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जैसलमेर में दिवाली के बाद सैलानियों का जमावड़ा, गूंज उठी स्वर्ण नगरी की सड़कें

पर्यटन सीजन की धीमी शुरूआत के चलते जैसलमेर में इस बार पर्यटन में मंदी की आशंका जताई जा रही थी लेकिन दिपावाली के बाद से बढे सैलानियों ने पर्यटन व्यवसाइयों के चेहरों पर रौनक लौटा दी है.

जैसलमेर में दिवाली के बाद सैलानियों का जमावड़ा, गूंज उठी स्वर्ण नगरी की सड़कें
फाइल फोटो

मनीष रामदेव, जैसलमेर: दिपावाली के बाद जैसलमेर में काफी संख्या में देशी - विदेशी पर्यटकों की आवक से शहर में एकाएक भीड़ बढ गई है. जिससे शहर के होटलों में नो रूम की स्थिति पैदा हो गई है. बड़ी संख्या में आए गुजराती पर्यटकों के चलते शहर के बाजारों और पर्यटक स्थलों पर रेलमपेल बढ़ गई है. सुबह होते ही जैसलमेर के सोनार किले सहित गडीसर झील और हवेलियों की ओर जाने वाले सड़कों पर सैलानियों का मेला लगना शुरू हो जाता है. बात करें अगर सोनार किले की तो यहां पर इन दिनों कदम तक रखने की जगह नहीं बची है.

दीपावली पूजन के अगले दिन से गुजरात से आने वाले सैलानियों की संख्या में एकाएक इजाफा होने लगता है और फिर एक सप्ताह तक लगातार गुजरात से यहां आने वाले सैलानियों की आवक बनी रहती है. इसी कड़ी में इस बार भी बड़ी संख्या में गुजराती सैलानी जैसलमेर भ्रमण के लिए आए हैं. जिससे शहर की पार्किंग स्थलों सहित सड़कों पर भीड़ के हालात बन गए हैं. आलम यह है कि यहां आने वाले सैलानियों को रूकने के लिए कमरे तक कम पड़ने लगे हैं. वहीं रेतीले धोरों पर सूर्यास्त का आनंद लेने पहुंच रहे सैलानियों को ऊंट की सवारी के लिए भी लम्बी कतार में इंतजार करना पड़ रहा है. सम के धोरों में बने कैम्प में रात गुजारने के लिए ये सैलानी मुहमांगी कीमतें तक देने को तैयार हैं लेकिन वहां जगह नहीं मिल पा रही है. 

पर्यटन सीजन की धीमी शुरूआत के चलते जैसलमेर में इस बार पर्यटन में मंदी की आशंका जताई जा रही थी लेकिन दिपावाली के बाद से बढे सैलानियों ने पर्यटन व्यवसाइयों के चेहरों पर रौनक लौटा दी है. होटल से लेकर रेस्टोरेंट और गाईड से लेकर स्थानीय दुकानदार हर कोई इन सैलानियों की आवक से व्यस्त हो गया है और अच्छी कमाई की उम्मीद कर रहा है. 

वहीं जैसलमेर भ्रमण करने वाले इन सैलानियों का भी कहना है कि जैसलमेर उनके लिए सपनों के शहर जैसा है. यहां के किले हवेलियां और रेतीले धोरे हर किसी को आकर्षित करने वाले हैं. सैलानियों का यह भी कहना है कि एक बार यहां आने के बाद बार बार आने की इच्छा होती है. यहां आने वाले सभी सैलानी गड़ीसर झील, शानदार किला और नक्काशीदार हवेलियों में अपने इन पलों को कैमरे में कैद कर इसे चिरस्थाई बना रहा है.

सोनार दुर्ग में हजारों की संख्या में सैलानी पहुंच रहे:
स्वर्णनगरी सैलानियों की आवक से रोशन हो गई है. दिपावाली के अगले दिन से गुजराती पर्यटकों की आवक शुरू हो जाती है. इस बार भी सैलानियों की भारी भीड़ है और शहर में सैलानियों की आवक में इजाफा हुआ है. एक अनुमान के मुताबिक 20 हजार से अधिक सैलानी जैसलमेर पहुंच चुके हैं. सुबह सोनार दुर्ग में हजारों की संख्या में सैलानी पहुंच रहे हैं. 

दुर्ग की तलहटी पर सैलानियों का ही जमावड़ा ही नजर आ रहा है. पर्यटन व्यवसायी उत्साहित है और आगामी 5 दिन तक जैसलमेर में गुजराती पर्यटकों की भीड़ रहेगी. सोनार दुर्ग में इतनी भीड़ हो रही कि पुलिसकर्मियों को यातायात सुचारू करने के लिए मशक्कत करनी पड़ रही है. हालात यह है कि दुर्ग में जाने के लिए लोगों को 5 मिनट की जगह आधा घंटा लग रहा है. शहर में भी इतनी भीड़ है कि जगह-जगह बारबार जाम लग रहा है. शहर में एकाएक सैलानियों की जबरदस्त आवक होने से हर जगह भीड़ दिखाई दे रही है.

शहर के सभी पार्किंग स्थल हाउसफुल:
शहर के सभी पार्किंग स्थल हाउसफुल नजर आ रहे हैं. सैलानियों को वाहन खड़ा करने की भी जगह नहीं मिल रही है. फोर्ट पार्किंग में सैकड़ों वाहनों की कतारें लगी हुई है. वहीं मलका प्रोल, गड़ीसर, पटवा हवेली, हनुमान चौराहा, गांधी चौक सहित सभी पार्किंग स्थलों पर वाहनों की कतारें लगी हुई है. शहर से 45 किमी दूर सम स्थित धोरों पर जाते ही ऐसा नजारा है मानो अलग ही शहर बस गया हो. शाम होते ही 50 से अधिक रिसोर्ट चकाचौंध लाइटिंग से जगमगा जाते है और साथ ही लोक धुनों की गूंज दूर-दूर तक सुनाई देती है. हजारों पर्यटक सम पहुंच रहे हैं और केमल सफारी का लुत्फ उठा रहे हैं.