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Republic Day Special: मिलिए भारतीय सेना की 'स्पेशल 42' टीम से, ऐसी होती है कठिन ट्रेनिंग

'स्पेशल 42' सीआरपीएफ की वो बहादुर टीम है जिसे दिल्ली से करीब 120 किलोमीटर दूर हरियाणा के जंगलों में तैयार किया जा रहा है. पिछले 51 हफ्तों से ट्रेनिंग ले रही इस टीम में कुछ महिला अधिकारी भी हैं.

Republic Day Special: मिलिए भारतीय सेना की 'स्पेशल 42' टीम से, ऐसी होती है कठिन ट्रेनिंग

नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर (Jammu-kashmir) से अनुछेद 370 हटने के बाद से पाकिस्तान बौखलाहट में है. और वो कश्मीर में अमन चैन के इस माहौल को खराब करने की साजिश रचने में लगा है. खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक सीमा पार बने लॉन्चिंग पैड पर सैकड़ों आतंकियों का जमावड़ा है और सभी आतंकी पाक सेना की मदद से कश्मीर में दाखिल होने की लगातार साजिश रच रहे हैं. इन आतंकी गुटों के साथ-साथ कश्मीर में मौजूद पत्थरबाजों से निपटने की भी दोहरी चुनौती है. 26 जनवरी को देशभर में गणतंत्र दिवस मनाया जाएगा. इस मौके पर हम आपकी मुलाकत ऐसे 'स्पेशल 42' से करवा रहे हैं जिन्हें आतंकियों के साथ-साथ नक्सलियों को खत्म करने के लिए भी तैयार किया जा रहा है. 

हम जब अपने घरों में चैन की सांस ले रहे होते हैं तब देश की सेवा में तैनात कुछ जांबाजों की एक टीम खास मिशन की तैयारी में लगी होती है. दरअसल, जम्मू-कश्मीर में अनुछेद 370 हटने के बाद से आतंकी बौखलाहट में हैं. वो पाकिस्तान के इसारे पर देश में बड़ी आतंकी वारदात करने की साजिश में हैं. आतंकियों की इस साजिश को नाकाम करना जरूरी है और ऐसे खतरों से निपटने के लिए स्पेशल टीम को इन जंगलों में तैयार किया जा रहा है. 

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दरअसल 'स्पेशल 42' सीआरपीएफ की वो बहादुर टीम है जिसे दिल्ली से करीब 120 किलोमीटर दूर हरियाणा के जंगलों में तैयार किया जा रहा है. पिछले 51 हफ्तों से ट्रेनिंग ले रही इस टीम में कुछ महिला अधिकारी भी हैं. जिन्होंने अपनी आराम पंसद जिदंगी छोड़कर देश की सेवा के लिए सीआरपीएफ में शामिल होने का फैसला लिया.  

असिस्टेंट कमांडेंट मोनिका ने बताया कि 'स्पेशल 42' को कुछ इस तरह से तैयार किया जा रहा है कि ये युध्द जैसे हालात से भी बड़े आराम से निपट सकें. इस टीम में सभी असिस्टेंट कमांडेट रैंक के अधिकारी हैं जिन्हें हर तरीके के आधुनिक हथियारों को चलाना सिखाया जा रहा है.  जिससे वो आतंकियों का मुकाबला कर सकें. 

सीआरपीएफ के आईजी रणदीप दत्ता ने बताया कि 'स्पेशल 42' को कड़े फिजिकल और मेंटल टेस्ट से भी गुजरना पड़ता है. जिससे वो कठिन और विपरीत हालात में भी दुश्मनों का जोरदार तरीके से मुकाबला कर सकें. ट्रेनिंग के दौरान सैंड बैग्स से भी गुजरना पड़ता है जिससे उनके कॉन्संट्रेशन की जांच की जा सके. 

जवानों को ट्रेनिंग दे रहे एक अन्य सीआरपीएफ के अधिकारी ने कहा कि 'स्पेशल 42' की ट्रेनिंग अब लगभग पूरी हो चुकी है. इस टीम को कुछ महीनों में देश के सबसे खतरनाक जगहों पर तैनात किया जाएगा. एंटी नक्सल ऑपरेशन से लेकर कश्मीर में पत्थरबाजों से भी निपटने के लिए ये टीम अब पूरी तरह से तैयार हो चुकी है. उन्होंने कहा कि 11 महीनों से इन जंगलो में तैयार हो रही टीम के ज्यादातर अधिकारी जम्मू-कश्मीर में भी ड्यूटी के लिए तैनात किए जाएंगे. 

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