नवरात्रि 2020: जानिए पहले दिन कैसे करें मां शैलपुत्री की पूजा

दुनियाभर में फैली कोरोना महामारी (Corona Pandemic) को देखते हुए इस बार मंदिरों (Temples) में सावधानी बरती जा रही है. भक्तों के हाथों को सेनेटाईज करने के साथ-साथ उनका तापमान भी चेक किया जा रहा है. जम्मू में भी मां वैष्णों देवी मंदिर के खुलने से देवी के भक्त काफी खुश हैं.

नवरात्रि 2020: जानिए पहले दिन कैसे करें मां शैलपुत्री की पूजा
आज मां शैलपुत्री की पूजा हो रही है ....

नई दिल्ली :  आज से देशभर में शारदीय नवरात्रों (Shardiya Navratri) की शुरुआत हो गई है. नवरात्रों के पहले दिन मां शैलपुत्री (Maa Shailputri) की पूजा की जाती है. मां शैलपुत्री को ऊर्जा का स्त्रोत माना जाता है. शारदीय नवरात्र इस साल 8 दिन के ही होंगे. इस बार नवरात्र में महाअष्टमी और नवमी एक ही तिथि को होगी. आज आपको बताते हैं नवरात्र प्रतिपदा यानि आज आपको कलश स्थापना किस तरह करनी है. कलश की स्थापना का मुहूर्त अब कुछ ही समय में लगने वाला है.

मां अपने बच्चों के दुख दूर करती हैं, मां दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए देशभर में भक्ति की शक्ति दिख रही है. कोरोना काल में लोगों को जागरुकता के साथ शक्ति की पूजा के अलग अलग उपाए बताए जा रहे हैं. इसी कड़ी में हम आपको नवरात्र की शुरुआत करने वाली कलश स्थापना की पूरी विधि और उसका शुभ मुहूर्त भी बताते हैं.

कलश स्थापन का महत्व
हिंदू सनातन धर्म में कलश स्थापना का बहुत महत्व माना गया है किसी भी शुभ कार्य विवाह, गृहप्रवेश आदि में कलश पूजन किया जाता है. नवरात्रि के प्रथम दिन मां शैलपुत्री के पूजन के साथ घटस्थापना करने का प्रावधान है. शुभ कार्य के लिए माता की चौकी लगाकर मिट्टी का कुंभ, तांबे या फिर चांदी का बर्तन रखा जाता है. उसके ऊपर स्वास्तिक का चिह्न बनाने के साथ नारियल स्थापित किया जाता है. 

कलश स्थापना का मुहूर्त
नवरात्र में कलश की स्थापना आश्विन शुक्ल प्रतिपदा को की जाती है. इस बार प्रतिपदा रात्रि 09.08 तक रहेगी. इसके चार शुभ मुहूर्त होंगे. सुबह 07.30 से 09.00 तक. दोपहर 01.30 से 03.00 तक. दोपहर 03.00 से 04.30 तक और शाम को 06.00 से 07.30 तक.

कलश स्थापन की विधि
कलश स्थापना के लिए सबसे पहले पूजा स्थल को शुद्ध कर लेना चाहिए. एक लकड़ी का पटरा रखकर उस पर लाल रंग का कपड़ा बिछाएं. इस कपड़े पर थोड़े चावल रखने चाहिए. चावल रखते हुए सबसे पहले गणेश जी का स्मरण करना चाहिए. एक मिट्टी के पात्र में जौ बोना चाहिए. इस पात्र पर जल से भरा हुआ कलश स्थापित करें. कलश पर रोली से स्वस्तिक या ऊं बनाना चाहिए. इसके मुख पर रक्षा सूत्र बांधें. फिर इसमें सुपारी, सिक्का डालकर आम या अशोक के पत्ते रखने चाहिए.

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कलश के मुख को ढक्कन से ढकें. ढक्कन को चावल से भरकर रखें. एक नारियल लें और उस पर चुनरी लपेटकर रक्षा सूत्र से बांधें. इस नारियल को कलश के ढक्कन पर रखते हुए सभी देवताओं का आवाहन करना चाहिए. अंत में दीप जलाकर कलश की पूजा करनी चाहिए. कलश पर फूल और मिठाइयां चढ़ाएं. नवरात्र में देवी पूजा के लिए जो कलश स्थापित किया जाता है वह सोना, चांदी, तांबा, पीतल या मिट्टी का ही होना चाहिए.

कोरोना काल में विशेष इंतजाम
दुनियाभर में फैली कोरोना महामारी (Corona Pandemic) को देखते हुए इस बार मंदिरों (Temples) में विशेष सावधानी बरती जा रही है. भक्तों के हाथों को सेनेटाईज करने के साथ-साथ उनका तापमान भी चेक किया जा रहा है. जम्मू में भी मां वैष्णों देवी मंदिर के खुलने से देवी के भक्त काफी खुश हैं. हालांकि मंदिर के बाहर भक्तों के बीच सोशल डिस्टेंसिंग का भी पूरा ध्यान रखा जा रहा है.

नवरात्रि के व्रत में विशेष ध्यान दें
नवरात्रि में नौ दिन भी व्रत रख सकते हैं और दो दिन भी. जो लोग नौ दिन व्रत रखेंगे वो लोग दशमी को पारायण करेंगे और जो लोग प्रतिपदा और अष्टमी को व्रत रखेंगे वो लोग नवमी को पारायण करेंगे. व्रत के दौरान जल और फल का सेवन करें. ज्यादा तला भुना और गरिष्ठ आहार ग्रहण न करें.

अगर आप भी नवरात्री के व्रत रखने के इच्‍छुक हैं, तो व्रत रखन के लिए इन नियमों का पालन करना चाहिए.
- नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना कर नौ दिनों तक व्रत रखने का संकल्‍प लें.

- पूरी श्रद्धा भक्ति से मां की पूजा करें.

- दिन के समय आप फल और दूध ले सकते हैं.

- शाम के समय मां की आरती उतारें.

- सभी में प्रसाद बांटें और फिर खुद भी ग्रहण करें.

- फिर भोजन ग्रहण करें.

- हो सके तो इस दौरान अन्‍न न खाएं, सिर्फ फलाहार ग्रहण करें.

- अष्टमी या नवमी के दिन नौ कन्याओं को भोजन कराएं. उन्हें उपहार और दक्षिणा दें.

- अगर संभव हो तो हवन के साथ नवमी के दिन व्रत का पारण करें.

देश भर में माता के सभी मंदिरों में सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए हैं. वहीं जम्मू-कश्मीर में माता वैष्णों देवी (Mata Vaishno Devi) के मंदिर परिसर के आसपास ड्रोन के जरिए नजर रखी जा रही है.

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