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ZEE Jankari: पश्‍च‍िम बंगाल में बीजेपी क्‍यों लगा रही है इतना जोर!

आख़िरी चरण में पूरे देश की चर्चाओं का फोकस सिर्फ़ पश्चिम बंगाल पर है. पश्चिम बंगाल में 9 सीटों पर मतदान होना है. और वहां का चुनाव प्रचार आज रात 10 बजे, यानी अब से कुछ मिनटों के बाद ही समाप्त हो जाएगा.

ZEE Jankari: पश्‍च‍िम बंगाल में बीजेपी क्‍यों लगा रही है इतना जोर!

पूरा भारत ये जानने के लिये बेचैन है कि 23 मई को क्या होगा. लेकिन उससे पहले नेताओं का एक बड़ा इम्तिहान बाक़ी है. 19 मई को लोकसभा चुनाव का आख़िरी चरण है  और उस दिन देश की 59 सीटों पर वोट डाले जाएंगे. लेकिन आख़िरी चरण में पूरे देश की चर्चाओं का फोकस सिर्फ़ पश्चिम बंगाल पर है. पश्चिम बंगाल में 9 सीटों पर मतदान होना है. और वहां का चुनाव प्रचार आज रात 10 बजे, यानी अब से कुछ मिनटों के बाद ही समाप्त हो जाएगा.

7वें चरण का चुनाव प्रचार 17 मई को शाम 5 बजे ख़त्म होना है...लेकिन चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल के खाते से 19 घंटे काट लिये थे. कोलकाता में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के रोड शो में हिंसा के बाद चुनाव आयोग ने आदेश दिया था कि पश्चिम बंगाल के लिये चुनाव प्रचार का वक़्त आज रात दस बजे तक ही रहेगा.

आख़िरी दिन का प्रचार किसी भी चुनाव में बहुत मायने रखता है. राजनीतिक रूप से सक्रिय पश्चिम बंगाल जैसे राज्य में तो इसकी अहमियत और भी ज़्यादा है. चुनाव आयोग चाहता तो कल ही प्रचार पर पाबंदी लगा सकता था, लेकिन उसने पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार के लिये आज रात 10 बजे तक का discount दे दिया. अब ये तमाम राजनीतिक दलों पर निर्भर था कि वो चुनाव आयोग की तरफ़ से मिली इस छूट के एक एक मिनट का फायदा कैसे उठाएं.

गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल में दो रैलियां कीं. उन्होंने पहले मथुरापुर में और फिर दमदम में रैली की. बुधवार को ही प्रधानमंत्री मोदी ने ममता बनर्जी को चुनौती दी थी और कहा था कि देखते हैं कि ममता बनर्जी उनकी रैली होने देती हैं या नहीं? आज पश्चिम बंगाल से पहले उत्तर प्रदेश में प्रधानमंत्री की तीन रैलियां थीं. मऊ और चंदौली के अलावा प्रधानमंत्री ने मिर्ज़ापुर में भी रैली की.

आज प्रधानमंत्री मोदी ने ज़ी न्यूज़ को दो इंटरव्यू दिए हैं, एक मिर्ज़ापुर में और दूसरा कोलकाता में. आज कोलकाता में प्रधानमंत्री मोदी ने ज़ी मीडिया के बांग्ला चैनल ज़ी 24 घंटा के साथ हुए संवाद में क्या कहा ये आपको सुनना चाहिए. दूसरी तरफ ममता बनर्जी के तेवर भी तीखे हैं. कल उन्होंने कहा था कि चुनाव आयोग प्रधानमंत्री और बीजेपी अध्यक्ष के इशारे पर काम कर रहा है. ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह के लिये कई ऐसे शब्दों का भी इस्तेमाल किया जिनका ज़िक्र करना अशोभनीय होगा...इसलिये हम उन शब्दों का ज़िक्र नहीं करेंगे.

