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1267 का वह अंक जिसकी आड़ लेकर चीन ने मसूद अजहर को ग्लोबल टेररिस्ट होने से बचाया, 10 बातें

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की '1267 अल कायदा सैंक्शन्स कमेटी' के तहत अजहर को आतंकवादी घोषित करने का प्रस्ताव 27 फरवरी को फ्रांस, ब्रिटेन और अमेरिका ने लाया था. 

1267 का वह अंक जिसकी आड़ लेकर चीन ने मसूद अजहर को ग्लोबल टेररिस्ट होने से बचाया, 10 बातें
फाइल फोटो

नई दिल्ली : आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को एक बार फिर से वैश्विक आतंकी घोषित करने की कवयाद में चीन ने अड़ंगा लगाया है. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में चीन ने मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित करने वाले प्रस्ताव पर तकनीकी रोक लगा दी. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की '1267 अल कायदा सैंक्शन्स कमेटी' के तहत अजहर को आतंकवादी घोषित करने का प्रस्ताव 27 फरवरी को फ्रांस, ब्रिटेन और अमेरिका ने लाया था. 

- पाकिस्तान स्थित जैश-ए-मोहम्मद को उसकी कुख्यात आतंकवादी गतिविधियों और अल कायदा के संग लिंक जुड़ा होने के चलते संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1267/1989/2253 के तहत स्थापित समिति की सूची में 2001 में शामिल किया गया था. 

- संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1267 की व्यवस्था संयुक्त राष्ट्र की वैश्विक आतंकवाद प्रतिरोधी रणनीति का मूलभूत अंग है.

- संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1267 को 15 अक्टूबर 1999 को सर्वसम्मति से अपनाया गया था। अफगानिस्तान की स्थिति पर 1189 (1998), 1193 (1998) और 1214 (1998) लाए गए प्रस्तावों को हटाने के बाद 1267 को अपनाया गया था. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के इसी अंक में काउंसिल ने ओसामा बिन लादेन और उसके सहयोगियों को आतंकवादियों के रूप में नामित किया और अल-कायदा, ओसामा बिन लादेन और / या तालिबान से जुड़े व्यक्तियों और संस्थाओं को कवर करने के लिए एक प्रतिबंध व्यवस्था को स्थापित किया. 

 

- कमेटी के सदस्यों के पास प्रस्ताव पर आपत्ति जताने के लिए 10 कार्य दिन का वक्त था. यह अवधि बुधवार को (न्यूयॉर्क के) स्थानीय समय दोपहर तीन बजे (भारतीय समयनुसार गुरुवार रात साढ़े 12 बजे) खत्म होनी थी.

- संयुक्त राष्ट्र में एक राजनयिक ने बताया कि समयसीमा खत्म होने से ठीक पहले चीन ने प्रस्ताव पर ‘तकनीकी रोक’ लगा दी. उन्होंने बताया कि चीन ने प्रस्ताव की पड़ताल करने के लिए और वक्त मांगा है. यह तकनीकी रोक छह महीनों के लिए वैध है और इसे आगे तीन महीने के लिए बढ़ाया जा सकता है. 

- इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय ने इस पर (घटनाक्रम पर) निराशा जताई. मंत्रालय ने कहा, ‘‘ हम निराश हैं. लेकिन हम सभी उपलब्ध विकल्पों पर काम करते रहेंगे, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि भारतीय नागरिकों पर हुए हमलों में शामिल आतंकवादियों को न्याय के कठघरे में खड़ा किया जाए.’’ 

- मंत्रालय ने कहा कि हम प्रस्ताव लाने वाले सदस्य राष्ट्रों के प्रयास के लिए आभारी हैं. साथ में सुरक्षा परिषद के अन्य सदस्यों और गैर सदस्यों के भी आभारी हैं जिन्होंने इस कोशिश में साथ दिया. मंत्रालय ने चीन का नाम लिए बिना कहा कि कमेटी अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित करने वाले प्रस्ताव पर कोई निर्णय नहीं कर सकी क्योंकि एक सदस्य देश ने प्रस्ताव रोक दिया.

- बीते 10 साल में संयुक्त राष्ट्र में अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित कराने का यह चौथा प्रस्ताव था. कमेटी आम सहमति से निर्णय करती है. इससे पहले 2017 में भी चीन ने अड़ंगा लगाकर जैश सरगना मसूद को वैश्विक आतंकी घोषित होने से बचा लिया था. 

- 2017 में मसूद अजहर को बचाते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में चीन ने कहा थि कि वह काफी बीमार है और एक्टिव नहीं है. चीन ने यह भी कहा था कि मसूद अजहर ने जैश-ए-मोहम्मद के साथ अपने लिंक को खत्म कर दिया है. 

- संयुक्त राष्ट्र में नियुक्त भारत के राजदूत एवं स्थाई प्रतिनिधि सैयद अकबरूद्दीन ने एक ट्वीट में कहा, ‘‘बड़े, छोटे और कई...1 बड़े देश ने रोक दिया, फिर से...1 छोटा सिग्नल @आतंक के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र. कई देशों का आभार - बड़े और छोटे - जो अभूतपूर्व संख्या में इस कवायद में शामिल हुए. ’’ 

- वैश्विक आतंकवादी की सूची में नाम आने से मसूद पर वैश्विक यात्रा प्रतिबंध लग जाता. साथ ही उसकी संपत्ति जब्त हो जाती. पंद्रह सदस्यीय सुरक्षा परिषद में वीटो के अधिकार वाले तीन देशों ने बुधवार को यह नया प्रस्ताव पेश किया था. 

- उल्लेखनीय है कि सारी नजरें चीन पर थी क्योंकि वह पहले भी संयुक्त राष्ट्र द्वारा अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित कराने की भारत की कोशिशों में रोड़ा अटका चुका है.

चीन को बन रहा है अड़ंगा

एशिया महाद्वीप में भारत से मुकाबले और OBOR प्रॉजेक्ट को पूरा करने के लिए चीन को पाकिस्तान की आवश्यकता है. 

ऐसा कहा जाता है गुटनिरपेक्ष देशों के संगठन में पाकिस्तान, चीन का साथ देता है. इसलिए वह उसे बचाने के लिए प्रयास करता है. 

रूस के बाद अमेरिका से बढ़ रही भारत की दोस्ती से चीन को कई सारी समस्याएं हो सकती हैं.

इनपुटः भाषा