Year Ender 2019: साल के सबसे कड़े फैसले, जिसने बदली देश की दशा और दिशा

मौजूदा वक्त साल 2019 को अलविदा कहने का है. इस खबर में हम आपको बताएंगे साल 2019 में केंद्र सरकार के बड़े फैसलों के लिहाज से कैसा रहा.   

Year Ender 2019: साल के सबसे कड़े फैसले, जिसने बदली देश की दशा और दिशा
फाइल फोटो

मौजूदा वक्त साल 2019 को अलविदा कहने का है. इस खबर में हम आपको बताएंगे साल 2019 में केंद्र सरकार के बड़े फैसलों के लिहाज से कैसा रहा. 2019 में दूसरी बार सत्ता में आते ही नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार ने कुछ ऐसे फैसले लिए, ​जिससे देश का इतिहास, भूगोल और यूं कहें कि भारत को लेकर दुनिया की सोच भी बदल दी. हालांकि अयोध्या विवाद, तीन तलाक और अनुच्छेद 370 को लेकर लिए गए फैसले काफी चुनौतीपूर्ण भी रहे, लेकिन मोदी सरकार ने अपने कड़े और बड़े फैसलों की बदौलत साल 2019 को फैसलों का ही साल बना दिया.

मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक से निजात
नरेंद्र मोदी सरकार ने साल 2019 में कई बड़े फैसले किए लेकिन जो सबसे पहले और सबसे मुश्किल भरा फैसला था वो था अल्पसंख्यक महिलाओं को तीन तलाक के दंश से निजात दिलाना. ऐसे में साल 2019 की शुरूआत में ही मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक से निजात दिलाने का कदम केंद्र सरकार ने उठाया. सरकार ने तीन तलाक पर प्रतिबंध के लिए ‘मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण विधेयक-2019’ को लोकसभा और राज्यसभा से पारित कराया. अगस्त महीने में कानून बनने के बाद भारत में तीन तलाक कानूनी तौर पर अपराध बन गया.

जम्मू-कश्मीर से हटा Article 370
साल 2019 में जम्मू-कश्मीर का मुद्दा देश में सबसे ऊपर रहा 5 अगस्त 2019 को कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को मोदी सरकार ने हटा दिया. यह बिल गृहमंत्री अमित शाह सबसे पहले राज्यसभा में लेकर आए, जिसमें जम्मू-कश्मीर से 370 का हटना, राज्यों का बंटवारा और केंद्रशासित प्रदेश बनाने का प्रस्ताव था. जब यह बिल लाया गया तो इसे मुस्लिम विरोधी बताया गया. कहा गया कि धारा 370 हटा कर कश्मीर के मुस्लिमों को सरकार दबाना चाहती है.

अयोध्या विवाद पर आया फैसला
मौजूदा सदी का सबसे बड़ा विवाद जो कई दशकों से फैसले का इंतजार कर रहा था. उसका इंतजार साल 2019 में जाकर खत्म हुआ. भगवान राम की जन्मभूमि में उनके जन्म को साबित करने के लिए देश की आजादी के पहले से चल रहा विवाद आखिरकार मोदी राज मे सुलझ ही गया. 9 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट की 5 जजों की पीठ ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा कि विवादित स्थल पर राम मंदिर का निर्माण होगा. मुस्लिम पक्ष को अयोध्या में ही अलग से 5 एकड़ जमीन दी जाएगी. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार तीन महीने के अंदर राम मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट बनाए, ताकि आगे की प्रक्रिया तय हो. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का पूरे देश में स्वागत हुआ.

असम में एनआरसी का आगमन
मोदी सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल में ही असम के राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर यानि एनआरसी के दूसरे और अंतिम मसौदे को जारी कर अपना दांव लगाया. एनआरसी में शामिल होने के लिए आवेदन किए 3.29 करोड़ लोगों में से 2.89 करोड़ लोगों के नाम शामिल किए गए, बाकि 40-41 लाख लोगों के नाम इसमें नहीं थे। इस ड्राफ्ट के सामने आने के बाद से असम और पूरे देश में राजनीतिक भूचाल सा आ गया, जिसका जगह जगह विरोध भी हुआ.

