पाथरी को साईं बाबा का जन्म स्थान बताने पर क्यों छिड़ा है विवाद, पढ़ें क्या है इसके पीछे का सच

जिस पाथरी में साईं बाबा का जन्म स्थान बताया जा रहा है वो शिरडी से करीब 270 किलोमीटर दूर परभणी जिले में मौजूद है.

पाथरी को साईं बाबा का जन्म स्थान बताने पर क्यों छिड़ा है विवाद, पढ़ें क्या है इसके पीछे का सच
पाथरी में साईं बाबा का मंदिर.

शिरडी: महाराष्ट्र (Maharashtra) के शिरडी (Shirdi) में साईं बाबा (Sai Baba) के जन्म स्थान को लेकर विवाद छिड़ गया है. ये विवाद उद्धव ठाकरे के शिरडी से करीब 270 किलोमीटर दूर पाथरी में विकास के लिए दिए गए 100 करोड़ रुपये देने की घोषणा के बाद शुरू हुआ. जिसका शिरडी के लोगों ने विरोध शुरू कर दिया है. उसी के विरोध में आज शिरडी में स्थानीय लोगों ने बंद का ऐलान किया है. हालांकि साईं बाबा के मंदिर को इस बंद से अलग रखा गया है.

आपको बता दें कि जिस पाथरी में साईं बाबा का जन्म स्थान बताया जा रहा है वो शिरडी से करीब 270 किलोमीटर दूर परभणी जिले में मौजूद है. शिरडी से पाथरी पहुंचने में करीब 5 घंटे का वक्त लगता है. हालांकि पाथरी भी दो राज्यों में होने का दावा किया जाता है. एक महाराष्ट्र में तो दूसरा आंध्र प्रदेश में है. 

हालांकि महाराष्ट्र के पाथरी गांव को ही सांई बाबा के जन्म स्थान के तौर पर ज्यादा माना जाता है. माना जाता है कि आजादी के बाद जब राज्यों का पुनर्गठन हुआ तो आंध्र प्रदेश में मौजूद पाथरी गांव महाराष्ट्र का हिस्सा बन गया. सांई बाबा के जन्म स्थान को लेकर कई पुस्तकों में जिक्र आता है, और उनमें से काशीराम की पुस्तक कलयुग में सांई अवतार के अलावा शशिकांत शांताराम गडकरी की पुस्तक सद्‍गुरु सांई दर्शन के अलावा दूसरी कई किताबों में इस बात का दावा है कि साईं बाबा का जन्म पाथरी में ही हुआ था. 

शांतारम गडकरी की किताब दरअसल कन्नड़ में लिखी बी. वी. सत्यनारायण राव की किताब का हिंदी अनुवाद है. इस पुस्तक में जो जानकारी दी गई है उसके मुताबिक पाथरी में साईं बाबा का जन्म हुआ था. जहां उनकी कई चीजें आज भी रखी हुई हैं. कुछ लोगों का मानना है कि बाबा का जन्म 28 सितंबर 1835 को परभणी जिले के पाथरी में हुआ था, वहीं कुछ 27 सितंबर 1838 को आंध्र प्रदेश के पाथरी गांव में साईं बाबा का जन्म होना मानते हैं.

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एक दावा तो ये भी किया जाता है कि साईं बाबा का जन्म अंग्रेजी शासनकाल में निजाम स्टेट में पड़ने वाले पाथरी में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था. कहा जाता है कि बाबा के वंशजों में भुसारी परिवार है जिसके वंशज आज भी मौजूद हैं. गडकरी की पुस्तक सद्गुरु सांई दर्शन में भी इसका जिक्र है कि सांई ब्राह्मण परिवार में जन्में थे और उनके पिता का नाम गंगाभाऊ और माता का नाम देवकी गिरी था. कुछ लोग इन्हें भगवंत राव और अनुसूया अम्मा भी कहते हैं. कहा जाता है कि इस गांव में आज भी वो घर है जहां सांई बाबा का जन्म हुआ था. इस घर को भुसारी परिवार के ही रघुनाथ भुसारी ने साई ट्रस्ट को दिया था.