इस मुस्लिम महिला क्रिकेटर ने पेश की अनोखी मिसाल, मैच में हिजाब पहनकर की बॉलिंग

द हंड्रेड (The Hundred) टूर्नामेंट में बर्मिंघम फीनिक्स (Birmingham Phoenix) की तरफ से अबताहा मकसूद (Abtaha Maqsood) मैच के दौरान हिजाब पहनकर आईं और रूढ़ियों को तोड़ा. उन्होंने अन्य युवा मुस्लिम लड़कियों के लिए एक मिसाल पेश की.

इस मुस्लिम महिला क्रिकेटर ने पेश की अनोखी मिसाल, मैच में हिजाब पहनकर की बॉलिंग
(फोटो-Twitter)

नई दिल्ली: इंग्लैंड (England) में 100 बॉल का क्रिकेट टूर्नामेंट द हंड्रेड (The Hundred) काफी पॉपुलर हो रहा है. इसकी शुरुआत 21 जुलाई 2021 को हुई थी. यहां ज्यादातर प्लेयर्स अपने खेल की वजह से शोहरत बंटोर रहे हैं. इस बीच स्कॉटलैंड (Scotland) की अबताहा मकसूद (Abtaha Maqsood) अलग कारणों से सभी का ध्यान अपनी तरफ खींचा है.

हिजाब पहनकर की बॉलिंग

बर्मिंघम फीनिक्स और लंदन स्पिरिट (Birmingham Phoenix vs London Spirit) के बीच खेले गए मुकाबले में अबताहा मकसूद (Abtaha Maqsood) हिजाब पहन कर बॉलिंग के लिए आईं तो कई लोगों के लिए मिसाल बन गईं. देखते ही देखते उनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं.

 

अबताहा ने 5 बॉल फेंके

इस मैच में बर्मिंघम फीनिक्स ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 100 गेंदों में 6 विकेट खोकर 128 रन बनाए. इसके जवाब में लंदन स्पिरिट ने 96 गेंदों में 132 रन पूरे कर लिए और 3 विकेट से जीत दर्ज की. बर्मिंघम की तरफ से अबताहा मकसूद (Abtaha Maqsood) ने इस मुकाबले में 5 गेंद फेंके और 7 रन दिए, उन्होंने एक भी विकेट नहीं लिया.

तायक्वोंडो में ब्लैक बेल्ट

स्कॉटलैंड (Scotland) की अबताहा मकसूद (Abtaha Maqsood) ने द हंड्रेड (The Hundred) टूर्नामेंट के लिए आखिरी लम्हों में रजिस्ट्रेशन कराया था. उन्होंने अब तक 18 टी-20 इंटरनेशनल मैच खेले हैं और 12.82 की औसत से 23 विकेट हासिल किए हैं. वो तायक्वोंडो (Taekwondo) में ब्लैक बेल्ट हैं. 

 

 

11 साल की उम्र में क्रिकेट में दिलचस्पी

अबताहा मकसूद (Abtaha Maqsood) ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2014 (Glasgow Commonwealth Games 2014) में अपने मुल्क की ध्वजवाहक रह चुकी हैं. अबताहा ने महज 11 साल की उम्र में क्रिकेट को अपना करियर बना लिया.  उन्होंने पोलॉक क्रिकेट एकेडमी से इस खेल की कोचिंग हासिल की.
 

 

'हिजाब पहनकर सामने आने में लगता था डर'

अबताहा मकसूद ने बीबीसी को दिए गए इंटरव्यू में कहा, ये काफी अहम है, जब मैं छोटी थी तब मैंने किसी मुस्लिम एथलीट को हिजाब पहनते नहीं देखा. मैं पहली बार हॉल में आने से डर रही थी, क्योंकि लोग मुझे ही देखेंगे, लेकिन कुछ वक्त बाद आपको इसकी आदत हो जाती है. मैं इतने बड़े स्तर पर हिजाब पहनकर क्रिकेट खेलने को लेकर उत्साहित हूं. लोग और युवा लड़कियां जो खुद हिसाब पहनती हैं मुझे देख पाएंगी.

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