Explainer: क्या अंतरिक्ष में बच्चे पैदा कर सकता है इंसान? स्पेस स्टेशन पर चल रहा अनोखा प्रयोग
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Explainer: क्या अंतरिक्ष में बच्चे पैदा कर सकता है इंसान? स्पेस स्टेशन पर चल रहा अनोखा प्रयोग

Science News in Hindi: पिछले कुछ समय से इंसान एक सपना देख रहा है, पृथ्‍वी से परे किसी दूसरी जगह पर बसने का. क्या अंतरिक्ष में परिस्थितियां ऐसी हैं कि मानव प्रजनन कर सके? क्या अंतरिक्ष में बच्चे पैदा किए जा सकते हैं.

Explainer: क्या अंतरिक्ष में बच्चे पैदा कर सकता है इंसान? स्पेस स्टेशन पर चल रहा अनोखा प्रयोग

Science News: क्या इंसान अंतरिक्ष में प्रजनन कर सकता है? जैसे-जैसे विज्ञान ने प्रगति की, मनुष्य पृथ्‍वी छोड़कर दूसरे ग्रह पर बसने का सपना देखने लगा. हम शायद किसी और ग्रह पर अगले कुछ दशकों में स्थायी बेस बना भी लें, लेकिन मानव के वहां एक समुदाय के रूप में बसने की बस कल्पना ही की जा सकती है. उस राह में तमाम बाधाओं से इतर एक बायोलॉजिकल सवाल भी है: क्या हम अंतरिक्ष में प्रजनन कर सकते हैं या नहीं? माइक्रोग्रैविटी और बढ़े हुए रेडिएशन में प्रजनन की जैविक जटिलताओं पर अब तक बहुत कम रिसर्च हुई है.

जापानी वैज्ञानिक, प्रोफेसर तेरुहिको वाकायामा ने इसी अनछुए क्षेत्र में कदम रखा है. उन्होंने अंतरिक्ष में स्तनधारी जीवों के प्रजनन पर रिसर्च शुरू की है, जो मानवता के अंतरिक्ष में भविष्‍य को दिशा दे सकती है.

क्या है 'माउस स्पर्म' प्रयोग?

यामानाशी यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर तेरुहिको वाकायामा ने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर एक अनोखा प्रयोग शुरू किया है. फ्रीज-ड्राई माउस स्पर्म को रेडिएशन से सुरक्षित एक विशेष बॉक्स में रखा गया है. इस स्पर्म को 2025 में पृथ्वी पर वापस लाया जाएगा और यह देखा जाएगा कि क्या यह स्वस्थ संतान पैदा करने में सक्षम है.

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इस स्टडी का मकसद यह समझना है कि क्या अंतरिक्ष में रहने के बावजूद स्तनधारियों की प्रजनन प्रक्रिया सामान्य रह सकती है. अगर यह प्रयोग सफल होता है, तो यह भविष्य में अंतरिक्ष में मानव प्रजनन के लिए नए रास्ते खोल सकता है. प्रोफेसर वाकायामा, चंद्रमा जैसी जगहों पर 'जीवन का बैकअप' बनाना चाहते हैं, जिससे पृथ्वी पर किसी बड़ी आपदा के दौरान जीवन को पुनर्जीवित किया जा सके.  

अब से पहली ऐसी रिसर्च के क्या नतीजे रहे?

'माउस स्पर्म' प्रयोग इससे पहले किए गए अंतरिक्ष प्रजनन रिसर्च पर आधारित है. इनमें शामिल हैं:

चिकन (1989): फर्टिलाइज्ड चिकन अंडों को अंतरिक्ष भेजा गया, लेकिन गुरुत्वाकर्षण की कमी से उनका सामान्य विकास बाधित हुआ.

उभयचर (1992): स्पेस शटल 'एंडेवर' में पैदा हुए टैडपोल ने असामान्य तैराकी व्यवहार दिखाए.

तिलचट्टे (2007): अंतरिक्ष में गर्भधारण से जन्मे तिलचट्टों में अद्वितीय शारीरिक विशेषताएं देखी गईं.

अन्य प्रजातियां: मेडाका मछली और घोंघे ने अंतरिक्ष में पूर्ण प्रजनन चक्र पूरा किया.

हालांकि, जटिल जीवों, विशेष रूप से स्तनधारियों में, प्रजनन संबंधी चुनौतियां अधिक होती हैं. इस लिहाज से माउस स्पर्म प्रयोग एक महत्वपूर्ण कदम है.

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अंतरिक्ष में प्रजनन: बहुत सारी चुनौतियां

अंतरिक्ष में प्रजनन कई बाधाओं का सामना करता है. माइक्रोग्रैविटी भ्रूण के विकास में हस्तक्षेप कर सकती है, जिससे अंगों का निर्माण, तंत्रिका तंत्र का विकास और अंग-प्रत्यंगों का सही ढंग से बनना प्रभावित हो सकता है. इसके अलावा, अंतरिक्ष में हाई लेवल का कॉस्मिक रेडिएशन शुक्राणु और अंडाणु के डीएनए को नुकसान पहुंचा सकता है, जिससे अनुवांशिक विकार और असामान्यताएं बढ़ने का खतरा होता है.

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