Mucormycosis: जानें शरीर पर किस तरह से हमला करता है ब्लैक फंगस, सरकार ने बताए लक्षण और बचने के उपाय

कोरोना संक्रमण के बीच एक और डराने वाली बीमारी सामने आयी है जिसे ब्लैक फंगस कहा जा रहा है. यह बीमारी मरीज की स्किन, लंग्स के साथ ही ब्रेन पर भी असर डाल रही है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बीमारी से बचने के तरीकों के बारे में बताया है.

ज़ी न्यूज़ डेस्क | May 15, 2021, 12:53 PM IST

नई दिल्ली: देश इस वक्त कोरोना वायरस की दूसरी लहर की चपेट में है और पिछले सप्ताह की तुलना में इस सप्ताह भले ही संक्रमण के मामलों में कुछ कमी आयी हो लेकिन अब भी खतरा टला नहीं है. लिहाजा सावधानी और सतर्कता बेहद जरूरी है. कोरोना महामारी के बीच एक और बीमारी ने लोगों को बुरी तरह से डरा दिया है और उसका नाम है ब्लैक फंगस. इस बीमारी को मेडिकल टर्म में म्यूकोरमायकोसिस कहते हैं और यह बीमारी कोरोना से रिकवर होने के बाद मरीजों में ज्यादा देखने को मिल रही है.

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ब्लैक फंगस के लक्षणों की पहचान है जरूरी

black fungus

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने ट्वीट करके ब्लैक फंगस के बारे में जानकारी दी और बताया कि आखिर ये बीमारी क्या है, किन लोगों को इस बीमारी का खतरा ज्यादा है, ब्लैक फंगस के लक्षण क्या हैं और बीमारी से बचने के लिए क्या करना चाहिए और क्या नहीं. स्वास्थ्य मंत्री की मानें तो अगर लोगों में इस बीमारी को लेकर जागरूकता हो और शुरुआत में ही लक्षणों की पहचान कर ली जाए तो बीमारी को जानलेवा होने से रोका जा सकता है.

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आखिर क्या है म्यूकोरमायकोसिस या ब्लैक फंगस?

what is black fungus

ब्लैक फंगस एक ऐसा फंगल इंफेक्शन है जो कोरोना वायरस की वजह से शरीर में ट्रिगर होता है. इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च (ICMR) की मानें तो ब्लैक फंगस एक दुर्लभ बीमारी है जो शरीर में बहुत तेजी से फैलती है और यह उन लोगों में ज्यादा देखने को मिल रहा है जो कोरोना वायरस से संक्रमित होने से पहले किसी दूसरी बीमारी से ग्रस्त थे या फिर जिन लोगों की इम्यूनिटी बेहद कमजोर है.


pic credit: @drharshvardhan twitter

 

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किन लोगों को इस बीमारी का खतरा ज्यादा है?

who is more at risk?

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने अपने ट्वीट के जरिए बताया कि आखिर किन लोगों को ब्लैक फंगस होने का खतरा ज्यादा है. हर्षवर्धन की मानें तो, जिन लोगों को डायबिटीज की बीमारी है और जिनका ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल में नहीं रहता, जो लोग स्टेरॉयड लेते हैं जिसकी वजह से उनकी इम्यूनिटी कमजोर हो जाती है, वैसे लोग जो कोरोना वायरस संक्रमण की वजह से लंबे समय तक आईसीयू या अस्पताल में भर्ती रहते हैं, वैसे लोग जिनका अंग प्रत्यारोपण हुआ हो या फिर जिन्हें कोई और गंभीर फंगल इंफेक्शन हुआ हो- ऐसे लोगों में ब्लैक फंगस होने का खतरा अधिक होता है.


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ब्लैक फंगस के लक्षणों पर दें ध्यान

symptoms to watch for

ब्लैक फंगस के लक्षणों पर अगर समय रहते ध्यान दिया जाए तो मरीज की जान बचायी जा सकती है:

-आंखों में या आंखों के आसपास लालिपन आना या दर्द महसूस होना

-बार-बार बुखार आना

-सिर में तेज दर्द होना

-खांसी और सांस लेने में तकलीफ महसूस होना

-खून की उल्टियां आना

-मानसिक स्थिति में बदलाव महसूस होना


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ब्लैक फंगस से बचने के लिए क्या करें, क्या नहीं

dos and donts

क्या करें

बेहद जरूरी है कि मरीज हाइपरग्लाइसीमिया से बचे यानी अपने ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल में रखे. कोविड-19 से ठीक होने के बाद और अस्पताल से डिस्चार्ज होकर घर आने के बाद भी लगातार ग्लूकोमीटर की मदद से अपने ब्लड ग्लूकोज लेवल को मॉनिटर करना जरूरी है. स्टेरॉयड का बहुत अधिक इस्तेमाल न करें और सही डोज और समय अंतराल का पता होना चाहिए. साथ ही एंटीबायोटिक्स और एंटी फंगल दवा का भी उचित इस्तेमाल करें. ऑक्सीजन थेरेपी के दौरान ह्यूमीडिफायर के लिए साफ और कीटाणुरहित पानी का इस्तेमाल करें. 

 

क्या न करें

बीमारी के संकेत और लक्षणों को नजरअंदाज न करें. नाक बंद होने की समस्या को हर बार साइनस समझने की भूल न करें, खासकर वे लोग जो कोविड-19 के मरीज हैं. अगर जरा सा भी संदेह महसूस हो रहा हो तो पूरी तरह से जांच करवाएं. म्यूकोरमायकोसिस या ब्लैक फंगस के इलाज में देरी की वजह से ही मरीज की जान जाती है. शुरुआत में लक्षणों का पता करके समय पर इलाज होना बेहद जरूरी है.


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आंख, नाक और जबड़े को भी प्रभावित करता है यह फंगस

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आपको बता दें कि ब्लैक फंगस कोविड संक्रमण से रिकवर हो चुके मरीजों की न सिर्फ आंखों की रोशनी छीन रहा है, बल्कि यह फंगस त्वचा, नाक और दांतों के साथ ही जबड़े को भी नुकसान पहुंचाता है. नाक के रास्ते यह फेफड़ों और मस्तिष्क में पहुंचकर मरीज की जान ले लेता है. यह इतनी गंभीर बीमारी है कि मरीज को सीधे आईसीयू में भर्ती करना पड़ता है. लिहाजा समय रहते लक्षणों का पता लगाना बेहद जरूरी है.

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