ZEE जानकारी: चीन कैसे आपकी जिंदगी और दिलो-दिमाग पर कर रहा है हमला

चीन आपकी जिंदगी और आपको दिलो-दिमाग पर ये आक्रमण Internet की मदद से कर रहा है. आप सिर्फ चीन में निर्मित Mobile Applications का इस्तेमाल नहीं कर रहे बल्कि जाने-अनजाने में चीन की कंपनियों और वहां की सरकार को अपनी सभी निजी जानकारियां सौंप रहे हैं. चीन के ज्यादातर Mobile Phone Apps दूसरे Apps के मुकाबले उपभोक्ताओं से 45 प्रतिशत ज्यादा Permission मांगते हैं.

ZEE जानकारी: चीन कैसे आपकी जिंदगी और दिलो-दिमाग पर कर रहा है हमला
पिछले कई दशकों में चीन अपनी आर्थिक और सैन्य शक्ति को बढ़ाकर Global Power बन गया है.

चीन आपकी जिंदगी और आपको दिलो-दिमाग पर ये आक्रमण Internet की मदद से कर रहा है. आप सिर्फ चीन में निर्मित Mobile Applications का इस्तेमाल नहीं कर रहे बल्कि जाने-अनजाने में चीन की कंपनियों और वहां की सरकार को अपनी सभी निजी जानकारियां सौंप रहे हैं. चीन के ज्यादातर Mobile Phone Apps दूसरे Apps के मुकाबले उपभोक्ताओं से 45 प्रतिशत ज्यादा Permission मांगते हैं.

इनमें Tiktok, UC Browser, Helo और Share- It जैसे Apps शामिल हैं . कई मामलों में तो ये Apps आपके Smart Phone के कैमरा और माइक्रोफोन के इस्तेमाल की भी इजाजत मांगते हैं . जबकि इनकी कोई ज़रूरत नहीं होती . यानी ज़रूरत पड़ने पर इन Applications की मदद से आपकी निजी बातचीत सुनी जा सकती है और आपके आसपास की तस्वीरें और Videos भी Record किए जा सकते हैं और ये सब बिना आपकी इजाजत के संभव है.

चीन के कानून के मुताबिक, सभी कंपनियों को वहां की सरकार के साथ Data Share करना होता है . यानी आपका Private Data चीन की सरकार के हाथ भी लग सकता है और जैसा कि हम DNA में आपको कई बार बता चुके हैं कि आने वाले ज़माने में वही देश-दुनिया का सबसे शक्तिशाली देश बन पाएगा जिसके पास सबसे ज्यादा DATA होगा. अब युद्ध जीतने के लिए परमाणु बम या मिसाइलों की ज़रूरत नहीं है बल्कि सिर्फ आपके DATA का इस्तेमाल करके भी किसी देश को घुटने टेकने पर मजबूर किया जा सकता है. चीन के ये डिजिटल विस्तारवादी नीति भारत जैसे देशों के लिए सिर्फ सुरक्षा के नज़रिए से ही खतरा नहीं है . बल्कि इससे स्थानीय व्यापारियों और उद्यमियों को भी नुकसान हो रहा है . इस नुकसान को समझने के लिए हमने एक विश्लेषण तैयार किया है. ये विश्लेषण देखने के बाद आप समझ जाएंगे कि कैसे चीन बिना युद्ध लड़े, पूरे भारत पर विजय प्राप्त करने के सपने देख रहा है और उसका ये सपना काफी हद तक साकार भी हो चुका है.

पिछले कई दशकों में चीन अपनी आर्थिक और सैन्य शक्ति को बढ़ाकर Global Power बन गया है. वर्ष 2030 तक अमेरिका को पीछे छोड़कर चीन दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा लेकिन इस दौरान वो अपनी Soft Power का इस्तेमाल करने में पीछे रह गया था. Soft Power यानी किसी भी देश की वो क्षमता जिससे बिना ताकत या धमकी का इस्तेमाल किए ही. दूसरे देशों की सोच को बदल दिया जाए. और उन्हें अपने पक्ष में कर लिया जाए. अमेरिका के राजनीतिक विचारक Joseph Nye (जोसेफ न्ये) ने Soft Power के फॉर्मूले को वर्ष 1990 में लोकप्रिय बनाया था. आज के जमाने में Mobile Apps और Data चीन की Soft Power वाली शक्ति को बढ़ा रहे हैं लेकिन वर्षों पहले ये काम फिल्मों की मदद से होता था और अमेरिका इस पॉलिसी का ग्लोबल लीडर है.

Hollywood की फिल्में अमेरिका की संस्कृति और आदर्शों का प्रचार पूरी दुनिया में करती हैं. इन फिल्मों को देखकर शायद आप भी अमेरिका की ताकत और वहां इस्तेमाल की जानेवाली तकनीक के प्रशंसक बन गए होंगे. Alien यानी दूसरे ग्रह से आए जीव Hollywood का एक Favourite विषय है. इन फिल्मों में भी कहानी का केंद्र अमेरिका ही होता है. आपने देखा होगा कि Aliens अमेरिका पर हमला करते हैं और फिर फिल्म का हीरो और अमेरिका की सेना मिलकर इन्हें पराजित कर देते हैं. अपनी सैन्य शक्ति दिखाने के लिए अमेरिकी सरकार. सेना के नए हथियार और युद्धपोत को इन फिल्मों की शूटिंग में इस्तेमाल करने की इजाजत देती है.

