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लोकसभा चुनाव: बुंदेलखंड का भयंकर सूखा नहीं, जाति और कानून-व्यवस्था है झांसी में मुद्दा

झांसी लोकसभा क्षेत्र में करीब 19 लाख वोटर हैं, जिनमें करीब तीन लाख कुशवाहा या अहिरवार हैं, जिसकी वजह यहां इनका वर्चस्व बताया जाता है. यहां मुस्लिमों और ब्राह्मणों की आबादी डेढ़-डेढ़ लाख बताई जाती है. इस सीट पर यादव और लोध वोटरों की संख्या एक लाख बताई जाती है

लोकसभा चुनाव: बुंदेलखंड का भयंकर सूखा नहीं, जाति और कानून-व्यवस्था है झांसी में मुद्दा
बालाकोट हवाई हमला, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और राज्य में कानून के शासन के मुद्दे वोटरों को भाजपा की तरफ आकर्षित कर रहे हैं.

झांसी: बुंदेलखंड क्षेत्र का दुर्भाग्य है कि सात नदियां और 20 बांध होने के बावजूद इस इलाके को पिछले 19 वर्ष में से 13 साल सूखे की मार सहनी पड़ी है. सूखे की वजह से इस इलाके की बड़ी आबादी शहरों की तरफ पलायन करने पर मजबूर हुई है. इस विकराल समस्या के बावजूद बुंदेलखंड क्षेत्र के सबसे बड़े शहरी केंद्र झांसी में पलायन, सिंचाई, जल संकट और सूखे की समस्या जैसे मुद्दे कहीं पीछे छूट गए लगते हैं.

दो ही हैं अहम मुद्दा
झांसी के लोगों को सिर्फ दो ही मुद्दे अहम नजर आ रहे हैं, जिनमें कानून-व्यवस्था और जाति शामिल हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि भाजपा के शासनकाल में झांसी में कानून-व्यवस्था में सुधार हुआ है. एक सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा कि 2012-17 के दौरान समाजवादी पार्टी के शासनकाल के दौरान ओबीसी समुदाय के कुछ लोग जमीन हड़पने और अन्य सामंती गतिविधियों के लिए कुख्यात थे. मौजूदा शासनकाल में स्थिति में काफी सुधार हुआ है, जिससे बसपा के कोर वोटर भाजपा के पाले में चले गए थे.

झांसी लोकसभा क्षेत्र में हैं 19 लाख वोटर
झांसी लोकसभा क्षेत्र में करीब 19 लाख वोटर हैं, जिनमें करीब तीन लाख कुशवाहा या अहिरवार हैं, जिसकी वजह यहां इनका वर्चस्व बताया जाता है. यहां मुस्लिमों और ब्राह्मणों की आबादी डेढ़-डेढ़ लाख बताई जाती है. इस सीट पर यादव और लोध वोटरों की संख्या एक लाख बताई जाती है. इनके अलावा, जैन सहित बनिया समुदाय के लोग भी अच्छी संख्या में हैं.

 

क्या कहते हैं वोटर
स्नातक की पढ़ाई कर रहे नरेश का कहना है, मेडिकल सुविधाओं की कमी और बेरोजगारी जैसी कई समस्याएं हैं, लेकिन शायद ही कोई पार्टी इन पर ध्यान दे रही है. मैं ‘नोटा’ का बटन दबाने की सोच रहा हूं. हालांकि, ऐसा नहीं है कि यहां हर व्यक्ति निराश है. बालाकोट हवाई हमला, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और राज्य में कानून के शासन के मुद्दे वोटरों को भाजपा की तरफ आकर्षित कर रहे हैं.

पार्टियों में रखा जातिगत समीकरणों का खास ख्याल 
सोहन ने बताया, स्थानीय उम्मीदवारों पर कोई ध्यान नहीं दे रहा. वे जातिगत आधार पर समीकरण बिठा रहे होंगे, लेकिन वे क्रॉस वोटिंग नहीं रोक पाएंगे. मेरे दोस्त भाजपा को विकल्प के तौर पर देख रहे हैं. राजनीतिक दलों की ओर से उम्मीदवारों की पसंद में जातिगत समीकरणों का खास ख्याल रखा गया है. कांग्रेस ने कुशवाहा समुदाय के बड़े चेहरे शिव शरण कुशवाहा को टिकट दिया है, जबकि सपा-बसपा-रालोद गठबंधन ने श्याम सुंदर सिंह यादव को अपना उम्मीदवार बनाया है. शिवपाल यादव की अगुवाई वाली प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) ने जगत विक्रम सिंह राजपूत को अपना उम्मीदवार बनाया है, जो लोध समुदाय से आते हैं.

भाजपा ने उद्योगपति को बनाया अपना उम्मीदवार
भाजपा ने उद्योगपति और आयुर्वेदिक दवाओं के जानेमाने ब्रैंड ‘बैद्यनाथ’ के प्रबंध निदेशक अनुराग शर्मा को अपना उम्मीदवार बनाया है. स्थानीय पत्रकार उत्कर्ष सिन्हा ने बताया, यही जमीनी सच्चाई है. मौजूदा चुनावों में झांसी और ललितपुर में जाति बहुत अहम पहलू बन गई है.