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मनी लॉन्ड्रिंग केसः डीके शिवकुमार की जमानत याचिका पर हाईकोर्ट का ED को नोटिस

दिल्ली हाईकोर्ट में मामले की अगली सुनवाई 14 अक्टूबर को होगी. इससे पहले 25 सितंबर को दिल्ली की Rouse एवेन्यू कोर्ट ने डीके शिवकुमार की जमानत याचिका को खारिज कर दिया था. 

मनी लॉन्ड्रिंग केसः डीके शिवकुमार की जमानत याचिका पर हाईकोर्ट का ED को नोटिस

नई दिल्लीः मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार कर्नाटक कांग्रेस के नेता डीके शिवकुमार की जमानत याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा. मामले की अगली सुनवाई 14 अक्टूबर को होगी. इससे पहले 25 सितंबर को दिल्ली की Rouse एवेन्यू कोर्ट ने डीके शिवकुमार की जमानत याचिका को खारिज कर दिया था. बता दें कि राउज एवेन्यू कोर्ट ने कांग्रेस नेता डीके शिवकुमार को 1 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया था. साथ ही कोर्ट ने शिवकुमार की स्वास्थ्य को पहली प्राथमिकता देते हुए उन्हें अस्‍पताल शिफ्ट करने को कहा था.

कोर्ट ने कहा था कि अगर डॉक्‍टर शिवकुमार को अस्पताल में एडमिट करने को जरूरी बताते हैं तो उन्हें अस्पताल में एडमिट किया जाए और अस्पताल से डिस्चार्ज होते हैं उन्हें तिहाड़ जेल भेजा जाए.

जानिए क्या है पूरा मामला 
शिवकुमार 2016 में नोटबंदी के बाद से ही आयकर विभाग और ईडी के रडार पर थे. मामला 2017 का है जब इनकम टैक्स विभाग ने छापे के दौरान 60 ठिकानों से 11 करोड़ रुपए कैश बरामद किया था. इसके अलावा करोड़ों की संपत्ति का पता चला था. इसी के बाद ईडी ने मनी लाउंड्रिंग का मुकदमा दर्ज किया था. जांच के दौरान ईडी को ये भी पता चला था कि शिवकुमार के इशारों पर उनके करीबियों ने दिल्ली के चांदनी चौक से कैश लेकर दिए गए पते पर पहुंचाने का काम भी कर रहे थे, यानी हवाला के तार भी जुड़े थे. इसके अलावा इस बात का भी पता चला कि डी के शिवकुमार ने कई करोड़ रुपए की चोरी भी की है, हालांकि शिवकुमार हमेशा कहते रहे कि उन्हें फंसाया गया है और राजनीतिक साजिश है.

मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार कांग्रेस के नेता डी के शिवकुमार के लिए वरिष्ठ और जाने माने वकील मुकुल रोहतगी भी हुए पेश थे, उनका कहना था कि कोई मर्डर का केस नहीं है. उनको  जमानत दी जाए.डी के शिवकुमार की तरफ से पूरी कोशिश की गई थी उनको स्पेशल कोर्ट से ही जमानत मिल जाए, लेकिन कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद 25 सितम्बर को अपना फैसला सुनाया और उनकी जमानत याचिका को खारिज कर दिया.

पूछताछ की अवधि खत्म होने के बाद ईडी ने कहा था कि डी के शिवकुमार को न्यायिक हिरासत में भेज दिया जाए. उनके स्वास्थ्य का रोजाना चेकअप किया जाता है. सेहत खराब होने की वजह से हर रोज पूछताछ नहीं हो पा रही है. न्यायिक हिरासत में भी पूछताछ की इजाजत दी जाए, हालांकि कोर्ट ने इसकी इजाजत नहीं दी थी.

साथ ही ED का कहना था कि केवल 41 लाख की बात की जा रही है. जो 8.59 करोड़ बरामद हुआ उस पर भी नियंत्रण डी के शिवकुमार का ही था. 9 लोगो से जांच और पूछताछ भी हुई है. जांच में 143 करोड़ रुपए के मनी लाउंड्रिंग का पता चला है. 20 विभिन्न बैंकों में 317 खाते बना कर मनी लांड्रिंग की गई है. हमने इनके चार्टर्ड अकाउंटेंट का भी बयान लिया है. इन्होंने कैश पैसे देकर भी प्रापर्टी बनाई है.इनकी बेटी जिसकी उम्र सिर्फ़ 22 साल है उसके नाम पर 108 करोड़ का लेन देन किया गया है.

डी के शिवकुमार के वकीलों ने ईडी के तमाम दलीलों का विरोध किया और कहा था कि तबियत लगातार ख़राब है. वो तीन बार अस्पताल में भर्ती हो चुके हैं. छाती में भी दर्द हो रहा है. बावजूद इसके ईडी ने रिमांड लिया और दो हफ्ते गुजार दिए. कहते है पूछताछ पूरी नहीं हुई है. जिन पैसों के मनी लाउंड्रिंग की बात ईडी कर रही है उनके सबूत कहां है.

एजेंसी की नियत केवल परेशान करने की है,जो भी लेनदेन हुआ है, रिटर्न भरते वक्त दिखाया गया है. इतना ही नहीं जमानत की मांग करते हुए कहा गया था कि जिंदगी भर पब्लिक के सामने रहें है. शिवकुमार के संबंधित खातों से सिर्फ़ 41 लाख मिले हैं. सबका टैक्स भरा गया है. कोई आधार नहीं बनता कि  सिर्फ़ जेल में रखने के लिए 120B लगा दी जाए. ये पूरा केस एक रेड के आधार पर है जो सभी अधिकारियों के सामने हुआ.

मामला दस्तावेजों पर आधारित है. हम चाहते हैं कि हमारे क्लाइंट को बेल दी जाए. हम कोर्ट में पासपोर्ट जमा करने को भी तैयार हैं. तमाम दलीलों को सुनने के बाद कोर्ट ने जमानत पर 21 सितम्बर को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था.