जानिए खींवसर उपचुनाव में क्या हैं मुद्दे, जनता की क्या है नेताओं से उम्मीद

आरएलपी के सुप्रीमो और नागौर सांसद किसानों के लिये प्रदेशभर में आंदोलन कर एक किसान नेता की पहचान बना चुके हैं मगर उनके गृह क्षेत्र के किसान  लंबे समय से यहां मंडी की मांग कर रहे हैं

जानिए खींवसर उपचुनाव में क्या हैं मुद्दे, जनता की क्या है नेताओं से उम्मीद

हनुमान तंवर, खींवसर: नागौर के खींवसर में हो रहे उपचुनाव को लेकर दोनों दलों में प्रचार जारी है. दोनों दल अपने-अपने पक्ष में जनता के बीच जाकर वोट की अपील कर रहे हैं और लगातार नेताओं के दौरे खींवसर क्षेत्र के गांवो में जारी हैं लेकिन खींवसर की मुख्य मांगे क्या हैं या विधानसभा क्षेत्र के मुख्य मुद्दे क्या हैं, क्या मुद्दे हावी हैं और किन मुद्दों पर नेता चुनाव लड़ने जा रहे हैं इसको लेकर जनता की राय क्या हैं आइए जानते हैं.

नागौर जिले की पहचान प्रदेश में एक ऐसे जिले के रूप में है जो देश भर में अपनी राजनीति की छाप छोड़ता है. यहां जिसे जनाधार मिलता है वो प्रदेश ही नहीं बल्कि देश की राजनीति को भी प्रभावित करता है. नागौर जिले के खींवसर में यहां से विधायक रहे हनुमान बेनीवाल के सांसद चुने जाने के कारण विधानसभा उपचुनाव हो रहे हैं. एक तरफ अपनी अलग राजनीतिक छवि रखने वाले हनुमान बेनीवाल की प्रतिष्ठा का सवाल है तो दूसरी तरफ कांग्रेस जो कि सत्ता में है उसके लिए भी उपचुनाव चुनौती से कम नहीं है. 

इस वर्चस्व की लड़ाई में खींवसर के स्थानीय मुद्दे कहीं गायब हैं और स्थानीय लोगों को इसकी टीस भी है. नागौर और जोधपुर के बीच बेस इस विधानसभा क्षेत्र को अपेक्षा है कि जो भी जीतकर आएगा वो स्थानीय समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करेगा. यहां के लोगों को इस बात का भी मलाल है कि यहां चुनाव मुद्दों पर नहीं बल्कि जातिवाद पर लड़े जाते हैं.

आरएलपी के सुप्रीमो और नागौर सांसद किसानों के लिये प्रदेशभर में आंदोलन कर एक किसान नेता की पहचान बना चुके हैं मगर उनके गृह क्षेत्र के किसान  लंबे समय से यहां मंडी की मांग कर रहे हैं मगर आजतक मंडी नहीं खुल पाई जिससे यहां के किसानों की फसलों का उत्पादन सही और वाजिब दाम में नही बिक पाता है. इस चुनाव में भी किसानों की माने तो मंडी खुलवाना मुख्य मुद्दा है. इसके अलावा स्थानीय लोगों का कहना है कि कस्बे के कई क्षेत्रों में कई सालों से पानी तक नहीं पहुंचा है लेकिन इस ओर कोई ध्यान ही नहीं दे रहा.

हालांकि, स्टेडियम जैसे विकास कार्य स्थानीय युवाओं को लुभा रहे हैं. खींवसर में आरएलपी और भाजपा ने इस बार अपना संयुक्त प्रत्याशी नारायण बेनीवाल को मैदान में उतारा है तो कांग्रेस ने हरेन्द्र मिर्धा को यहां से प्रत्याशी बनाकर मैदान में उतारा है. दोनों ही प्रत्याशी जाट जाति से हैं मगर यहां दोनो ही दलों ने दूसरी सभी जातियों को दरकिनार किया है. दोनों दल सिर्फ जाट को महत्व देते हैं मगर बाकी जातियों का प्रतिनिधित्व यहां नहीं होता और इस वजह से इस बार बाकी जातियों का वोट बैंक भी खींवसर में निर्णायक हो सकता है.

खींवसर के उपचुनाव दोनों ही दलों के लिए प्रतिष्ठा का सवाल है लेकिन जनता किसको अपना नेता चुनती है यह चुनाव के बाद ही तय होगा. यह चुनाव नारायण बेनीवाल के लिए चुनौती हो सकते है मगर हरेन्द्र मिर्धा के लिए भी राह कम कठिन नहीं है. यह देखना दिलचस्प होगा कि जनता के मूद्दों पर कौन खरा उतरता है और जनता किसको खींवसर का अगला विधायक चुनती है.