नोएडा: सोसायटी में 'हाईटेक सिक्योरिटी' के नाम लाखों रुपये देने के बाद भी क्या आप सुरक्षित हैं?

क्या हाईटेक सिक्योरिटी से लैस सोसायटी में एंट्री करना क्या इतना आसान है? क्या हाईटेक सिक्योरिटी देने के नाम पर आपके साथ धोखाधड़ी हो रही है? देखिए हमारी ये रिपोर्ट....

नोएडा: सोसायटी में 'हाईटेक सिक्योरिटी' के नाम लाखों रुपये देने के बाद भी क्या आप सुरक्षित हैं?

नई दिल्ली: चमचमाती हुई सोसायटी, मुस्तैद खडे़ गार्डस, ऑटोमेटिक बूम बैरियर, सुरक्षा का भरोसा दिलाते तमाम बोडर्स. अगर आपकी हाउसिंग सोसायटी भी कुछ ऐसी है तो ये खबर आपके लिए है. नोएडा (Noida) एक्सटेंशन की एक सोसाइटी (Society) में रविवार को दो लोगों को गोली मार दी गई. इसके बाद से सोसायटी के लोग गुस्से में हैं. ऐसे में हमने जानना चाहा कि क्या हाईटेक सिक्योरिटी (Hitech Security) से लैस सोसायटी में घूसना क्या इतना आसान है? क्या हाईटेक सिक्योरिटी देने के नाम पर आपके साथ धोखाधड़ी हो रही है? देखिए हमारी ये रिपोर्ट....

सिक्योरिटी के नाम पर हर महीने वसूलते हैं 6 लाख रुपये
इस सोसायटी रहने के बदले हर महीने औसतन 3000 रुपये मेंटेनेंस के देने होते हैं. अगर हिसाब लगाया जाए तो 2000 फ्लैट के 6 लाख जमा हो जाते हैं. इसके बदले बिल्डर स्विमिंग पूल, क्लब और 24 घंटे सिक्योरिटी देने का वादा करता है. लेकिन इसके बावजूद अगर सोसायटी में किसी का मर्डर हो जाए तो हर किसी को अपनी जान का खतरा सताने लगता है. ये हाल लगभग हर सोसायटी का है, जहां सुरक्षा को ठेंगा दिखाकर किसी सोसायटी के अंदर घुसना बहुत आसान है.

एजेंसी से मांगे जाते हैं दिखावे वाले सुरक्षा गार्ड
8 से 10 हजार रुपये महीने में रोज 12 घंटे की ड्यूटी बजा रहा सुरक्षाकर्मी खुद बेबस है. ट्रेनिंग के नाम पर सुबह 5 मिनट की पीटी होती है, वही पीटी जो आपने प्राइमरी क्लास में की होगी. किसी की तोंद ऐसी कि जरूरत पडने पर अपनी सुरक्षा के लिए भी नहीं भाग पाए, तो कोई कुर्सी पर ही दिन बिता देता है. एजेंसी चलाने वाले कहते हैं कि सोसायटी को कम पैसों में गार्ड चाहिए, जिसमें सिर्फ दिखावा ही किया जा सकता है.

एक डंडा तक पास नहीं है..सुरक्षा कैसे करें?
सिक्योरिटी गार्ड को 9000 से ₹12000 तक के बीच सैलरी मिलती है. ज्यादातर सिक्योरिटी गार्ड 10वीं पास या उससे कम पढ़े लिखे होते हैं. ऐसा देखा गया है कि सिक्योरिटी की कोई ट्रेनिंग गार्ड्स को नहीं दी जाती. एक गार्ड से पूछा गया कि आप आपातकालीन या हमले की स्थिति में क्या करेंगे तो उसने कहा कि अगर ऐसी कोई घटना होगी तो वह सबसे पहले खुद छुपने की जगह ढूंढ लेंगे. सिक्योरिटी गार्ड के पास अपने बचाव या प्रेसिडेंट की सुरक्षा के लिए एक डंडा तक नहीं है.

जरूरत के हिसाब से पैकेज में होती है ट्रेनिंग
दरअसल, सिक्योरिटी गार्ड्स को उनके काम के हिसाब से ट्रेनिंग दी जाती है. मसलन, अगर किसी गार्ड को सोसाइटी में ड्यूटी करनी होती है तो उसके हिसाब से उसे ट्रेनिंग निर्धारित की जाती है. वहीं अगर किसी की हॉस्पिटल में ड्यूटी लगानी है, तो उसकी ट्रेनिंग थोड़ी अलग होती है. यहां जरूरत के हिसाब से अलग-अलग ट्रेनिंग पैकेज होते हैं. इसके अलावा सभी गॉड्स को एक बेसिक ट्रेनिंग भी दी जाती है कि कैसे उन्हें अपनी और क्लाइंट की सुरक्षा करनी है, उनकी जिम्मेदारियां क्या है? यह तय किया जाता है आदि.

मुखौटे की तरह किया जाता है गार्ड का इस्तेमाल
लेकिन बहुत ही सिक्योरिटी कंपनीज किसी तरह की कोई ट्रेनिंग गार्ड्स को नहीं देती क्योंकि ट्रेंड गार्ड रखने के लिए 20000 पर गार्ड कम से कम खर्च करने होते हैं और सोसायटी इतने पैसे खर्च करने के लिए तैयार नहीं होती. गार्ड्स सिर्फ एक मुखौटे की तरह हैं. वह इस तरह के हादसों से निपटने के लिए तैयार नहीं होते.

(इनपुट-रूफी जैदी से भी)

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