राजस्थान: दो करोड़ के गबन के बाद पूरे प्रदेश में जांच करेगा आबकारी विभाग

आबकारी विभाग हनुमानगढ़ में गबन हुआ तो पूरे प्रदेश में दस्तावेजों को खंगालने का काम शुरू हो गया है.

राजस्थान: दो करोड़ के गबन के बाद पूरे प्रदेश में जांच करेगा आबकारी विभाग
वित्त भवन, जयपुर

दीपक गोयल, जयपुर: आबकारी विभाग हनुमानगढ़ में गबन हुआ तो पूरे प्रदेश में दस्तावेजों को खंगालने का काम शुरू हो गया है. हनुमानगढ़ आबकारी विभाग में दो करोड़ रुपए के गबन के बाद उदयपुर मुख्यालय ने पूरे प्रदेश के दस्तावेज खंगालने शुरू कर दिए हैं. दस्तावेज जांचने के लिए एक सॉफ्टवेयर डवलप किया गया है. उदयपुर मुख्यालय ने प्रदेश के सभी जिला आबकारी अधिकारी को वित्तीय वर्ष 2019-20 के दस्तावेजों की जांच के निर्देश दिए हैं. इससे अन्य जिलों में भी अगर विभाग की साइट से छेड़छाड़ कर घोटाला किया गया होगा तो वह भी सामने आ जाएगा.

आबकारी विभाग ने हनुमानगढ़ में करोड़ों रूपए गबन के प्रकरण के बाद दस्तावेज जांचने का नया सॉफ्टवेयर इजाद कर दिया है. इस सॉफ्टवेयर के जरिए सभी जिला आबकारी अधिकारियों को वित्तीय वर्ष 2019-20 के दस्तावेजों की जांच शुरू करने के निर्देश जारी किए गए हैं. आबकारी विभाग में चालू वित्तीय वर्षीय रिकार्ड में गड़बड़ी मिलने पर वित्तीय वर्ष 2018-19 की भी जांच होगी. हनुमानगढ़ जिले में विभाग की ईग्रास साइट में फर्जीवाड़ा कर दो करोड़ का गबन किया जा चुका है.

मुख्यालय की ओर से प्रदेश के सभी जिलों में अगस्त 2017 में इस साइट को शुरू किया गया था. गौरतलब है कि हनुमानगढ़ जिला आबकारी विभाग के अंतर्गत चालू वित्तीय वर्ष में तहसील नोहर, रावतसर व भादरा में मदिरा उठाव के नाम पर एक करोड़ का गबन सामने आया था. इसके बाद विभाग की ओर से वित्तीय वर्ष 2018-19 में भी दस्तावेजों को जांचने के बाद एक करोड़ का गबन और निकला तो आबकारी विभाग के उच्चाधिकारियों के होश फाख्ता हो गए. 

हैरानी इस बात की थी कि ई ग्रास साइट पर बैंक चालान जमा कर परमिट जारी कर ठेकेदारों की ओर से मदिरा का उठाव तो कर लिया, लेकिन प्रदेश में राजस्व अर्जन का सबसे स्त्रोत आबकारी विभाग को चूना लगाते हुए खाते में बैंक चालान की राशि जमा नहीं होना पाया गया. साइट पर जिन बैंक चालान को जमा कर परमिट जारी कराने का रिकार्ड में हवाला दिया गया उनमे में से अधिकांश बैंक चालान फर्जी पाए गए थे. जोकि एसबीआई व पीएनबी बैंक के थे. 

मुख्यालय से मिले निर्देश के बाद हनुमानगढ़ जिले के करीब 45 ठेकेदारों सहित एक कर्मचारी पर तहसील नोहर, भादरा व रावतसर थाने में मुकदमे दर्ज करवाए जा चुके हैं. इसके अलावा जांच में जिला आबकारी विभाग हनुमानगढ़ के पांच आबकारी निरीक्षक सहित तत्कालीन जिला आबकारी अधिकारी की लापरवाही मानी गई है. इनके खिलाफ विभागीय स्तर पर कार्यवाही करने की बात कही जा रही है.

आबकारी विभाग में वित्तीय वर्ष 2019-20 में एक करोड़ का गबन होने पर विभाग के अधिकारियों ने ठेकेदारों को धरोहर राशि जब्त करने की चेतावनी दी तो करीब 95 लाख की रिकवरी कुछ दिनों में ही कर ली गई. इसी तरह वित्तीय वर्ष 2018-19 में भी एक करोड़ का गबन होने पर अधिकारियों ने रिकवरी करने का खूब प्रयास करने पर करीब दस लाख रुपए की ही रिकवरी हो पाई. क्योंकि इनकी ओर से जमा धरोहर राशि वित्तीय वर्ष खत्म होने पर वापस उठा ली गई.

ऐसे में आबकारी विभाग उदयपुर मुख्यालय की ओर से पूरे प्रदेश में चालू वित्तीय वर्ष की जांच करने के निर्देश दिए हैं. ताकि हनुमानगढ़ की तरह अन्य जिलों में भी गबन होने पर राजस्व की रिकवरी की जा सके. लू वित्तीय वर्ष 2019-20 व 2018-19 के रिकार्ड की जांच के बाद दो करोड़ का गबन सामने आ चुका है. उदयपुर मुख्यालय की ओर से हनुमानगढ़ आबकारी विभाग को स्थानीय स्तर पर वित्तीय वर्ष 2017-18 के रिकार्ड की जांच करने के निर्देश दिए. इस जांच में कई तरह खामियां आने पर अब उदयपुर मुख्यालय की ओर से बीकानेर की टीम भेजकर दस्तावेजों की जांच करवाई जाएगी.

बहरहाल, हनुमानगढ़ में करीब दो करोड़ के गबन के बाद यह गड़बड़ी कहीं अन्य जिलों में भी तो नहीं की गई इसकी पुष्टि करने के लिए चालू वित्तीय वर्ष के रिकार्ड की जांच करने के लिए सभी जिला आबकारी अधिकारी को निर्देश दिए गए हैं. खामियां मिलने पर गत वित्तीय वर्ष के रिकार्ड की भी जांच की जाएगी और विभागीय कार्रवाई की जाएगी.