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देश की सबसे बड़ी भूमिगत जल विद्युत परियोजना समेत कई जगहों पर बिजली उत्पादन हुआ ठप

नाथपा झाकड़ी से दैनिक 38.5 मिलियन यूनिट बिजली रोज तैयार होती है और दैनिक आमदनी 11 करोड़ है. रामपुर परियोजना से 10.5 मिलियन यूनिट बिजली और साढ़े चार करोड़ दैनिक आमदनी होती है. 

देश की सबसे बड़ी भूमिगत जल विद्युत परियोजना समेत कई जगहों पर बिजली उत्पादन हुआ ठप
इसके साथ शिमला ज़िला के झाकड़ी और बॉयल के बीच निर्मित 412 मेगावाट की रामपुर हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट से भी बिजली उत्पादन बन्द किया गया है.

बिशेषर नेगी/रामपुर बुशहर: पहाड़ों पर ज्यादा बारिश और बादल फटने की घटनाओं के कारण पहाड़ी नदी-नालों का जल स्तर बढ़ने के साथ पानी मटमैला हो गया है. इसके चलते सतलुज घाटी क्षेत्र की जलविद्युत परियोजनाओं से बिजली उत्पादन ठप हो गया है. सतलुज नदी में बनी देश का सबसे बड़ा भूमिगत हाइड्रोपावर स्टेशन नाथपा झाकड़ी (पंद्रह सौ मेगावॉट) समेत 412 मेगावॉट का रामपुर और 120 मेगावॉट की संजय विद्युत परियोजना से बिजली उत्पादन रविवार सुबह से ठप हो गया है. इससे परियोजना निर्माताओं को भी दैनिक करीब 1600 करोड़ रूपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है. 

नाथपा झाकड़ी से दैनिक 38.5 मिलियन यूनिट बिजली रोज तैयार होती है और दैनिक आमदनी 11 करोड़ है. रामपुर परियोजना से 10.5 मिलियन यूनिट बिजली और साढ़े चार करोड़ दैनिक आमदनी होती है. परियोजना प्रबंधको के अनुसार, जब तक सिल्ट की मात्रा कम नहीं होती बिजली उत्पादन संभव नहीं है. उनका कहना है कि अधिक सिल्ट यानी मटमैले पानी से बिजली उत्पादन इकाइयों को नुकसान होता है. देश की सबसे बड़ी भूमिगत जल विद्युत परियोजना 1500 मेगावॉट की नाथपा झाकड़ी से सतलुज की सहायक नदी भाबा खड्ड में सिल्ट बढ़ने के कारण बिजली उत्पादन रविवार सुबह साढ़े नौ बजे बन्द किया गया. 

इसके साथ शिमला ज़िला के झाकड़ी और बॉयल के बीच निर्मित 412 मेगावाट की रामपुर हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट से भी बिजली उत्पादन बन्द किया गया है. क्योंकि इस परियोजना के लिए नाथपा झाकड़ी पावर स्टेशन से बिजली तैयार होने के बाद उसी पानी को टेप कर रामपुर पावर स्टेशन को जोड़ा गया है. नाथपा झाकड़ी के बांध स्थल के समीप भाबा खड्ड और पानवी खड्ड में पानी का बहाव बढ़ गया था. दोनों ही खड्डों के मुहाने के आसपास बादल फटने से पानी मटमैला होने के साथ जलस्तर बढ़ गया था. 

किन्नौर जिला के भाबा खड्ड में भारी बारिश होने के कारण पानी में गाद अधिक है. इससे भाबा खड्ड में बनी 120 मेगावॉट की संजय विद्युत परियोजना से भी बिजली उत्पादन बंद कर दिया गया है. किन्नौर जिले में स्थित नाथपा बांध स्थल पर सतलुज नदी में सिल्ट रविवार शाम 7000 पार्ट/मिलियन हो गया है. जबकि जलस्तर करीब 1500 क्युसमेक्स है. मुख्य महाप्रबंधक एवं परियोजना प्रमुख संजीव सूद का कहना है कि जब तक सतलुज नदी में नाथपा बांध स्थल पर सिल्ट घट कर 5000 हजार पार्ट/मिलियन नही होती, बिजली उत्पादन ठप रखा जाएगा. उन्होंने बताया कि परियोजना  की विद्युत उत्पादन करने वाली मशीनो को पांच हजार पीपीएम से अधिक सिल्ट में खराब होने का खतरा रहता है.

उन्होंने बताया कि सतलुज की सहायक नदी-नालों में अधिक बारिश से जलस्तर बढ़ गया है. इससे पानी मटमैला हो गया है. उन्होंने बताया कि भाबा खड्ड में सिल्ट काफी अधिक है. संजीव सूद ने बताया कि सतलुज स्पीति नदी संगम स्थल किन्नौर जिला के खाब में तिब्बत की ओर से आने वाली सतलुज और स्पीति नदी का जल स्तर दोनों मिला कर 350 क्यूमेक्स है और सिल्ट भी सामान्य है. लेकिन किन्नौर जिला मुख्यालय के समीप पोवारी में सिल्ट बढ़ कर 6000 पार्ट/मिलियन हो गया है. नीचे आने के बाद नाथपा परियोजना बांध स्थल पर सिल्ट 7000 पार्ट/मिलियन हो गया है. उन्होंने बताया रविवार सुबह सिल्ट 8000 पीपीएम था. उन्होंने बताया कि बारिश कम होने की स्थिति में सिल्ट सतलुज की सहायक नदी-नालों में कम होगी और सिल्ट सामान्य होते ही बिजली उत्पादन शुरू कर दिया जाएगा.