UAPA एक्ट में संशोधन
नरेंद्र मोदी सरकार के UAPA यानी गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम संशोधन विधेयक-2019 को लेकर भी विपक्ष के साथ काफी विवाद रहा. हालांकि, इसे भी पारित कराने में सरकार कामयाब रही. इसके कानून के बाद अब सरकार किसी भी व्यक्ति विशेष को आतंकवादी घोषित कर सकती है और उसकी संपत्ति भी जब्त कर सकती है. जबकि, इससे पहले तक आतंकवाद विरोधी कानून में सिर्फ यह प्रावधान था कि वह किसी समूह को प्रतिबंधित कर सकता था, लेकिन किसी को व्यक्तिगत तौर पर नहीं.

बालाकोट में एयर स्ट्राइक
14 फ़रवरी को भारत प्रशासित कश्मीर के पुलवामा ज़िले में सीआरपीएफ़ के एक काफ़िले पर जैश-ए-मोहम्मद के आत्मघाती हमले में 40 जवानों के शहीद होने के बाद भारत ने 26 फ़रवरी को पाकिस्तान में चरमपंथी संगठनों के ठिकानों को निशाने पर लिया था. भारत ने यह कार्रवाई पाकिस्तान के ख़ैबर पख़्तुनख़्वा प्रांत के बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद के ठिकानों पर की थी.

सख्त हो गए यातायात नियम
मोदी सरकार ने ट्रैफिक व्यवस्था को दुरूस्त रखने और नागरिकों को इसके प्रति गंभीर बनाने के मकसद से मोटर व्हीकल एक्ट-2019 को लागू किया. इस कानून में जुर्माने की राशि इतनी तय की गई, जिसे लेकर देश भर में मानो हड़कंप मच गया.

VVIP सुरक्षा में कटौती
मोदी सरकार स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप यानि एसपीजी संशोधन बिल 2019 को लोकसभा और राज्यसभा से पास कराने में कामयाब रही. इस बिल में सिर्फ प्रधानमंत्री को SPG सुरक्षा देने का प्रावधान है और उनके अलावा कोई भी VVIP इस सुरक्षा कवच का हकदार नहीं होगा.

कई बैकों का आपस में विलय
नरेंद्र मोदी की नेतृत्व वाली सरकार ने आर्थिक सुधार की दिशा में बैंकों का विलय करके चार बड़े बैंक बनाने की घोषणा की. ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स और यूनाइटेड बैंक का पंजाब नेशनल बैंक में विलय कर दिया गया. वहीं, सिंडिकेट बैंक को केनरा बैंक और इलाहाबाद बैंक को इंडियन बैंक में मिलाया गया. आंध्र बैंक और कॉरपोरेशन बैंक को यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में मिलाया गया.

नागरिकता संशोधन विधेयक पास
जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को समाप्त किए जाने और उसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने के बाद मोदी सरकार को तब बड़ी कामयाबी मिली जब उसने नागरिकता संशोधन विधेयक यानि सीएबी को दोनों सदनों से पारित करा लिया गया. राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद अब ये क़ानून बन चुका है, लेकिन संसद से पारित होने के बाद भी इस कानून को लेकर जारी चर्चा थमी नहीं है. इस क़ानून के विरोध में देश के कई हिस्सों में विरोध-प्रदर्शन शुरू हुआ है. इसके कानून के तहत पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के छह समुदायों हिंदू, सिख, जैन बौद्ध, ईसाई और पारसी धर्म के लोगों को नागरिकता देना है. इनमें वह सभी शामिल होंगे जो वैध दस्तावेज के बिना भारत आए हैं या जिनके दस्तावेज की समय सीमा समाप्त हो गई है.