रानी गाइदिन्ल्यू (Rani Gaidinliu) का जन्म 26 जनवरी 1915 को मणिपुर (Manipur) में हुआ था. नागा नेता रानी गाइदिनल्यू को सबसे प्रतिष्ठित स्वतंत्रता सेनानियों में से एक माना जाता है. वे 13 साल की छोटी उम्र से ही आंदोलन में सक्रिय हो गई थीं और 1932 में उन्हें 16 साल की उम्र में ही गिरफ्तार कर लिया गया था. 1946 में लगभग 14 साल जेल में बिताने के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया था. इसके बाद वे अपने चचेरे भाई Haipou Jadonang के साथ हेराका आंदोलन में शामिल हो गईं थीं.
सावित्रीबाई फुले (Savitribai Phule) का जन्म 3 जनवरी 1831 को हुआ था. उन्हें भारत की पहली नारीवादियों (Indian Feminists) में से एक के रूप में जाना जाता है. उन्होंने बाल विवाह (Child Marriage) के खिलाफ अपनी आवाज मुखर की थी. सावित्रीबाई ने अपने पति ज्योतिराव फुले के साथ मिलकर पुणे स्थित भिड़े वाड़ा में 1848 में पहले महिला स्कूल (Women School) की स्थापना की थी. इसके लिए उन्हें लोगों की काफी आलोचना का सामना करना पड़ा था. बाल विवाह के कारण पुणे में कई महिलाएं छोटी उम्र में ही विधवा हो जाती थीं, जिसके बाद समाज द्वारा उन्हें बेदखल कर दिया जाता था. ऐसे में सावित्रीबाई और उनके पति ने इन महिलाओं के लिए विधवाघर बनाया था.
ऊदा देवी (Uda Devi) का जन्म अवध में हुआ था. वे 1857 में भारतीय विद्रोह में एक योद्धा थीं और उन्होंने ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी (British East India Company) के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी. ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के खिलाफ स्वतंत्रता की लड़ाई में दलित प्रतिरोध सेनानी भी शामिल हुए थे. इन्हीं में से एक ऊदा देवी थीं. उन्हें और अन्य महिला दलित प्रतिभागियों को आज भी 1857 के भारतीय विद्रोह के योद्धाओं या 'दलित वीरांगनाओं' के रूप में याद किया जाता है.
झलकारी बाई (Jhalkari Bai) का जन्म 22 नवंबर 1830 को हुआ था. वे झांसी की रानी लक्ष्मी बाई की परछाई के रूप में जानी जाती हैं. उनका धैर्य और साहस, महिलाओं और पुरुषों, दोनों के लिए प्रेरणा का स्त्रोत है. झलकारी बाई का जन्म एक दलित परिवार में हुआ था. अंग्रेजों के साथ झांसी की लड़ाई में झलकारी बाई ने अहम भूमिका निभाई थी क्योंकि अंग्रेजों को धोखा देने के लिए वे खुद रानी लक्ष्मी बाई बनकर लड़ी थीं और सेना की कमान संभाली थी. इस तरह से उन्होंने रानी लक्ष्मी बाई को भागने का मौका दिया था.
सरोजिनी नायडू (Sarojini Naidu) का जन्म 13 फरवरी 1879 को हैदराबाद में हुआ था. वे भारत की स्वतंत्रता कार्यकर्ता, कवयित्री, राजनीतिज्ञ और विचारक थीं. एक कवयित्री के तौर पर उन्होंने कई उपलब्धियां हासिल की थीं. उनकी मधुर आवाज की वजह से उन्हें 'द नाइटिंगेल ऑफ इंडिया' (The Nightingale of India) भी कहा जाता है. सरोजिनी नायडू के नाटक 'माहेर मुनीर' को बहुत पसंद किया गया था. इसके लिए उन्हें विदेश में पढ़ने के लिए छात्रवृत्ति (Scholarship) भी मिली थी. वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (Indian National Congress) की दूसरी महिला अध्यक्ष थीं. भारत को स्वतंत्रता (Freedom) हासिल होने के बाद वे स्वतंत्र भारत की पहली महिला राज्यपाल (First Female Governor) थीं.
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