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असम की इस लोकसभा सीट से बिरेन सिंह इंग्ती ने लगाई हैट्रिक, लगातार दे रहे हैं चुनौती

2004, 2009 और 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस उम्मीदवार बिरेन सिंह इंग्ती (Biren Singh Engti) ने यहां से चुनाव जीता है.

असम की इस लोकसभा सीट से बिरेन सिंह इंग्ती ने लगाई हैट्रिक, लगातार दे रहे हैं चुनौती
देश के उत्तर-पूर्व में स्थित राज्य असम में लोकसभा की 14 सीटें हैं.

नई दिल्ली: देश में 2019 का लोकसभा चुनाव मई में होने की संभावना है. इस बीच कई राज्यों में राजनीतिक दलों ने अपनी चुनावी तैयारियां शुरू कर दी है. 2014 में देश के उत्तर-पूर्व में स्थित असम में मोदी लहर में असम के 14 में से 7 लोकसभा सीटें जीतने वाली बीजेपी की डगर इस बार के लोकसभा चुनाव के दौरान काफी मुश्किल दिख रही है.

स्वशासी जिला संसदीय क्षेत्र (Autonomous District) का चुनावी इतिहास 

अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित असम के स्वशासी जिला संसदीय क्षेत्र (Autonomous District) से कांग्रेस ने लगातार 3 चुनावों में जीत दर्ज की है. 2004, 2009 और 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस उम्मीदवार बिरेन सिंह इंग्ती (Biren Singh Engti) ने यहां से चुनाव जीता है. 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे इंग्ती ने बीजेपी के जॉय राम इंग्लेंग (Joy Ram Engleng) को 24,121 मतों से मात दी थी. वहीं, 2009 के चुनाव के दौरान कांग्रेस के टिकट पर ही चुनाव लड़ रहे इंग्ती ने स्वायत राज्य मांग दल(Autonomous State Demand Committee) के उम्मीदवार एलवीन तेरन (Elwin Teron) को 76,488 मतों से चुनाव में हराया था.

देश के उत्तर-पूर्व (North-east) में स्थित राज्य असम में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार है. यहां से लोकसभा चुनाव 2014 (loksabha election 2014) के दौरान राज्य की 14 संसदीय सीटों में से बीजेपी ने 7 सीटों पर जीत दर्ज की थी. इसके अलावा कांग्रेस (Congress) के खाते में 3 जबकि आल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट(Aiudf) ने 4 सीटें जीती थी.  

वहीं, 2009 के लोकसभा चुनाव के दौरान यहां से कांग्रेस ने 7, बीजेपी ने 4 जबकि अन्य ने 9 लोकसभा सीटों पर जीत दर्ज की थी. जिसमें, 1 सीट असम गण परिषद (AGP) और 1 सीट बोडोलैंड पीपल्स फ्रंट (BDF) ने जीता था. 

आपको बता दें कि, 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान मोदी लहर के प्रभाव के कारण असम के लोगों ने बीजेपी नीत गठबंधन को 7 सीटें दी थी. लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव के पहले बीजेपी-आसु (Aasu) के बीच चल रहा विवाद, बीजेपी के नेताओं से उनकी नाराजगी का राज्य के चुनाव परिणाम पर नकारात्मक प्रभाव हो सकता है.