जोधपुर: दो बुजुर्गों ने बदल दी श्मशान घाट की तस्वीर, मोक्षधाम बन गया हरा-भरा उद्यान

जोधपुर के बाप कस्बे के रहने वाले 69 साल के श्रीगोपाल थानवी और 61 साल के जयप्रकाश व्यास ने मोक्षधाम के पास बने ब्रह्मबाग को उद्यान में तब्दील कर दिया है.  

जोधपुर: दो बुजुर्गों ने बदल दी श्मशान घाट की तस्वीर, मोक्षधाम बन गया हरा-भरा उद्यान
प्रतीकात्मक तस्वीर

अरुण हर्ष, जोधपुर: जिले के बाप कस्बे के रहने वाले 69 साल के श्रीगोपाल थानवी और 61 साल के जयप्रकाश व्यास ने मोक्षधाम के पास बने ब्रह्मबाग को उद्यान में तब्दील कर दिया है. दोनों बुजुर्गों ने पर्यावरण संरक्षण के लिए पिछले पास सालों से अपना पसीना बहाया और यहां की सूरत ही बदल दी.

ये दोनों हरदिन चार घंटे यहां पेड़-पौधो की सार संभाल करने के साथ समूचे परिसर का रख-रखाव का काम करते हैं और इसी का नतीजा है कि ब्रह्मबाग में शव सुरक्षित रखने के लिए फ्रीजर, बैठने के लिए प्लास्टिक की कुर्सियां, लोहे की बैंचे, कुलर, पंखे, गीजर, बॉयलर आदि सुविधाएं उपलब्ध हैं. स्नान ग्रह में 40 नल, जिसमें 20 ठंडे पानी के लिए और 20 गर्म पानी के लिए लगे हुए हैं. दोनों पर्यावरण कार्यकर्ताओं को कई कठिनाईयां भी सामने आई, लेकिन वे हारे नहीं. दोनों की मेहनत व परिश्रम का प्रतिफल हैं कि बाप में इस तरह का हराभरा स्थल ही बना.

इन दोनों पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने बताया कि 2014 में वो अपने एक रिश्तेदार के अंतिम संस्कार में यहां आए थे और श्मशान घाट की स्थिति देखकर काफी दुखी हो गये थे. फिर इन्होंने श्मशान घाट की सूरत बदलने की ठान ली थी. 

आज ब्रह्मबाग में 200 से ज्यादा पेड़ पौधे लगे हुए हैं. इनमें गुलाब, अनार, दुर्लभ गुलमोहर, हरश्रंगार, नीम, कनेर, महेंदी, पासर पीपली, सदाबहार, नींबू, केली व छायादार पेड़ शामिल हैं। पूर्व में यहां सेवाएं दे चुके तीन उपखंड अधिकारियों के लगाए पौधे भी पेड़ के रूप में तब्दिल हो रहे हैं. दोनों ने बताया कि जल कनेक्शन भी ले लिया गया है. समय-समय पर दानदाताओं व भामाशाहों का सहयोग लेकर आवश्यक सुविधाएं भी जुटाई जा रही है. उद्यान की मरम्मत से लेकर यहां की स्थिति और बेहतर करने के लिए लोगों से आर्थिक मदद भी ली जाती है और उसी का नतीजा है. कि इस श्मशान घाट को पहली नजर में कोई श्मशान घाट नहीं बोल सकता.

दोनों ने बताया कि वे 4 घंटे नियमित आते हैं. पौधो की सार संभाल, उन्हें पानी पिलाना और साफ सफाई करना, पानी की टंकियां भरना राेजमर्रा के काम में शमिल हो गया है.