बुधवार को गणेश जी का वार माना गया है. बुधवार को इनकी आराधना करने से समस्त विघ्नों का नाश होता है, घर में सुख-समृद्धि का वास होता है, धन-धान्य की बरकत होती है और बुद्धि-विवेक का विकास होता है.
Trending Photos
नई दिल्ली: बुधवार को गणेश जी का वार माना गया है. बुधवार को इनकी आराधना करने से समस्त विघ्नों का नाश होता है, घर में सुख-समृद्धि का वास होता है, धन-धान्य की बरकत होती है और बुद्धि-विवेक का विकास होता है. सभी देवी-देवताओं से पूर्व इनकी आराधना की जाती है. किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत इन्हीं की पूजा-अर्चना से की जाती है. पंडित शिवकुमार तिवारी शास्त्री जी से जानिए बुधवार के विशेष मंत्र और पूजन विधि.
बुधवार क्यों है इनका वार
एक पौराणिक मान्यता के अनुसार, कैलाश पर्वत पर जिस समय माता पार्वती के द्वारा गणेश जी की उत्पत्ति हुई थी तो बुध देव भी वहां उपस्थित थे. इसलिए तभी से बुध को गणेशजी का प्रमुख वार माना गया है.
गणेशजी की पूजा से लाभ
गणेशजी का पूजन करने से सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है और जिन लोगों का बुध कमजोर हो, उनके लिए इनकी आराधना बहुत शुभ होती है.
पूजा के विधि-विधान
1. पूजा करते समय गणेशजी को उनके प्रिय बूंदी के लड्डू का भोग लगाएं.
2. पूजा में दूर्वा की गांठें अर्पित करें.
यह भी पढ़ें- दूर्वा के इस चमत्कारी उपाय से दूर होगा दुर्भाग्य, पूरी होंगी सभी मनोकामनाएं
3. गुड और गाय के घी का भोग भी लगाएं. बाद में इसे गाय को खिलाना बहुत उत्तम माना जाता है.
4. गणेशजी को लाल सिंदूर अर्पित करें.
5. घर में क्लेश आदि हो तो गणेशजी की सफेद प्रतिमा स्थापित करें और सफेद मोदक का भोग लगाएं.
गणेशजी के महामंत्र
गणेशजी से सर्वप्रथम विनती करते हुए इस मंत्र का जाप करें.
'ऊँ वक्रतुण्ड महाकाय सूर्य कोटि समप्रभ
निर्विघ्नं कुरू मे देव, सर्व कार्येषु सर्वदा।।'
गजानंद एकाक्षर मंत्र
'ऊँ गं गणपतये नमः।।'
गणेश गायत्री मंत्र
'ऊँ एकदन्ताय विहे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो दन्तिः प्रचोदयात्।'
बिगड़े काम बनाने हेतु गणेश मंत्र
'त्रयीमयायाखिलबुद्धिदात्रे बुद्धिप्रदीपाय सुराधिपाय।
नित्याय सत्याय च नित्यबुद्धि नित्यं निरीहाय नमोस्तु नित्यम्।।'
विघ्नों के निवारण हेतु गणेश मंत्र
'गणपतिर्विघ्नराजो लम्बतुण्डो गजाननः।
द्वैमातुरश्च हेरम्ब एकदन्तो गणाधिपः॥
विनायकश्चारुकर्णः पशुपालो भवात्मजः।
द्वादशैतानि नामानि प्रातरुत्थाय यः पठेत्॥
विश्वं तस्य भवेद्वश्यं न च विघ्नं भवेत् क्वचित्'
ग्रह दोष से रक्षा हेतु गणेश मंत्र
'णपूज्यो वक्रतुण्ड एकदंष्ट्री त्रियम्बक:।
नीलग्रीवो लम्बोदरो विकटो विघ्रराजक:।।
धूम्रवर्णों भालचन्द्रो दशमस्तु विनायक:।
गणपर्तिहस्तिमुखो द्वादशारे यजेद्गणम्।।'
इन मंत्रों के साथ करें गणेशजी की पूजा
पूजा करते हुए यदि गणेशजी के मंत्रों का उच्चारण भी किया जाए तो पूजा जल्दी सफल होती है. तो आइए जानें, गणेशजी के विशेष मंत्र.
दीपक प्रज्वलित करते समय इस मंत्र का उच्चारण करें
साज्यं च वर्तिसंयुक्तं वह्निना योजितं मया,
दीपं गृहाण देवेश त्रैलोक्यतिमिरापहम्,
भक्त्या दीपं प्रयच्छामि देवाय परमात्मने,
त्राहि मां निरयाद् घोरद्दीपज्योत।
सिंदूर अर्पण करते हुए इस मंत्र का उच्चारण करें
सिन्दूरं शोभनं रक्तं सौभाग्यं सुखवर्धनम्,
शुभदं कामदं चैव सिन्दूरं प्रतिगृह्यताम्।
यज्ञोपवीत अर्पित करते हुए इस मंत्र का उच्चारण करें
नवभिस्तन्तुभिर्युक्तं त्रिगुणं देवतामयम्,
उपवीतं मया दत्तं गृहाण परमेश्वर।
फूल व पुष्पमाला अर्पित करते समय इस मंत्र का उच्चारण करें
माल्यादीनि सुगन्धीनि मालत्यादीनि वै प्रभो,
मयाहृतानि पुष्पाणि गृह्यन्तां पूजनाय भोः।
भोग लगाते समय इस मंत्र का उच्चारण करें
नैवेद्यं गृह्यतां देव भक्तिं मे ह्यचलां कुरू,
ईप्सितं मे वरं देहि परत्र च परां गरतिम्,
शर्कराखण्डखाद्यानि दधिक्षीरघृतानि च,
आहारं भक्ष्यभोज्यं च नैवेद।
इस प्रकार पूरे विधि-विधान से भगवान गणेशजी की पूजा करके जीवन में खुशहाली ही खुशहाली व्याप्त होगी.