UGC के निर्देश के बाद भी राजस्थान यूनिवर्सिटी में नहीं लगवाए जा रहे जैमर, जानिए वजह

नकल के मामलों में भी राजस्थान यूनिवर्सिटी पीछे नहीं है और वर्ष 2017 में जो नकल का जो कारनामा हुआ, उसने राजस्थान विश्वविद्यालय की पूरे देश में साख गिरा दी. 

UGC के निर्देश के बाद भी राजस्थान यूनिवर्सिटी में नहीं लगवाए जा रहे जैमर, जानिए वजह
राजस्थान यूनिवर्सिटी से करीब 600 से ज्यादा कॉलेज संबद्धता रखते हैं, जिसमें 7 जिले आते हैं.

जयपुर: कॉलेज और यूनिवर्सिटी में परीक्षा के दौरान होने वाली नकल को रोकने के लिए अब यूजीसी (University Grants Commission) सख्ती के मूड में नजर आ रही है. इसी को लेकर यूजीसी (UGC) ने देश की सभी यूनिवर्सिटी ओर कॉलेजों को पत्र लिखकर परीक्षा के दौरान परिसर में जैमर लगाने के निर्देश दिए हैं, जिसकी पहुंच करीब 100 मीटर दूरी तक रह सके.

ऐसा इसलिए क्योंकि कई कदम उठाने के बाद भी देश के कई हिस्सों से परीक्षा के दौरान नकल की घटनाओं का होना रहा है लेकिन लगता नहीं है कि राजस्थान विश्वविद्यालय अभी इसके लिए तैयार है.

पहले ही गिर चुकी है साख
राजस्थान विश्वविद्यालय (Rajasthan University) का जब नाम आता है तो नकल के मामलों में भी राजस्थान यूनिवर्सिटी पीछे नहीं है और वर्ष 2017 में जो नकल का जो कारनामा हुआ उसने राजस्थान विश्वविद्यालय की पूरे देश में साख गिरा दी. वर्ष 2017 में नकल के एक बड़े गिरोह के साथ ही यूनिवर्सिटी के करीब दो दर्जन से ज्यादा शिक्षक और कर्मचारी भी एसओजी के शिकंजे में फंसे. उसके बाद से ही राजस्थान यूनिवर्सिटी की परीक्षाएं हमेशा से ही संदेह के घेरे में रही है.

वित्तीय दृष्टिकोण से जैमर लगाना संभव नहीं 
यूजीसी ने देश के सभी यूनिवर्सिटी ओर कॉलेज को परीक्षा के दौरान जैमर लगाने के लिए पत्र लिखा है लेकिन लगता है कि विवि प्रशासन इस पत्र को गंभीरता से नहीं ले रहा है. यूनिवर्सिटी कुलपति आरके कोठारी की मानें तो राजस्थान यूनिवर्सिटी में परीक्षा देने वाले परीक्षार्थियों की संख्या लाखों में है. साथ ही बड़ी संख्या में यहां परीक्षा केंद्र होते हैं, जिसके चलते वित्तीय दृष्टिकोण से जैमर लगाना संभव नहीं है. साथ ही परीक्षाएं तीन पारियों में  होने की वजह से भी वित्तीय भार ज्यादा होने से भी मुश्किल नजर आ रहा है.

यूनिवर्सिटी पर ज्यादा आर्थिक भार आ जाएगा
राजस्थान यूनिवर्सिटी से करीब 600 से ज्यादा कॉलेज संबद्धता रखते हैं, जिसमें 7 जिले आते हैं. ऐसे में हर परीक्षा केंद्र की बिल्डिंग पर जैमर लगाने के सवाल पर कुलपति आरके कोठारी का कहना है कि हालांकि जैमर पूरी बिल्डिंग पर लगाया जाता है और वो उस पूरी बिल्डिंग के साथ ही आसपास के क्षेत्र को भी कवर कर लेता है लेकिन परीक्षा तीन पारियों में होने की वजह से पूरे दिन जैमर का इस्तेमाल होगा, जिसके चलते यूनिवर्सिटी पर ज्यादा आर्थिक भार आ सकता है. अभी तक किसी विवि या कॉलेज ने अभी तक इसे लागू नहीं किया है लेकिन अगर जरुरत पड़ी तो यूनिवर्सिटी प्रशासन इसको लेकर विचार करेगा.

फिर एक बार प्रशासन बना रहा वित्तीय बहाना
विवादों में रही यूनिवर्सिटी हर बार वित्तीय भार का बहाना बनाकर अपना पल्ला झाड़ते हुए नजर आती है लेकिन 2017 में जो घटना हुई उसने राविवि को पूरे देश में शर्मिंदा तो किया लेकिन उसके बाद भी बढ़ते नकल के मामलों से विवि प्रशासन की साख गिरी है. इसी का नतीजा है कि आज राजस्थान यूनिवर्सिटी देश की मुख्य 200 यूनिवर्सिटी के ग्राफ से भी बाहर हो चुकी है.