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राजस्थान: ग्राम पंचायतों के पुनगर्ठन की चाबी मंत्रिमंडलीय उप-समिति के पास, मिला वीटो पॉवर

पिछले एक महीने से प्रदेश में चल रही ग्राम पंचायतों के पुनगर्ठन की चाबी अब सरकार ने मंत्रिमण्डलीय उप समिति के हाथ में दे दी है. 6 सदस्यीय मंत्रियों की कमेटी को सरकार ने जनहित की आड़ में वीटो पावर भी दे दिया है.

राजस्थान: ग्राम पंचायतों के पुनगर्ठन की चाबी मंत्रिमंडलीय उप-समिति के पास, मिला वीटो पॉवर

जयपुर: पिछले एक महीने से प्रदेश में चल रही ग्राम पंचायतों के पुनगर्ठन की चाबी अब गहलोत सरकार ने मंत्रिमंडलीय उप-समिति के हाथ में दे दी है. 6 सदस्यीय मंत्रियों की कमेटी को सरकार ने जनहित की आड़ में वीटो पावर भी दे दिया है.

कमेटी की रिपोर्ट के बाद सरकार पंचायतों के पुनर्गठन पर अंतिम मुहर लगाएगी. वोट बैंक की सियासत के लिए सरकार की यह कमेटी जिला कलक्टरों की ओर से लिए फैसलों का भी रिव्यू करेगी.

अलगे साल होने हैं चुनाव
अगले साल गांवों की सरकार के चुनाव होने है. इसके लिए सरकार पंचायतों के पुनर्गठन को लेकर कार्यकर्ताओं की नाराजगी लेने के मूड में नहीं है.

सरकार लेगी निर्णय
सभी जिला कलक्टर्स से आए पंचायतों के पुनर्गठन के प्रस्तावों के बाद सरकार निर्णय लेगी. साथ ही संगठन की ओर से आए प्रस्तावों पर भी मंत्रीमण्डलीय उपसमिति चर्चा करेगी. कमेटी के अध्यक्ष उप-मुख्यमंत्री सचिन पायलट हैं. जबकि मंत्री शांति धारीवाल , मास्टर भंवरलाल मेघवाल, मंत्री हरीश चौधरी, मंत्री अंजना उदयलाल और मंत्री गोविन्द सिंह डोटासरा समिति में सदस्य के तौर पर शामिल होंगे. इस समिति के अक्टूबर के पहले सप्ताह तक रिपोर्ट देने की संभावना है.

नगर निकायों के आरक्षण की निकल चुकी लॉटरी
कांग्रेस सरकार ने शहरी निकायों के पुनर्गठन का काम अपनी मंशा के अनुसार पूरा कर लिया है. चुनाव वाली नगर निकायों में वार्डो की आरक्षण लॉटरी भी निकल चुकी है. फरवरी में होने वाले पंचायत चुनाव से पहले सरकार प्रदेश में कम से कम 450 नई ग्राम पंचायतें और 15 नई पंचायत समितियों गठित करने की तैयारी में है.

बीजेपी सरकार ने 20 साल बाद किया था पुनर्गठन
कांग्रेस सरकार से पहले पिछली भाजपा सरकार ने 20 साल बाद पंचायतों का पुनर्गठन किया था. इस दौरान 723 नई ग्राम पंचायत और 47 नई पंचायत समितियां बनाई थी. अब कांग्रेस सरकार ने तय किया है कि जिन ग्राम पंचायतों की आबादी 2011 की जनगणना के अनुसार 8 हजार से ज्यादा है उनको दो टुकड़ों में बांटा जाएगा.

जानिए क्या कह रहे हैं उप-मुख्यमंत्री पायलट
इस मामले में उप-मुख्यमंत्री पायलट ने कहा की जिले और जनप्रतिनिधियों से प्राप्त ऐसे प्रस्ताव जो पुनर्गठन, नव सृजन हेतु निर्धारित न्यूनत जनसंख्या या दूरी आदि मापदंडों को पूरा नहीं करते हो लेकिन जनता की सुविधा और प्रशासनिक लिहाज से पुनर्गठन किया जाना उचित है, तो कमेटी शिथिलिता दे सकेगी.

जिलों से आए ऐसे प्रस्ताव जो निर्धारित मापदंडों की पूर्ति करते है लेकिन जनहित में नहीं है उनको कमेटी अस्वीकृत भी कर सकेगी. समिति दोनों श्रेणी के प्रस्तावों को अपनी अनुशंषा के साथ मुख्यमंत्री को भेजेगी. जिस पर आगे कार्रवाई होगी.

पायलट ने कहा कि सरपंच यदि आठ हजार लोगों के बजाय तीन हजार लोगों का काम करेगा तो अपेक्षाकृत अच्छा काम कर सकता है. इसी मंशा को ध्यान में रखते हुए सरकार ने पुनर्सीमांकन का निर्णय किया था.

सरकार ने पंचायतीराज विभाग की ओर से नई ग्राम पंचायतों और नई पंचायत समितियों के नामों की अधिसूचना जारी होनी थी. सरकार ने जिला कलक्टरों को 80 दिन का समय दिया था. प्रदेश के सभी जिलों कलक्टरों के पास दो हजार से अधिक आपत्ति दर्ज हुई है. जिला कलक्टरों ने फाइल पंचायतीराज विभाग को भिजवा दी है. एक ग्राम पंचायत में न्यूनतम 4000 और अधिकतम 6500 की आबादी का आधार है. एक ग्राम पंचायत में कम पांच वार्ड अनिवार्य है. एक पंचायत से टूटकर दूसरी पंचायत में शामिल किए होने वाले गांव की पंचायत मुख्यालय से दूरी आठ किलोमीटर से ज्यादा नहीं होने के मामले में भी काफी पेंच है. अब अंतिम निर्णय सरकार की कमेटी करेगी.

राज्य सरकार का रोडमैप तैयार
बहरहाल, अपनों को फायदा पहुंचाने के लिए राज्य सरकार का रोडमैप तैयार हो चुका हैं. प्रशासनिक दृष्टि से जनता की भलाई के लिए किस प्रकार का नक्शा तैयार कर सकते हैं इसको लेकर मंथन चल रहा हैं.

जानिए पुनर्गठन के क्या हो सकता है फायदा
राज्य सरकार ने पहले से जो मापदंड तय किए हुए है कोशिश है कि उसके आधार पर ही काम हो. पंचायतों के पुनर्गठन और पुनर्सीमांकन के पीछे वजह ये है कि इससे जनता को रोजमर्रा के कामों में सहुलियत होगी अगर किसी पंचायत की जनसंख्या 10 हजार है अगर 10 की जगह 5 हजार जनसंख्या हो न तो प्रशासनिक अधिकारी को परेशानी आएगी और न ही जन प्रतिनिधियों को. छोटी पंचायतें होंगी तो लोगों के काम भी जल्दी होंगे.

Lakshmi Upadhyay, News Desk