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राजस्थान विधानसभा में प्रश्नकाल को लेकर स्पीकर ने बनाया नियम, विधायक परेशान

नई व्यवस्था के अनुसार प्रश्नकाल में किसी भी तारांकित सवाल पर पूरक प्रश्न सिर्फ वही विधायक पूछ सकता है जिसने मूल प्रश्न लगाया है.

राजस्थान विधानसभा में प्रश्नकाल को लेकर स्पीकर ने बनाया नियम, विधायक परेशान

जयपुर: राजस्थान विधानसभा का बजट सत्र चल रहा है. वहीं इस बार सत्र में बहुत कुछ नया है. इसी बार स्पीकर ने भी एक नई व्यवस्था की है, जिसके अनुसार प्रश्नकाल में किसी भी तारांकित सवाल पर पूरक प्रश्न सिर्फ वही विधायक पूछ सकता है जिसने मूल प्रश्न लगाया है. अब स्पीकर की नई व्यवस्था से विधायक परेशान हैं. खुद नेता प्रतिपक्ष इस नई रूलिंग पर सवाल उठा चुके हैं. हालांकि स्पीकर साफ कर चुके हैं कि वे सर्वप्रिय होने के बजाय अनुशासन प्रिय होना ज्यादा पसन्द करेंगे. 

प्रदेश की विधानसभा में सबसे बड़ी बहस भी होती है, मुद्दे भी उठाये जाते हैं, लेकिन इन दिनों सबसे ज्यादा चर्चा प्रश्नकाल और उसकी नई व्यवस्था को लेकर है. प्रश्नकाल में ज्यादा से ज्यादा सवाल लिये जा सकें, इसके लिए स्पीकर सीपी जोशी ने जो आसन से नई व्यवस्था दी है इसका ज़िक्र खुद सीपी जोशी सर्वदलीय बैठक में भी कर चुके हैं. वे कहते हैं कि सदन की कार्यवाही अनुशासित तरीके से चले और ज्यादा सवाल आ सकें, इसके लिए पूरक प्रश्न पूछने की इजाज़त केवल मूल प्रश्नकर्ता को ही होगी. यानि प्रश्नकाल में जिस विधायक का तारांकित सवाल आएगा, वहीं सम्बन्धित मन्त्री से पूरक प्रश्न पूछ सकेगा. 

वहीं इस व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं. सबसे बड़ा सवाल तो बीजेपी की विधायक चन्द्रकालन्दा मेघवाल ने उठाया. इस व्यवस्था का विरोध जताने वाली चन्द्रकान्ता कहती हैं कि अगर ऐसी व्यस्था है तो क्या विधानसभा को यह बर्दाश्त होगा कि प्रश्नकाल के दौरान सिर्फ सम्बन्धित मन्त्री और प्रश्न लगाने वाले विधायक ही मौजूद रहें? चन्द्रकान्ता कहती हैं कि अगर 20-25 सदस्यों की मौजूदगी के साथ प्रश्नकाल चलाने की कल्पना की जाए तो कैसा लगेगा?

इधर बीजेपी के ही विधायक और पूर्व मन्त्री इस व्यवस्था के फायदे-नुकसान दोनों गिनाते हैं. दिलावर कहते हैं कि ज्याद से ज्यादा विधायकों के सवाल आएं इसके लिए यह अच्छी व्यवस्था है, लेकिन कई बार महत्वपूर्ण विषयों और व्यापक जनहित से जुड़े मुद्दों पर इसमें थोड़ी छूट भी देनी चाहिए. वह कहते हैं कि विधानसभा में अध्यक्ष सर्वोपरि हैं. लेकिन इसमें थोड़ी लिबर्टी दी जाए तो ज्यादा बेहतर रहेगा. 

वहीं सत्ताधारी कांग्रेस के विधायकों को तो स्पीकर की सभी व्यवस्थाएं स्वीकर हैं. पहली बार विधानसभा पहुंचे मसूदा विधायक राकेश पारीक कहते हैं कि देश में मौजूदा हालात में सभी विधानसभा अध्यक्षों में सीपी जोशी सबसे ज्यादा अनुभवी हैं और उनका अनुशासन भी सख्त है. पारीक कहते हैं कि जोशी की व्यवस्था अच्छी है और वे लोकसभा की तरह सदन चलाना चाहते हैं.

भले कांग्रेस विधायक स्पीकर की व्यवस्था को सही मानते हों लेकिन नेता प्रतिपक्ष गुलाबचन्द कटारिया इससे इक्तेफाक नहीं रखते. कटारिया कहते हैं कि अगर कोई सवाल प्रश्नकाल में शामिल हो गया तो वह हाउस की प्रोपर्टी हो जाता है और उस पर दूसरे विधायकों को सवाल पूछने का अधिकार मिलना चाहिए. इस मामले में कटारिया विधानसभा अध्यक्ष से मिलकर अपनी बात भी कह चुके हैं और इसमें सुधार का आग्रह भी किया है.

यह सही है कि विधानसभा अध्यक्ष सदन में सबसे ऊपर है और उनकी व्यवस्थाएं माननी भी पड़ती है. लेकिन इसी सदन में पिछली बार स्पीकर रहे कैलाश मेघवाल ने मूल प्रश्नकर्ता के आलावा तीन अन्य विधायक का एक-एक पूरक प्रश्न लेने की व्यवस्था दी थी. इससे पहले के अध्यक्ष दीपेन्द्र सिंह शेखावत तो और भी उदार थे. दीपेन्द्र सिंह ने अपने समय में व्यसव्था दी थी कि अगर प्रश्नकाल में सवाल शामिल होने के बाद सवाल लगाने वाला विधायक सदन में नहीं आता है. तब भी मन्त्री को जवाब देना होगा. शेखावत ने ऐसा करते हुए तर्क दिया था कि सवाल लगने के बाद वह सदन की प्रॉपर्टी हो गया. इस सवाल पर दूसरे विधायक जनहित में पूरक प्रश्न पूछ सकते हैं. अपनी व्यवस्थाओं के बारे में दोनों पूर्व स्पीकर आज भी अपने तर्क रखते हैं. हालांकि वह स्पीकर के सम्मान में कैमरे पर कुछ भी कहने से परहेज भी करते हैं.