भारत के इस गांव में पांच दिन निर्वस्त्र रहती हैं शादीशुदा महिलाएं, जानें हैरान कर देनी वाली वजह

हमारे देश में एक ऐसी परंपरा (Tradition) है जिसे सुनकर आप हैरान रह जाएंगे. हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) के पीणी गांव (Pidi Village) में पांच दिन तक शादीशुदा महिलाएं (Married Womens) निर्वस्त्र (Without Clothes) रहती हैं. इसके पीछे की वजह आइये आपको बताते हैं. 

ज़ी न्यूज़ डेस्क | Dec 01, 2020, 01:19 AM IST

नई दिल्ली. दुनियाभर में कई ऐसी परंपराएं (Traditions) और रीति-रिवाज हैं जिनके बारे में जानकर आज भी हर कोई हैरान रह जाता है. सदियां बीत जाने के बावजूद भी इन अजीबोगरीब परंपराओं को निभाया जा रहा है. आज हम आपको भारत की एक ऐसी ही परंपरा के बारे में बताएंगे. इस परंपरा के अनुसार शादीशुदा महिलाएं (Marrried Women) पांच दिन तक कपड़े नहीं पहनती हैं. आइये जानते हैं कहां और क्यों मनाई जाती है यह परंपरा.

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पांच दिन बिना कपड़ों के रहती हैं महिलाएं

Women Stay Without Clothes For Five Days

यह अजीबोगरीब परंपरा हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) के पीणी गांव (Pini Village) में निभाई जाती है. हर साल सावन के महीने में इस गांव की महिलाएं पूरे पांच दिन तक कपड़े नहीं पहनती हैं और पुरुषों से दूर रहती हैं. 

 

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परंपरा न मानने पर होता है अमंगल

Disregard For Tradition

मान्यता के मुताबिक अगर सावन में कोई शादीशुदा महिला पांच दिन तक निर्वस्त्र नहीं रहती है तो उसके और उसके परिवार के साथ अमंगल होता है. इस परंपरा को गांव के हर घर में निभाया जाता है.

 

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परंपरा के पीछे है यह पौराणिक कथा

 Mythology

पौराणिक कथा के अनुसार, सदियों पहले एक राक्षस इस गांव की सुंदर कपड़े पहनने वाली स्त्रियों को उठाकर ले जाया करता था. जिसकी वजह से धीरे-धीरे गांव से स्त्रियां कम होने लगीं. उसके बाद देवताओं ने उस राक्षस का वध किया. आज भी ऐसी मान्यता है कि लाहुआ देवता हर साल सावन में गांव में आते हैं और बुराइयों का विनाश करते हैं. 

 

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इन पांच दिनों में हंसना भी है मना

Laughing Is Also Forbidden In These Five Days

सावन के इन पांच दिनों में गांव में कोई भी शराब, मांस का सेवन नहीं करता है. साथ ही किसी तरह का कोई कार्यक्रम जैसे- शादी, जन्मदिन आदि भी नहीं होता है. इन पांच दिनों में गांव में कोई हंसता भी नहीं है. इन पांच दिनों में स्त्रियां अपने को घर में बंद कर लेती हैं. हालांकि समय के साथ-साथ अब इस परंपरा पर स्त्रियां पतले कपड़े पहनने लगी हैं.