Chaitra Navratri Day 9: चैत्र नवरात्रि के आखिरी दिन आज ऐसे करें मां सिद्धिदात्री की पूजा, सभी कष्ट और रोग हो जाएंगे दूर

आज चैत्र नवरात्रि की नवमी तिथि यानी आखिरी दिन है. इस दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है. यह देवी दुर्गा का नौवां स्वरूप है. ऐसी मान्यता है कि मां की पूजा से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं.

Chaitra Navratri Day 9: चैत्र नवरात्रि के आखिरी दिन आज ऐसे करें मां सिद्धिदात्री की पूजा, सभी कष्ट और रोग हो जाएंगे दूर
नवरात्रि के आखिरी दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा

नई दिल्ली: आज चैत्र नवरात्रि का नौवां और आखिरी दिन है (Last day of Chaitra Navratri) और इस दिन मां दुर्गा के सिद्धिदात्री रूप (Maa siddhidatri) की पूजा अर्चना की जाती है. चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 13 अप्रैल से हुई थी जिसका समापन आज 21 अप्रैल बुधवार को हो रहा है. जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है मां सिद्धिदात्री सभी कार्यों को सिद्ध करती हैं और मोक्ष की देवी मानी जाती हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां सिद्धिदात्री भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करती हैं (Fulfills all wishes) और उन्हें बल-बुद्धि और धन प्रदान करती हैं. आज कैसे करें मां की पूजा और क्या है उनका पसंदीदा भोग, यहां जानें.

कैसा है मां सिद्धिदात्री का स्वरूप

देवी महालक्ष्मी (Goddess Lakshmi) की ही तरह मां सिद्धिदात्री भी कमल के फूल पर विराजमान रहती हैं और इनके चार हाथ हैं जिनमें वह कमल का फूल, शंख, गदा और चक्र धारण करती हैं. मां सिद्धिदात्री को देवी सरस्वती (Goddess Saraswati) का स्वरूप भी माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां सिद्धिदात्री के पास संसार की समस्त आठ सिद्धियां मौजूद हैं. वे हैं- अणिमा, महिमा, प्राप्ति, प्रकाम्य, गरिमा, लघिमा, ईशित्व और वशित्व. मां सिद्धिदात्री की पूजा करने से भक्त को ये सिद्धियां प्राप्त होती हैं.

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भगवान शिव ने भी की थी इनकी पूजा

देवी पुराण के अनुसार भगवान शिव ने भी मां सिद्धिदात्री की तपस्या की थी (Lord Shiv worshipped Siddhidatri) और इनकी कृपा से ही उन्हें इन सिद्धियों की प्राप्ति हुई थी. साथ ही ऐसा भी माना जाता है कि मां सिद्धिदात्री की कृपा से ही भगवान शिव का आधा शरीर देवी का हो गया था और इसी कारण वह इस लोक में अर्धनारीश्वर के नाम से प्रसिद्ध हुए. चैत्र नवरात्रि के नौवें दिन देवी सिद्धिदात्री की पूजा करने के बाद ही नवरात्रि का समापन माना जाता है.

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मां सिद्धिदात्री की पूजा और भोग

ऐसी मान्यता है कि नवरात्रि के नौवें यानी आखिरी दिन देवी को नौ प्रकार के फल फूल, नवरस युक्त भोजन अर्पित करना चाहिए. पूजा विधि की बात करें तो सुबह स्नान आदि के बाद सबसे पहले कलश की पूजा और उसमें स्थपित सभी देवी-देवताओं का ध्यान करना चाहिए. इसके बाद माता के मंत्रो का जाप कर उनकी पूजा करनी चाहिए. इसके बाद मां को पुष्प अर्पित करें. मां को अनार का फल भोग लगाएं. साथ ही नैवेध भी अर्पित करें. माता की आरती करें. इस दिन हवन भी जरूर करना चाहिए और बहुत से लोग जो अष्टमी को कन्या पूजन नहीं करते हैं वे नवमी तिथि के दिन कन्या पूजन भी करते हैं.

(नोट: इस लेख में दी गई सूचनाएं सामान्य जानकारी और मान्यताओं पर आधारित हैं. Zee News इनकी पुष्टि नहीं करता है.)

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