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लोकसभा चुनाव 2019: 2009 में अस्तित्व में आई गाजियाबाद सीट दो बार से रहा है BJP का कब्जा

2014 के इस रण में  बीजेपी के जनरल वीके सिंह और कांग्रेस के राज बब्बर के बीच कांटे की टक्कर में वीके सिंह ने जीत की पताका लहराया. 

लोकसभा चुनाव 2019: 2009 में अस्तित्व में आई गाजियाबाद सीट दो बार से रहा है BJP का कब्जा
2009 में हुए परिसीमन के गाजियाबाद सीट अस्तित्व में आई.

नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव 2019 की तैयारियां राजनीतिक पार्टियों ने शुरू कर दी है. उत्तर प्रदेश की 80 सीटों के लिए राजनीतिक पार्टियों ने जोड़-गणित शुरू कर दिया है. देश की राजधानी दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश के जिले गाजियाबाद लोकसभा सीट हॉट सीट मानी जाती है. गाजियाबाद लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र के अंतर्गत पांच विधानसभा क्षेत्र गाजियाबाद साहिबाबाद, लोनी, मुरादनगर और धौलाना आते हैं. 2009 लोकसभा चुनाव से पहले ये सीट हापुड़ लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत थी. साल 2009 में हुए परिसीमन के बाद हापुड़ लोकसभा सीट को समाप्त कर दिया गया.

ऐसे मिला शहर को नाम
गाजियाबाद का इतिहास 2500 ईसा पूर्व का है. इसे मोहम्मद शाह के मंत्री वजीर गाजी-उद-दीन ने स्थापित किया था. इनके नाम से इस शहर का नाम 'गाजियाबाद' मिला. 1857 विद्रोह के दौरान ब्रिटिश सेना और भारतीय विद्रोहियों के बीच भिडंत यहीं हुई थी, वैसे 'यूपी का डोर' कहे जाने वाले गाजियाबाद 133.3 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है. 

क्या है राजनीतिक इतिहास
गाजियाबाद में पहली बार साल 2009 में चुनाव हुए थे. साल 2009 में पहली बार कांग्रेस के सुरेंद्र प्रकाश गोयल और भारतीय जनता पार्टी के राजनाथ सिंह के बीच टक्कर हुई. कड़ी टक्कर में राजनाथ सिंह ने कांग्रेस को पटखनी दी और गाजियाबाद से एमपी बने. दूसरी बार यानि साल 2014 के लोकसभा चुनाव में गाजियाबाद की हाईप्रोफाइल सीट से फिर कांटे की टक्कर हुई. बीजेपी ने जहां जनरल वीके सिंह, कांग्रेस ने के राज बब्बर, सपा ने सुधंन रावत, बसपा ने मुकुल उपाध्याय और आम आदमी पार्टी ने शाजिया इल्मी को चुनावी रण में उतारा. 2014 के इस रण में  बीजेपी के जनरल वीके सिंह और कांग्रेस के राज बब्बर के बीच कांटे की टक्कर में वीके सिंह ने जीत की पताका लहराया और जनरल वीके सिंह यहां से सांसद बनें. जनरल वीके सिंह और राजबब्बर के बीच जीत का अंतर 42 प्रतिशत वोटों का था. 

क्या है जातिगत समीकरण
पश्चिमी उत्तर प्रदेश का ये जिला दिल्ली से सटा होने की वजह से बेहद अहम है. सभी प्रमुख पार्टियां इस सीट पर अपना मजबूत दावेदार उतारने की कोशिश करती हैं. इस सीट पर जीत के लिए दलित-मुस्लिम समीकरण का रोल अहम होता है. गाजियाबाद में 72 प्रतिशत आबादी हिंदू और 25 प्रतिशत जनसंख्या मुस्लिम है. साल 2014 के चुनाव आकड़ों के मुताबिक, 23,58,553 वोटरों ने हिस्सा लिया थी. इसमें 56 प्रतिशत पुरुष और 43 प्रतिशत महिलाएं शामिल थीं.