज प्रदेश कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में बड़ा हंगामा हो सकता है लेकिन बैठक से पहले ही प्रदेश के नेताओं की तरफ से संभावित नाराजगी जाहिर करने वाले नेताओं को ताकीद कर दिया गया. इसके चलते बैठक में केवल और केवल राहुल गांधी के अध्यक्ष बने रहने के प्रस्ताव पर ही चर्चा हुई. 

बैठक में प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे ने राहुल गांधी के अध्यक्ष पद पर बने रहने का प्रस्ताव रखा. जिसे मुख्यमंत्री उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट ने अनुमोदित किया और सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर दिया गया. बैठक में कार्यसमिति ने इस हार की जिम्मेदारी ली है और आने वाले दिनों में सबक लेते हुए संगठन को मजबूत करने की बात कही गई है.

बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए सचिन पायलट ने कहा वर्तमान में कांग्रेस जिन हालातों से गुजर रही है उसके मद्देनजर राहुल गांधी का नेतृत्व पार्टी के लिए बेहद जरूरी है. सभी ने अपील की है और उम्मीद है राहुल गांधी पार्टी के नेतृत्व को संभालने की जिम्मेदारी निभाएंगे. संगठन के कमजोर होने के सवाल पर सचिन पायलट ने कहा आने वाले दिनों में कांग्रेस के समय समक्ष निकाय और पंचायत चुनाव की चुनौती है. लिहाजा राजस्थान में ग्रास रूट तक एक बड़ा अभियान चलाया जाएगा.

कुल मिलाकर आज की इस बैठक में मंथन केवल इस बात पर हुआ कि पार्टी की कमान राहुल गांधी संभाले. जिन नेताओं ने पार्टी के खिलाफ बयानबाजी की है कि अवसरवादीता की राजनीति दिखाने की कोशिश की है उनके खिलाफ एक्शन लेने की कोई बात नहीं की गई. निश्चित तौर पर ऐसे में कैसे उम्मीद की जा सकती है कि आने वाले दिनों में भी इन बड़बोले बयान बहादुरों को रोका जाना संभव हो पाएगा.