वैसे ममता बनर्जी ने बीजेपी के साथ front foot पर खेलने का फ़ैसला किया है. आज ममता बनर्जी ने 25 किलोमीटर लंबा पैदल मार्च किया. ममता बनर्जी की उम्र 64 वर्ष है, और वो अपनी आदत के मुताबिक़ तेज़ चल रही थीं. तेज़ चलने का चाहे कोई राजनीतिक फायदा हो या ना हो, लेकिन इससे स्वास्थ्य में सुधार होता है. एक स्टडी के मुताबिक़ तेज़ चलने की आदत से आयु बढ़ती है, यानी जीवनकाल लंबा हो जाता है. इसीलिये डॉक्टर मॉर्निंग वॉक की सलाह देते हैं. जो तेज़ चलता है, वो फिट रहता है और उसे हृदय रोग होने का ख़तरा भी कम हो जाता है. हालांकि अगर लोकतंत्र का हृदय होता..उसकी भी धड़कने होतीं...तो हम कह सकते हैं कि पश्चिम बंगाल के मौजूदा हालात...उसके लिये heart attack से कम नहीं होते.

आज बीजेपी का एक प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग से मिला है. बीजेपी ने ममता बनर्जी की सरकार पर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है. लेकिन ममता बनर्जी के तेवरों में कोई बदलाव नहीं आया है. आज ममता बनर्जी ने BJP और RSS को उग्रवादी कहकर, दंगे करवाने का आरोप लगाया है.

पिछले दो दिनों से ऐसा लग रहा है जैसे लोकसभा चुनाव सिर्फ़ पश्चिम बंगाल में हो रहा है. तृणमूल कांग्रेस और बीजेपी के बीच जिस तरह से टकराव हुआ है...अब पूरे चुनाव का फोकस सिर्फ़ उसी पर है. पश्चिम बंगाल में आख़िरी चरण में 9 सीटों पर मतदान होगा...ये सीटे हैं...दमदम, बारासात, बसीरहाट, जयनगर, मथुरापुर, डायमंड हार्बर, जाधवपुर, कोलकाता साउथ और कोलकाता नॉर्थ. वर्ष 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में इन सभी सीटों पर तृणमूल कांग्रेस जीती थी. लेकिन बीजेपी इनमें 2 सीटों पर दूसरे नंबर पर रही थी. ये दो सीटें हैं - कोलकाता नॉर्थ और कोलकाता साउथ...

इन दो सीटों को लेकर ख़ुद ममता बनर्जी का आत्मविश्वास भी हिला हुआ है. बीजेपी इस बार पश्चिम बंगाल में अपनी महत्वकांक्षा को नयी ऊंचाइयों पर ले गई है और 42 लोकसभा सीटों में से 23 सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है. 2014 में बीजेपी ने कोलकाता साउथ सीट पर तृणमूल कांग्रेस को कड़ी टक्कर दी थी.

तब यहां TMC को 37 प्रतिशत वोट मिले थे...उसका वोट 20 प्रतिशत गिरा था जबकि बीजेपी का वोट 21 प्रतिशत बढ़कर 25 प्रतिशत तक पहुंच गया था. इसके अलावा तब कोलकाता नॉर्थ लोकसभा सीट पर भी तृणमूल कांग्रेस का वोट शेयर घटकर 36 प्रतिशत पर आ गया था, जबकि बीजेपी को क़रीब 26 प्रतिशत वोट मिले थे.

बीजेपी की सफलता का राज़ लेफ्ट पार्टियों की नाकामी में छुपा हुआ है. 2011 में यहां तृणमूल कांग्रेस ने सरकार बनाई थी. इसके बाद लेफ्ट का ग्राफ़ तो गिरा...लेकिन बीजेपी का वोट शेयर बढ़ता गया. बीजेपी जानती है कि एक हल्का सा धक्का...तृणमूल कांग्रेस के क़िले को ध्वस्त कर सकता है. दूसरी तरफ 23 मई के नतीजों से पहले कांग्रेस का आत्मविश्वास भी हिला हुआ है. आज कांग्रेस ने कहा है कि ये ज़रूरी नहीं है कि राहुल गांधी ही प्रधानमंत्री बनेंगे. इस बयान पर चुटकी लेते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम बंगाल के दमदम में कहा कि विपक्ष के पास अब प्रधानमंत्री के पद के लिये कोई दावेदार नहीं है. सब पीछे हट गए हैं.