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12 साल के बच्चे की एशेज देखने की अनोखी कहानी, 4 साल तक जमा करता रहा कचरा और...

Ashes Series: मैक्स वेट की क्रिकेट के प्रति दीवानगी और उसकी रोचक कहानी ऑस्ट्रेलियन मीडिया में छाई हुई है.

12 साल के बच्चे की एशेज देखने की अनोखी कहानी, 4 साल तक जमा करता रहा कचरा और...

मेलबर्न: ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड (Australia vs England) क्रिकेट के दो सबसे पुराने प्रतिद्वंद्वी हैं. कोई शक नहीं कि दोनों के बीच होने वाली एशेज सीरीज (Ashes Series) क्रिकेट की सबसे बड़ी और पुरानी राइवलरी (प्रतिद्वंद्विता) है. इस प्रतिद्वंद्विता के लाखों दीवाने हैं. इनमें एक 12 साल का बच्चा भी है. इस बच्चे की कहानी किसी भी खेल और खिलाड़ी के लिए गर्व की बात हो सकती है. 12 साल का मैक्स वेट (Max Waight) मौजूदा एशेज सीरीज को देखने के लिए पॉकेट मनी खर्च करके ऑस्ट्रेलिया से इंग्लैंड आया है. इससे भी दिचचस्प बात यह है कि उसने अपनी पॉकेटमनी कचरा बीनकर जमा की. 

मैक्स वेट की क्रिकेट के प्रति दीवानगी और उसकी रोचक कहानी ऑस्ट्रेलियन मीडिया में छाई हुई है. मैक्स ने बताया कि जब ऑस्ट्रेलिया के क्रिकेटरों को उसके बारे में पता चला तो सबने उसे खूब प्यार दिया. कोच जस्टिन लेंगर (Justin Langer), स्टीव वॉ (Steve Waugh) और नाथन लॉयन ने उसे अपने बगल में बिठाया. कोच लेंगर ने तो उसे प्लान बुक तक दिखाया. मैक्स ने बताया कि स्टीव स्मिथ (Steve Smith) और पैट कमिंस उसके फेवरेट क्रिकेटर हैं. 

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मैक्स ने ऑस्ट्रेलिया से इंग्लैंड आने की अपनी रोचक कहानी भी बताई. मैक्स ने बताया कि उसने 2015 में ऑस्ट्रेलिया को अपनी जमीन पर विश्व कप ट्रॉफी उठाते हुए देखा था. तभी से उसके मन में यह विचार आया कि वह इंग्लैंड में होने वाली एशेज सीरीज देखेगा. विचार तो आ गया, लेकिन इस पर अमल करना आसान नहीं था. वह भी तब, जब उसके पिता डेमियन ने इस विचार को पहले तो पूरी तरह खारिज कर दिया. बाद में उन्होंने एक कठिन शर्त जोड़ दी. डेमियन ने कहा कि अगर मैक्स 1500 ऑस्ट्रेलियन डॉलर (करीब 73 हजार रुपए) जमा कर ले तो वे उसे इंग्लैंड ले जाएंगे. 

मैक्स को इंग्लैंड जाने की सशर्त मंजूरी मिल गई थी, लेकिन राह आसान ना थी. ऐसे मौके पर मां ने एक आइडिया दिया. उन्होंने मैक्स से कहा कि उसे पैसे जुटाने के लिए पड़ोसियों के घर से कचरा जमा करना चाहिए. इसके बदले हर घर से एक ऑस्ट्रेलियन डॉलर लेने चाहिए. मैक्स को यह आइडिया जम गया. उसने इसके बाद अपने पड़ोसियों को चिट्ठी लिखी और अपने वेस्ट मैनेज सर्विस (कचरा हटाने का प्लान) के बारे में बताया. उसका प्लान पड़ोसियों को पसंद आ गया. 

 

 

मैक्स इसके बाद चार साल तक अपने प्लान पर डटा रहा. वह चार साल तक पड़ोसियों के घर से कचरा जमा करता रहा. जब कभी वह बीमार होने के कारण कचरा जमा करने नहीं गया, तो उसकी जगह उसके पैरेंट्स या छोटे भाई ने यह काम किया. जब चार साल बाद मैक्स के पास 1500 ऑस्ट्रेलियन डॉलर जमा हो गए, तब उसके पिता ने उसे इंग्लैंड ले जाने का वादा निभाया. इस समय मैक्स पूरे परिवार के साथ एशेज सीरीज के मजे ले रहा है. 

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मैक्स के पिता ने इस बारे में कहा, ‘जब मैक्स ने मुझसे इंग्लैंड आने के लिए कहा तो मैंने इसे मौके के रूप में देखा. मैं उसकी इच्छा पूरी करना चाहता था. साथ ही उसे यह भी सीख देनी थी कि हर काम की एक कीमत होती है. कुछ भी पाना आसान नहीं है. इसलिए मैंने उसे कुछ पैसे जमा करने को कहा था, ताकि वह इसकी कीमत समझ सके. अब वह बचत करने का महत्व सीख गया है. यह सीख उसके पूरे जीवन में काम आएगी.’