close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

पोखरण के ट्रक ड्राइवर का बेटा बनेगा गांव का पहला डॉक्टर, नीट में हासिल किए 612 अंक

अभिषेक ने नीट-2019 में 612 अंक प्राप्त किए हैं तथा जनरल कैटेगिरी में 5305 आल इंडिया रैंक पर रहा है. 

पोखरण के ट्रक ड्राइवर का बेटा बनेगा गांव का पहला डॉक्टर, नीट में हासिल किए 612 अंक
अभिषेक धौलिया ही नहीं वरन आस-पास के गांवों का पहला डॉक्टर होगा.

पोखरण: कोचिंग सिटी कोटा जहां इंजीनियरिंग व मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं की तैयारियों के लिए छात्रों को प्रोत्साहित दिए जा रहा है. पिछले दिनों इंजीनियरिंग व मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं के परिणाम आने के बाद इस तरह के कई उदाहरण सामने आ रहे हैं. इन्हीं में से एक है जैसलमेर जिले के पोखरण तहसील के धौलिया गांव का छात्र अभिषेक जो कि डॉक्टर के रूप में अपना कॅरियर बनाने जा रहा है.छात्र अभिषेक ने नीट-2019 में 612 अंक प्राप्त किए हैं तथा जनरल कैटेगिरी में 5305 आल इंडिया रैंक पर रहा है. अभिषेक धौलिया ही नहीं वरन आस-पास के गांवों का पहला डॉक्टर होगा. 

ट्रक चलाते हैं पिता 
अभिषेक ने बताया कि परिवार मोहनगढ़ में रहता है. करीब तीन सौ घरों का गांव है और एक हजार आबादी है. परिवार में माता-पिता और हम दो भाई हैं. पापा जगदीश विश्नोई आठवीं पास हैं और ट्रक चलाते हैं. ट्रक ताऊजी का है और वो ड्राइवर के रूप में नौकरी करते हैं. मां पुष्पा देवी निरक्षर हैं, गृहिणी हैं. छोटे भाई सुमित ने इस वर्ष 12वीं उत्तीर्ण की है. 

इसके अलावा निम्न आय वर्ग होने व आय का स्थाई साधन नहीं होने के कारण सरकार ने बोर्डर पर जमीन दी हुई है. मोहनगढ़ क्षेत्र की यह जमीन गांव से करीब डेढ़ सौ किलोमीटर दूर है. एक सीजन में ही खेती हो पाती है, सर्दी में पानी नहीं होने के कारण खेती नहीं होती. खेती के दौरान वहीं रहना पड़ता है. 

अब टीचर बनना चाहता हूं
अभिषेक का कहना है कि नीट में चयन के बाद अब आरएनटी मेडिकल कॉलेज उदयपुर में प्रवेश लेने का इच्छुक हूं. एमबीबीएस करने के बाद क्या करूंगा अभी सोचा लेकिन टीचर बनने की इच्छा मन में है. जिस तरह एलन के टीचर्स स्टूडेंट्स की लाइफ बना रहे हैं, उसी तरह मैं भी टीचर बनकर ग्रामीण बच्चों का जीवन संवारना चाहता हूं. 

अभिषेक के मुताबिक गांवों में प्रतिभाएं तो बहुत हैं लेकिन अच्छे मार्गदर्शन व काउंसलिंग के अभाव में स्टूडेंट्स आगे नहीं बढ़ पाते. अच्छे अंक लाने के बाद भी प्रतिभाएं वहीं खत्म हो जाती है और सामान्य कामकाज में लग जाते हैं। मैं ऐसे विद्यार्थियों को आगे लाना चाहता हूं.