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लोकसभा चुनाव 2019: BJP के गढ़ बैतूल को क्या भेदने में कामयाब होगी कांग्रेस?

विजय कुमार खंडेलवाल की मृत्यु के बाद उनके बेटे हेमंत खंडेलवाल ने बैतूल में जीत दर्ज कराई, लेकिन 2009 में परिसीमन के बाद अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित होने के बाद इस सीट से ज्योति धुर्वे ने यहां से जीत दर्ज कराई.

लोकसभा चुनाव 2019: BJP के गढ़ बैतूल को क्या भेदने में कामयाब होगी कांग्रेस?
फाइल फोटो

नई दिल्लीः मध्य प्रदेश की बैतूल लोकसभा सीट भारतीय जनता पार्टी के मजबूत गढ़ों में से एक है, यहां पिछले 8 लोकसभा चुनावों से भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशियों का ही बोलबाला रहा है और बीजेपी के दिग्गज नेता रहे विजय कुमार खंडेलवाल बैतूल से लगातार 4 बार सांसद चुने गए. उनकी मृत्यु के बाद उनके बेटे हेमंत खंडेलवाल ने बैतूल में जीत दर्ज कराई, लेकिन 2009 में परिसीमन के बाद अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित होने के बाद इस सीट से ज्योति धुर्वे ने यहां से जीत दर्ज कराई.

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बैतूल का राजनीतिक इतिहास
1967 में संसदीय सीट बनने के बाद से बैतूल पर कांग्रेस का ही कब्जा रहा, लेकिन 1977 में यह सीट कांग्रेस के हाथ से फिसलकर भारतीय लोकदल के हाथ में आ गई. हालांकि 1980 में फिर कांग्रेस ने इस सीट को अपने कब्जे में कर लिया और 1984 में भी अपना परचम लहराया, लेकिन 1989 में भाजपा प्रत्याशी को इस सीट से जीत हासिल हुई. जिसके बाद 1991 में कांग्रेस के असलम शेरखान ने कांग्रेस की हार का बदला लेकर जीत दर्ज कराई, लेकिन 1996 में फिर भाजपा ने बापसी की और लेकर अब तक इस सीट पर भाजपा 8 बार जीत दर्ज करा चुकी है और अब 9वीं बार भी जीत का परचम लहराने को तैयार दिख रही है.

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2014 के राजनीतिक समीकरण
बात करें 2014 के राजनीतिक समीकरण की तो 2009 में परिसीमन के बाद अनूसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हो गई, जिसके बाद 2009 और 2014 में भाजपा ने ज्योति धुर्वे को बैतूल से प्रत्याशी घोषित किया और पार्टी की उम्मीदों पर खरा उतरते हुए ज्योति धुर्वे ने कांग्रेस के अजय शाह को 3,28,614 वोटों के अंतर से हराया. इस चुनाव में बीजेपी की ज्योति धुर्वे को जहां 6,43,651 वोट मिले तो वहीं कांग्रेस प्रत्याशी अजय शाह को 3,15,037 वोट ही मिल सके.

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 सांसद का रिपोर्ट कार्ड
ज्योति धुर्वे को उनके निर्वाचन क्षेत्र के विकास कार्यों के लिए 17.50 करोड़ का फंड आवंटित किया गया, ब्याज के साथ मिलाकर यह राशि 20.64 करोड़ हो गई. आवंटित फंड में से सांसद धुर्वे ने 15.96 करोड़ यानी मूल फंड का 89.47 प्रतिशत खर्च कर दिया, जबकि करीब 4.68 करोड़ फंड बिना खर्च किए रह गया.