पृथ्वी के खिलाफ अगर कोई भी साजिश होती है तो अमेरिका के Superman, Spider-Man और Iron Man जैसे सुपरहीरो उसका मुकाबला करते हैं. कई बार ऐसी फिल्मों में अमेरिका के बड़े स्मारक जैसे White House पर भी हमला होता है. लेकिन हमारी Bollywood की फिल्मों की तरह इन फिल्मों का अंत भी अक्सर सुखद होता है. इन फिल्मों की कहानी में अमेरिका का मतलब होता है ऐसी महाशक्ति जो किसी को भी पराजित कर सकती है.

Hollywood की फिल्में भी अमेरिकी सरकार की विदेश नीति को आगे बढ़ाने का काम करती हैं. इन Movies में आप अमेरिका के सैनिकों को उनके कूटनीतिक दुश्मन... जैसे रूस और चीन के साथ लड़ते देखेंगे . जब अमेरिका के सैनिक वियतनाम में लड़ते हैं तो उनका गुणगान करने वाली फिल्में बनाई गईं और यदि अफगानिस्तान में रूस की घुसपैठ के खिलाफ अमेरिका मदद करता है तो Hollywood फिल्मों की स्क्रिप्ट रूस को. दुनिया की शांति का दुश्मन बनाकर दिखाती हैं.

इन फिल्मों में एक समानता आपको अधिकतर दिखाई देगी. इनमें अमेरिका की सेना सर्वशक्तिमान होती है. अमेरिका की स्पेशल फोर्स किसी भी देश में दाखिल होकर आतंकवादियों का मुकाबला कर सकती है. अमेरिका के सबसे बड़े दुश्मन ओसामा बिन लादेन के लिए लॉन्च किए गए मिलिट्री ऑपरेशन पर भी एक फिल्म बनी थी . और उसकी सच्ची कहानी को दिखाने के लिए अमेरिका की खुफिया एजेंसी ने भी फिल्म बनाने में मदद की थी . यानी ये फिल्में एक तरह से अमेरिका की राजनीति और विदेश नीति को आम लोगों तक पहुंचाने और उनके पक्ष में माहौल बनाने का काम भी करती हैं.

तकनीक के मामले में अमेरिका दुनिया में सबसे आगे है और इसकी तारीफ फिल्मों में भी होती है. Hollywood की फिल्म का हीरो कुछ ही वक्त में मंगल ग्रह पर पहुंच जाता है. और वहां ऐसे ऐसे काम करता है जिसे पूरा करना अमेरिका के असली वैज्ञानिकों के लिए भी सपने जैसा है. इन फिल्मों में अगर धरती इंसानों के रहने लायक नहीं रह गई है... तो पूरे सौरमंडल का चक्कर लगाकर किसी और ग्रह की तलाश की जाती है. इन फिल्मों को आप अमेरिका की छवि मजबूत करने का एक माध्यम कह सकते हैं. यही वजह है कि अमेरिका की सरकार इन्हें मदद भी देती है. 

अमेरिका के रक्षा मंत्रालय में वर्ष 1948 से ही Hollywood के साथ सहयोग करने के लिए एक डिपार्टमेंट मौजूद है. वर्ष 1911 से 2017 के बीच अमेरिका के रक्षा मंत्रालय ने 800 से ज्यादा फिल्मों... और वर्ष 2005 से अबतक 11 सौ से ज्यादा टीवी Shows को मदद दी है. वर्ष 2015 से 2018 के बीच 43 फिल्मों को 8 हजार 6 सौ करोड़ रुपए की टैक्स छूट दी गई है.

दुनिया के लगभग सभी देशों में ये फिल्में और टीवी Shows देखे जाते हैं. इनमें वो देश भी शामिल हैं जिनके अमेरिका के साथ अच्छे संबंध नहीं हैं. लेकिन वहां भी लोग इसे देखकर खुश होते हैं और अमेरिका की जीत पर तालियां बजाते हैं. इन फिल्मों को देखकर ही दुनिया के कई देशों के युवा अमेरिका को सपने पूरे करने वाला देश मानते हैं. चीन में दुनिया का सबसे तेजी से बढ़ने वाला फिल्मों का बाजार है और Hollywood के फॉर्मूले का इस्तेमाल करके चीन भी अपना प्रभाव बढ़ाना चाहता है . पिछले कुछ वर्षों में चीन ने ऐसी फिल्मों का निर्माण किया जिसमें उसके सैनिक दुनिया को बचाने का मिशन लॉन्च करते हैं. ऐसा करके चीन अपनी छवि बदलना चाहता है ताकि उसे भी अमेरिका की तरह दुनिया में सुपरपावर समझा जाए. चीन की सरकार अपने 138 करोड़ लोगों को विदेशी फिल्मों के प्रभाव से भी बचाकर रखना चाहती है... इसलिए चीन में हर वर्ष सिर्फ 34 विदेशी फिल्में ही रिलीज की जाती हैं.

लेकिन हमारे देश में रिलीज होने वाली विदेशी फिल्मों पर रोक का कोई नियम नहीं है. यही वजह है कि कई बार Hollywood की फिल्में देश में बनी फिल्मों से ज्यादा कारोबार करती हैं. इसी वर्ष की शुरुआत में फिल्म Avengers: Endgame ने भारत में 373 करोड़ रुपए का बिजनेस किया जबकि इस समय रिलीज हुई भारतीय फिल्में इससे 100 करोड़ पीछे रहीं.