राजस्थान पंचायत चुनाव: आरक्षण की तस्वीर साफ, पुनर्गठन की तस्वीर अब भी धुंधली

15 नवंबर के आदेश के बाद बनी नई पंचायतों की अधिसूचना को मान्य नहीं किया जाता है तो फिर से नए सिरे से पंचायतों के लिए वोटर लिस्ट अपडेट, पुनर्गठन को लेकर बड़ी मशक्कत करनी पड़ेगी. 

राजस्थान पंचायत चुनाव: आरक्षण की तस्वीर साफ, पुनर्गठन की तस्वीर अब भी धुंधली
हाईकोर्ट के आदेश का असर 17 नवंबर और 12 दिसंबर को जारी नोटिफिकेशन पर पड़ा है.

जयपुर: राजस्थान में जनवरी और फरवरी में पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव होने हैं. चुनाव के लिए लॉटरी निकलने के बाद आरक्षण की तस्वीर तो साफ हो गई लेकिन अब तक पंचायतों के पुनर्गठन की तस्वीर अब भी धुंधली ही दिखाई दे रही है. 

हाईकोर्ट के आदेश के बाद 15 और 16 नवंबर के बाद पंचायतीराज विभाग की अधिसूचना रद्द हो चुकी है. ऐसे में अब ग्राम पंचायत और पंचायत समितियों की पुनर्गठन की स्थिति अब तक साफ हो नहीं पाई है क्योंकि अब राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट में चली गई है. ऐसे में अब सुप्रीम के आदेश के बाद ही तस्वीर साफ हो पाएगी कि 15 और 16 नवंबर के बाद वाले आदेश लागू होते है या नहीं. 

हाईकोर्ट के आदेश के बाद पंचायतीराज विभाग को बडा झटका लगा था. कोर्ट के आदेश के बाद 17 नवंबर को जारी अधिसूचना में 178 नई ग्राम पंचायतों और 6 पंचायत समितियों का पुनर्गठन रद्द हो चुका है. वहीं 12 दिसंबर को जारी अधिसूचना में झुंझुनू और नागौर में 26 नई ग्राम पंचायतों और 3 पंचायत समितियों के आदेश भी रद्द हो चुके हैं.

क्या तय समय पर नहीं होंगे पंचायत चुनाव?
15 नवंबर के बाद आदेश यदि लागू होता है तो जिला प्रशासन को ज्यादा माथापच्ची करने की जरूरत नहीं होगी लेकिन यदि 15 नवंबर के आदेश के बाद बनी नई पंचायतों की अधिसूचना को मान्य नहीं किया जाता है तो फिर से नए सिरे से पंचायतों के लिए वोटर लिस्ट अपडेट, पुनर्गठन को लेकर बड़ी मशक्कत करनी पड़ेगी. कुछ ऐसे भी जिले हैं, 15 नवंबर के आदेश के पहले और बाद की तैयारी भी कर चुके हैं लेकिन ऐन वक्त पर उनकी लॉटरियों को स्थगित कर दिया है. 
अब अफसर पशोपेश की स्थिति में है आखिर लॉटरी किस आधार पर निकलेगी और कब चुनाव होंगे? ऐसे में तय समय पर चुनाव होने के पर भी संकट के बाद मंडरा रहे हैं. वहीं पंचायत समितियों में भी प्रशासन लगाने की चर्चाएं जोरों पर हैं क्योंकि तय समय पर चुनाव नहीं होंगे तो पंचायतों का कार्यकाल खत्म हो जाएगा. प्रदेश में तीन निकायों का कार्यकाल खत्म होने के बाद जिला कलक्टर्स को प्रशासक लगाया गया है.

पंचायतीराज विभाग का ये है तर्क
अभी यह मामला सुप्रीम कोर्ट चला गया. यदि सुप्रीम कोर्ट भी हाईकोर्ट का आदेश लागू करता है तो प्रदेश में 1264 नई ग्राम पंचायतें और 48 पंचायत समितियां के पुनर्गठन पर चुनाव होंगे. प्रदेश में ग्राम पंचायतों की संख्या 11,152 और पंचायत समितियों की संख्या 346 हो जाएगी. यदि सुप्रीम कोर्ट 15 नवंबर के बाद वाली अधिसूचनाओं के पक्ष में यह फैसला सुनाता है तो प्रदेश में 11,356 नई ग्राम पंचायत और 355 पंचायत समितियां गठित होगी.

क्या थी 15 और 16 नवंबर की अधिसूचना
पंचायतीराज विभाग ने 12 जून को नोटिफिकेशन जारी किया था, जिसमें निर्वाचन विभाग को ये कहा गया था कि 15 नवंबर तक पंचायतों का पुनर्गठन कर रिपोर्ट सौप दी जाएगी. पंचायतीराज विभाग ने 15 नवंबर को पंचायतों का पुनर्गठन कर 16 को गजट नोटिफिकेशन जारी भी कर दिया लेकिन उसके बाद फिर से संशोधित पंचायत पुनर्गठन के आदेश निकाले. इसके बाद मामला हाईकोर्ट चला गया और 15, 16 नंवबर के बाद गठित पंचायतों के पुनर्गठन के आदेशों को रद्द करना पड़ा. इस आदेश के बाद मतदाता सूची का काम तुरंत प्रभाव से रोका गया लेकिन अब राजस्थान इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंची है.

17 नवंबर और 12 दिसंबर की अधिसूचना क्यों रद्द हुई?
हाईकोर्ट के आदेश का असर 17 नवंबर और 12 दिसंबर को जारी नोटिफिकेशन पर पड़ा है. 17 नवंबर के आदेश में 178 नई ग्राम पंचायतों और 6 पंचायत समितियों का पुनर्गठन हुआ था. इसके बाद फिर से 12 दिसंबर को आदेश जारी किया गया था, जिसमें 26 नई ग्राम पंचायत और 3 पंचायत समितियों का पुनर्गठन किया गया था लेकिन हाईकोर्ट के आदेश के बाद ये दोनों आदेश रद्द हो गए.