फसलों पर टिड्डियों के हमले से परेशान राजस्थान सरकार, अब केंद्र से लगाई मदद की गुहार

टिड्डी नियंत्रण का विषय मुख्यतः भारत सरकार के अधीन है. ऐसे में केंद्र सरकार को प्रभावी नियंत्रण के लिए राज्य सरकार को अतिरिक्त संसाधन एवं सहयोग उपलब्ध कराने चाहिए.

फसलों पर टिड्डियों के हमले से परेशान राजस्थान सरकार, अब केंद्र से लगाई मदद की गुहार
किसानों के लिए राजस्थान में टिड्डी दल अभी भी परेशानी का सबब बना हुआ है.

जयपुर: राजस्थान के पश्चिमी जिलों के किसानों के लिए टिड्डी दल अभी भी चिंता का सबब बना हुआ है. आमतौर पर सर्दी की शुरुआत में टिड्डी का प्रकोप कम हो जाता है लेकिन उसके बावजूद राजस्थान का पश्चिमी क्षेत्र टिड्डी के प्रकोप की मार झेल रहा है. यही वजह है मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने विभाग के अधिकारियों को आवश्यक कदम उठाने के साथ-साथ केंद्र सरकार से भी अतिरिक्त संसाधनों की मांग की है.

किसानों के लिए राजस्थान में टिड्डी दल अभी भी परेशानी का सबब बना हुआ है. राज्य सरकार के प्रयासों के बावजूद इनके प्रकोप पर काफी हद तक अंकुश लगा है लेकिन इसके बावजूद पश्चिमी राजस्थान के कई जिले से हैं, जो अभी भी टिड्डी दल के प्रकोप की मार झेल रहे हैं. यही वजह है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अब इस मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार से ही संसाधनों की मांग की हैं. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जयपुर में टिड्डी दल के नुकसान और उपायों को लेकर उच्च स्तरीय बैठक के बाद केंद्र सरकार को अतिरिक्त संसाधनों सहयोग के लिए पत्र लिखा है. 

विशेषज्ञों का मानना है कि दिसंबर महीने तक टिड्डियों का लगातार सक्रिय रहना सामान्य घटना नहीं है. टिड्डी नियंत्रण का विषय मुख्यतः भारत सरकार के अधीन है. ऐसे में केंद्र सरकार को प्रभावी नियंत्रण के लिए राज्य सरकार को अतिरिक्त संसाधन एवं सहयोग उपलब्ध कराने चाहिए.

● राजस्थान में जैसलमेर, बाड़मेर, जालोर, जोधपुर, बीकानेर, चूरू, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ एवं नागौर जिलों में टिड्डी का प्रकोप हुआ है और मई माह से अब तक लगभग 9-10 टिड्डी के बडे़ समूहों ने राज्य में प्रवेश किया है. 
● प्रदेश के पश्चिमी क्षेत्र में कई माह से टिड्डियों की सक्रियता बनी हुई है. इस पर नियंत्रण के लिए राज्य सरकार टिड्डी चेतावनी संगठन के सहयोग से लगातार कार्रवाई कर रही है.
● प्रदेश का कृषि विभाग टिड्डी चेतावनी संगठन के जोधपुर स्थित क्षेत्रीय कार्यालय के साथ सतत् सम्पर्क एवं समन्वय बनाए हुए हैं. 
● टिड्डी की सक्रियता अक्टूबर माह में सर्दियों की शुरूआत के साथ कम हो जाती है लेकिन इस बार उनका प्रकोप अभी भी बना हुआ है. इससे फसलों के प्रभावित होने की आशंका है. 
● टिड्डियां हवा के साथ पाकिस्तान के रास्ते प्रदेश की पश्चिमी सीमा में प्रवेश करती हैं. 

वर्तमान में जैसलमेर एवं बाड़मेर में टिड्डी का प्रकोप तुलनात्मक रूप से ज्यादा है. मई माह से अब तक कृषि विभाग ने टिड्डी चेतावनी संगठन जोधपुर की मदद से 3 लाख 10 हजार हैक्टेयर क्षेत्र में टिड्डी का नियंत्रण कर फसल एवं अन्य वनस्पति को बचाया है. इस कार्य में 2 लाख 21 हजार लीटर से अधिक मेलाथियान रसायन का प्रयोग किया गया है. फसलों को टिड्डी के प्रकोप से बचाने के लिये राज्य सरकार ने अब तक 3 करोड़ 7 लाख रुपये की स्वीकृति जारी की है लेकिन इन सबके बावजूद राज्य सरकार राजस्थान में डीजल के प्रकोप को खत्म करने के लिए पूरी तरह से कामयाब नहीं हो पाई है. यही वजह है कि अब केंद्र सरकार से बड़े स्तर पर मदद मांगी गई.

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत राजस्थान में किसानों की फसलों को टिड्डी दल के प्रकोप से बचाने को लेकर बेहद गंभीर हैं. पिछले 2 महीने में सीएम इस मुद्दे को लेकर 4 बार उच्च स्तरीय बैठक लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर चुके हैं. राज्य सरकार इस दिशा में अभी भी सक्रिय तौर पर काम कर रही है. लेकिन जरूरत है कि केंद्र सरकार किसानों के हित में जरूरी कदम उठाए और राज्य सरकार को आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराएं ताकि राजस्थान के पश्चिमी जिलों के किसानों की फसल को टिड्डी के प्रकोप से बचाया जा सके.