यह है राजस्थान की सबसे कम वोटर्स वाली नगर पालिका, यहां हैं केवल 975 मतदाता

नसीराबाद नगर पालिका की घोषणा तत्कालीन भाजपा सरकार की मुखिया वसुंधरा राजे ने चुनावों से पूर्व कर दी थी. इसके बाद छावनी बोर्ड का संबंधित क्षेत्र एवं वार्डों को पालिका के अन्तर्गत लाने की प्रक्रिया पूर्ण रूप से क्रियान्वित नहीं हो पाई. 

यह है राजस्थान की सबसे कम वोटर्स वाली नगर पालिका, यहां हैं केवल 975 मतदाता
प्रतीकात्मक फोटो

जयपुर: प्रदेश में नवम्बर में निकाय चुनाव होने हैं. जयपुर ,कोटा और जोधपुर के इस निकाय चुनाव से बाहर होते ही चुनावों की तस्वीर पहले से अलग हो गई है. अब चुनावों में सर्वाधिक मतदाता वाला निकाय बीकानेर नगर निगम रह जाएगा, लेकिन बात यहां उस नगर पालिका की जहां सबसे कम मतदाता हैं. हाल ही में गठित अजमेर जिले की नसीराबाद नगर पालिका प्रदेश की एक मात्रा ऐसी नगर पालिका है जहां महज 957 ही मतदाता हैं. 20 वार्डों की इस नगर पालिका में वो प्रत्याशी वार्ड पार्षद बन जायेगा जिसके परिवार में 20 मतदाता हैं यानि प्रत्येक वार्ड में सिर्फ 40 के करीब ही मतदाता हैं. 

अजमेर जिला मुख्यालय से 25 किलोमीटर की दूरी पर बसा नसीराबाद, प्रदेश की सबसे कम मतदाता वाली नगर पालिका में शुमार हो गई है. इस नगर पालिका में महज 957 मतदाता, जो नवंबर में होने वाले नगर निकाय चुनाव में अपने मताधिकार का उपयोग करेंगे. 20 वार्डों की इस नगर पालिका में हजार से भी कम मतदाता होने के चलते रोचक और सबकी चर्चा का विषय बन गई. एक वार्ड में अगर एक ही परिवार के 20 मतदाता है तो समझो उसकी जीत तय है. जयपुर, जोधपुर और कोटा में दो-दो निगम बना दिए जाने से अगले माह 52 की जगह 49 शहरों में ही चुनाव होंगे.

राज्य निर्वाचन आयोग की सूची के अनुसार 49 निकायों में कुल 32 लाख 99 हजार 337 मतदाता वोट डालेंगे. जिसमें 17 लाख 1292 पुरुष मतदाता और 15 लाख 97998 महिला मतदाता हैं. वहीं 47 थर्ड जेंडर हैं. 49 निकायों के 2105 वार्ड में मतदान होगा और मतदान के लिए 3479 मतदान केंद्र बनाए गए हैं. 49 में सबसे अधिक मतदाता अब बीकानेर में 4 लाख 41 हजार 294 मतदाता हैं. वहीं अजमेर जिले की नसीराबाद में सबसे कम 957 मतदाता हैं. जिनमे 498 पुरुष और 459 महिला मतदाता अपने मताधिकार का उपयोग करेंगे.

राज्य सरकार की ओर से नसीराबाद को नगर पालिका बनाने के बाद यहां पहली बार हो रहे निकाय चुनाव की तैयारी पूरी कर ली गई है. मगर सबसे रोचक बात यह है कि इस नगर पालिका के 20 वार्डों की जनसंख्या महज 957 ही है. नसीराबाद में जिन वार्डों को दर्शाया गया है वो हाउसिंग बोर्ड से संबधित हैं, जिन वार्डों में यहां अच्छी खासी जनसंख्या है वे छावनी बोर्ड के अधीन हैं. 

नसीराबाद नगर पालिका की घोषणा तत्कालीन भाजपा सरकार की मुखिया वसुंधरा राजे ने चुनावों से पूर्व कर दी थी. इसके बाद छावनी बोर्ड का संबंधित क्षेत्र एवं वार्डों को पालिका के अन्तर्गत लाने की प्रक्रिया पूर्ण रूप से क्रियान्वित नहीं हो पाई. यही वजह है कि नगर पालिकाओं की आरक्षण लॉटरी में छावनी बोर्ड के वार्डों के अतिरिक्त को ही जनसंख्या में दर्शाया गया है. यह जो जनसंख्या है वह वर्ष 2011 की जनगणना के मुताबिक है. उधर, पालिका चुनाव से पूर्व प्रशासन की ओर से इन वार्डों में पुन: जनगणना कराने की कवायद भी गई, ताकि जो नए जुड़ी जनसंख्या है उसे भी नगर पालिका चुनाव की मतदाता सूची में शामिल किया जा सके , लेकिन मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन तक ये कवाद तकनिकी कारणों के चले पूरी नहीं हो पाई.

नगर पालिका क्षेत्र में नसीराबाद की सम्पूर्ण जनसंख्या को शामिल करने के लिए छावनी बोर्ड से एनओसी यानी अनापत्ति प्रमाण पात्र आवश्यक है. इसके लिए सेना के दिल्ली स्थित मुख्यालय से भी अनुमति मिलना आवश्यक है. हालांकि इसके लिए जनप्रतिनिधियों और सरकार के नुमाइंदों ने सम्पर्क साधा है और कार्यवाही चल रही है लेकिन नगर पालिका के नवम्बर तक प्रस्तावित चुनाव से पूर्व यह मुमकिन नहीं हो सकता. अब जब तक छावनी बोर्ड से एनओसी जारी नहीं होती तब तक निकाय चुनावों में संबंधित जनसंख्या की भागीदारी भी सुनिश्चित नहीं हो सकती है.