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इस Diwali कुछ कम मीठा हो जाए, डायबिटीज डे और दिवाली एक साथ

हम आपके लिए दिवाली पर डायबिटीज मरीज के लिए मिठाई गाइडलाइन लेकर आए हैं, जिससे आप और आपका स्वास्थ्य एक दम फिट रहे.

इस Diwali कुछ कम मीठा हो जाए, डायबिटीज डे और दिवाली एक साथ
फ़ाइल फोटो

नई दिल्ली: दिवाली का त्योहार अब दूर नहीं है. 14 नवंबर को दिवाली के दिन लोग ढेर सारी मिठाइयों के साथ दीये जलाएंगे, लेकिन आप इन सबके बीच ये न भूलना की 14 नवंबर को विश्व मधुमेह दिवस (World Diabetes Day) भी है, जिसपर आपको खास ध्यान देना है. जो डायबिटीज के मरीज है वो खास करके अपनी दिवाली वाली खुशी पर कंट्रोल करें. इसके साथ ही हम आपके लिए दिवाली पर डायबिटीज मरीज के लिए मिठाई गाइडलाइन लेकर आए हैं, जिससे आप और आपका स्वास्थ्य एक दम फिट रहे.

डायबिटीज के मरीज कौन सा मीठा खा सकते हैं –
डायबिटीज के मरीजों में खाने से मिलने वाली शुगर को ग्लूकोज यानी एनर्जी में बदलने वाला सिस्टम ठीक से काम नहीं करता. इसी को इंसुलिन रेजिस्टेंस कहा जाता है. डायबिटीज होने की वजह सिर्फ ज्यादा मीठा खाना ही नहीं है. अगर आप जरूरत से ज्यादा खा रहे हैं और कैलोरी यानी वजन बढ़ता जा रहा है तो ये भी डायबिटीज होने की वजह बन सकता है. परिवार में किसी को डायबिटीज हो तो जेनेटिक कारणों से भी डायबिटीज हो सकती है.

शुगर फ्री– 
यानी बिना चीनी वाले मीठे में सबसे पहले आर्टिफिशियल स्वीटनर का नाम आता है. डायबिटीज के मरीज इसका इस्तेमाल करते हैं. हालांकि इनके सीमित इस्तेमाल की ही सलाह दी जाती है. ज्यादा प्रयोग करने से कई लोगों का शुगर लेवल बढ़ जाता है. इसे लेने किए कोई भी एक आदर्श या सामान्य खुराक तय नहीं है, जो कि सभी के लिए सही हो. ज्यादा इस्तेमाल से किडनी पर बुरा असर पड़ सकता है. 

गुड़-
गुड़ को चीनी से बेहतर विकल्प माना जाता है. विशेष रूप से सर्दियों में गुड़ के प्रयोग से शरीर में गर्मी बनी रहती है. हालांकि गुड़ भी चीनी की तरह ही गन्ने से ही बनता है. लेकिन डायबिटीज के मरीजों को गुड़ के प्रयोग से बचना चाहिए. गुड़ उन लोगों के लिए चीनी से बेहतर है, जिन्हें डायबिटीज नहीं है. गुड़ एक Cleanser भी माना जाता है. गुड़ खून की शुद्दि करने का काम करता है और लिवर से टॉक्सिन निकालने में भी मदद करता है. इसके अलावा थोड़ी मात्रा में खजूर भी खा सकते हैं. लेकिन एक या दो से ज्यादा नहीं. खजूर मौसम के अनुसार यानी भारत जैसे गर्म देश में सर्दियों में ही खाना चाहिए. 

शहद-
शहद मीठे का सबसे प्राकृतिक विकल्प है. लेकिन बाजार में मिलने वाले ज्यादातर शहद में चीनी की मिलावट होती है. इसके प्रयोग से बचना चाहिए. डायबिटीज के मरीज सीमित मात्रा में शहद ले सकते हैं. शहद का ग्लाइसिमिक इंडेक्स चीनी और शक्कर या गुड़ के मुकाबले कम होता है. कम ग्लाइसिमिक इंडेक्स वाला भोजन ही डायबिटीज वाले मरीजों के लिए अच्छा माना जाता है.  

चीनी से ज्यादा दूसरी चीजों की परवाह करें-
चीनी मीठे का सबसे कृत्रिम और रिफाइंड विकल्प होता है. गन्ने से चीनी बनाने की प्रक्रिया में उसे इतना प्रोसेस किया जाता है कि उसे पचाना शरीर के लिए मुश्किल हो जाता है. डायबिटीज के मरीज को चीनी छोड़ने की सलाह देने वाले तो कई लोग होते हैं. लेकिन ज्यादा कार्बोहाइड्रेट वाले ऐसे दूसरे कई खाद्य पदार्थ हैं जो ब्लड शुगर बढ़ा सकते हैं. जैसे जूस, कार्बोनेड ड्रिंक्स, चावल, ब्रेड और पिज्जा जैसी मैदा से बनी चीजें, टमाटर की सॉस. इनके इस्तेमाल से बचना चाहिए. जूस की जगह फलों का सेवन कम नुकसान करता है. फल और सब्जियों में कॉम्पलेक्स कार्बोहाइड्रेट होता है. जो सीधे शुगर लेवल नहीं बढ़ाता. डायबिटीज के मरीज जो भी खाएं वो सीमित मात्रा में ही खाएं. चाहे वो फल हो या गेहूं के आटे से बनी रोटी. रोटी भी शुगर बढ़ा सकती है.

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