कोरोना से ठीक हुए मरीज 'व्रत' से करें परहेज, डॉक्टरों ने दी ये चेतावनी

नवरात्रि और करवा चौथ के मौके पर अगर आप भी व्रत रखने की सोच रहे हैं तो सावधान हो जाएं. कोरोना काल में व्रत रखना उन लोगों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है जो कोविड 19 महामारी से ठीक हुए हैं. 

कोरोना से ठीक हुए मरीज 'व्रत' से करें परहेज, डॉक्टरों ने दी ये चेतावनी

नई दिल्ली: नवरात्रि (Navratri) और करवा चौथ (Karva Chauth) के मौके पर अगर आप भी व्रत (Vrata) रखने की सोच रहे हैं तो सावधान हो जाएं. कोरोना काल (Coronavirus) में व्रत रखना उन लोगों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है जो कोविड 19 महामारी से ठीक हुए हैं. 

क्यों व्रत रखना है खतरनाक?
डॉक्टर्स के मुताबिक, कोरोना न सिर्फ हमारे शरीर के कुछ खास अंगों को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि हमारे इम्यून सिस्टम को कमजोर करता है. कोरोना 
से होने वाली मौत का भी मुख्य कारण कमजोर इम्यून सिस्टम है. डॉक्टरों का मानना है कि व्रत रखने से शरीर का डिफेंस मैकेनिज्म कमजोर होता है, जिस से रोगों से लड़ने की शरीर की क्षमता कम हो जाती है. 

क्या है एक्सपर्ट की राय?
मैक्स अस्पताल में इंटरनल मेडिसिन की एसोसिएट डायरेक्टर डॉ मीनाक्षी जैन ने कहा कि कोरोना सबसे ज्यादा उन पर असर करता है, जिनकी इम्युनिटी कमजोर है. कोविड अगर आपको हुआ है और आप ठीक हो गए हैं या अन्य कोई समस्याएं हैं, जैसे डायबिटीज, हैपेर्सटनेशन, प्रेग्नेंट हैं, तो भी व्रत या उपवास से बचें. क्योंकि भगवान पर आस्था के साथ-साथ स्वस्थ का ख्याल रखना भी जरूरी है. 

हिंदू धर्मगुरु ने कही ये बात
पंडित मुरारी शरण शुक्ल ने कहा कि कोरोना ने धैर्य और साहस के साथ-साथ भक्ति और श्रद्धा की परीक्षा भी है, और व्रत-उपवास में आस्था रखने वालों की परीक्षाएं चल रही हैं. और ये ध्यान में रखकर व्रत या उपवास के बारे में सोचें कि आप स्वस्थ रहेंगे तो परमात्मा भी आपसे खुश होंगे. उन्होंने बताया कि हिंदू धर्म में कोई भी त्योहार या पर्व नहीं कहता, कि आप व्रत या उपवास करके शरीर को खतरे में डालें. हिंदू धर्म में उपवास या व्रत का कोई सख्त नियम नहीं है. परिस्थिति और स्वास्थ्य के मुताबिक, उपवास रखा जा सकता है.

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