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पंजाब में सुखबीर सिंह बादल इस बार भी कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती...

सुखबीर सिंह बादल के राजनीतिक सफर की बात करें तो वह 11वीं और 12वीं लोकसभा के सदस्य रहे हैं. सुखबीर सिंह बादल ने अपना पहला चुनाव फरीदकोट से जीता था. 

पंजाब में सुखबीर सिंह बादल इस बार भी कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती...
1998 से 1999 के बीच बीजेपी सरकार में वह राज्य मंत्री रहे.

पंजाब: शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल लोकसभा चुनाव 2019 में फिरोजपुर लोक सभा सीट के चुनावी मैदान में अपनी किस्मत आजमा रहे है. सुखबीर सिंह बादल साल 2009 से 2017 तक पंजाप के उपमुख्यमंत्री रहे हैं.   

सुखबीर सिंह बादल के राजनीतिक सफर की बात करें तो वह 11वीं और 12वीं लोकसभा के सदस्य रहे हैं. सुखबीर सिंह बादल ने अपना पहला चुनाव फरीदकोट से जीता था. 1998 से 1999 के बीच बीजेपी सरकार में वह राज्य मंत्री रहे. 2001 से 2004 तक वह राज्यसभा सदस्य रहने के साथ वह 2004 में वह तीसरी बार 14वीं लोकसभा के लिए चुने गए. 

जबकि साल 2008 के जनवरी में वह अकाली दल के अध्यक्ष बने. एक साल बाद साल 2009 में उन्होंने पंजाब के उपमुख्यमंत्री की शपथ ली, लेकिन जुलाई 2009 में उन्होंने उपमुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया. हालंकि जलालाबाद सीट से उन्होंने उपचुनाव लड़ा और विजयी होने के बाद एक बार फिर पंजाब के उपमुख्यमंत्री की शपथ ली.

फिरोजपुर पंजाब देश का सबसे समृद्ध राज्य है. साथ ही इसे सिक्ख धर्म का घर भी कहा जाता है. चंडीगढ़ शहर पंजाब की राजधानी है. कृषि ही पंजाब के लोगों का मुख्य रूप से व्यवसाय है और राज्य की अर्थव्यवस्था में इसका महत्वपूर्ण योगदान रहा है. 1947 में पंजाब का निर्माण भारत के विभाजन के समय किया गया. पंजाब राज्य में कुल 22 जिले हैं. इस सीट पर 1998 से अकाली दल के सीनियर नेता जोरा सिंह मान 3 बार लोकसभा चुनाव जीते हैं. इसके बाद 2009 और 2014 के लोकसभा चुनाव में इस सीट पर अकाली दल के शेर सिंह घुबाया विजयी रहे. 

वहीं फिरोजपुर सीट से कांग्रेस ने इस बार भी शेर सिंह घुबाया को टिकट दिया है, जबकि आप ने यहां से हरजिंदर सिंह काका को टिकट दिया है. इसमें कोई शक नहीं है कि फिरोजपुर की चुनावी लड़ाई बेहद दिलचस्प होने वाली है. पंजाब के रण में बहरहाल जीत किसकी होती है यह देखना दिलचस्प होगा क्योंकि सभी पार्टियों ने चुनाव के लिए अपनी ताकत पूरी तरह से झोंक दी है. लोकतंत्र के इस महापर्व में जनता का फैसला सर्वोपरि होता है और 23 मई को जनता का फैसला लोगों के सामने होगा.