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जल्द ही खेलों की राजधानी होगा यह शहर, 2020 ओलंपकि मेडल्स पर है निगाहें

तोक्यो में तीरंदाजी और 2028 तक एथलेटिक्स में ओलंपिक पदक है टाटा स्टील का लक्ष्

जल्द ही खेलों की राजधानी होगा यह शहर, 2020 ओलंपकि मेडल्स पर है निगाहें
(फाइल फोटो)

जमशेदपुर: जमशेदपुर को स्टील  के कारखाने के ही पहचाने जाने वाली बात अब काफी पुरानी हो गई है. अब यह खेल का नया गढ़ बनने को पूरी तरह तैयार है. सौरव गांगुली से लेकर दीपिका कुमारी तक देश के कई सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों के लिए शुरुआती वर्षों में ‘सहयोग और समर्थन’ से महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले टाटा स्टील की निगाहें अब ओलंपिक पदक पर टिक गई हैं. उम्मीद है कि तोक्यो 2020 से इसकी शुरुआत हो जाएगी. 

शुरू की हैं 17 एकेडमी
जमशेदपुर को देश की खेल राजधानी बनाने के उद्देश्य से टाटा स्टील ने इस शहर में 17 खेलों के लिए अकादमियां शुरू की हैं जिनमें तीरंदाजी, हॉकी और फुटबाल प्रमुख हैं लेकिन भविष्य में वह इस क्षेत्र की युवा प्रतिभाओं को एथलेटिक्स में विश्वस्तरीय खिलाड़ी के रूप में तैयार करने की योजना बना रहा है ताकि 2028 में इस खेल में ओलंपिक पदक हासिल किया जा सके. 

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2020 ओलंपिक है लक्ष्य
टाटा स्टील के ‘स्पोर्ट्स एक्सीलेंस सेंटर’ के प्रमुख मुकुल चौधरी ने से कहा, ‘‘हमारा लक्ष्य ओलंपिक 2020 में पदक हासिल करना है. अभी ओलंपिक खेलों में हमारा ध्यान तीरंदाजी पर टिका है जिसमें हमारे अधिकतर खिलाड़ी देश का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं. हमें तोक्यो में ओलंपिक पदक की उम्मीद है और आने वाले वर्षों में हम अन्य खेलों भी सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी तैयार करने पर ध्यान दे रहे हैं.’’ 

तीरंदाजी की गढ़ है जमशेदपुर
जमशेदपुर का तीरंदाजी का गढ़ कहा जाता है. वर्ष 1996 में टाटा तीरंदाजी अकादमी की स्थापना की गयी जिसने देश को दीपिका कुमारी, बोम्बायला देवी लैशराम, अतनु दास जैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर के तीरंदाज दिये. इन सभी को ओलंपिक पदक का प्रबल दावेदार माना जा रहा है. एथलेटिक्स ऐसा खेल है जिसमें भारत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाया है और टाटा स्टील अब इस कमी को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है. यहां 1996 में एथलेटिक्स ट्रेनिंग सेंटर की स्थापना की गयी थी जिसको नया स्वरूप दिया जा रहा है. 

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एथलेटिक्स के लिए नई योजना
एथलेटिक्स ट्रेनिंग सेंटर के मुख्य कोच और अर्जुन पुरस्कार विजेता एथलीट बगीचा सिंह ने कहा, ‘‘हमने एथलेटिक्स के लिए नई योजनाएं बनायी हैं. यहां (झारखंड) के जनजातीय क्षेत्रों के युवा प्रतिभाशाली है जो एथलेटिक्स में बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं. हमारा लक्ष्य उन्हें निखारकर अंतरराष्ट्रीय स्तर का एथलीट बनाना है. निश्चित तौर पर ओलंपिक पदक हमारा लक्ष्य होगा.’’ 

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हॉकी में ओडिशा-पंजाब को चुनौती
ओडिशा और पंजाब को अभी तक हॉकी का गढ़ माना जाता रहा है लेकिन नवल टाटा हॉकी अकादमी भी देश को चोटी के खिलाड़ी देने के लिए कमर कस रही है. नीदरलैंड के पूर्व पेनल्टी कार्नर विशेषज्ञ फ्लोरिस यान बोवलैंडर और वीजे वार्नर की देखरेख में अकादमी नया स्वरूप ले रही है. उसके पास अपना स्टेडियम है जिसके बगल में खिलाड़ियों के लिए आवासीय परिसर भी तैयार किया जा रहा है. यह अकादमी हॉकी इंडिया से मान्यता प्राप्त है. अकादमी के प्रमुख गौतम मुखर्जी को विश्वास है कि 2021 के बाद उनकी अकादमी के खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी छाप छोड़ना शुरू कर देंगे. 

वैज्ञानिक तरीके से मिल रहा है प्रशिक्षण
मुखर्जी ने कहा, ‘‘अभी हम 27 लड़कों को प्रशिक्षण दे रहे हैं लेकिन 2021 तक अकादमी में 104 युवा खिलाड़ी होंगे. इनमें 54 लड़के और इतनी लड़कियां होंगी. अभी हमारे छह खिलाड़ी सब जूनियर वर्ग में झारखंड का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं. इस टीम ने राष्ट्रीय चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता था.’’ उन्होंने कहा, ‘‘हम खिलाड़ियों को वैज्ञानिक तरीके से प्रशिक्षण दे रहे हैं. अभी हमारे पास एक मुख्य मैदान (एस्ट्रोटर्फ) है जिसकी बगल में एक और मैदान पर एस्ट्रोटर्फ बिछायी जाएगी. इसके अलावा हम देश के अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को भी कोच के रूप में जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं. (पूर्व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी) वी रघुनाथ साल में 45 दिन के लिए अपनी सेवाएं देने के लिए तैयार हैं.’’ 

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इसके अलावा यहां बैडमिंटन, बास्केटबाल, मुक्केबाजी, शतरंज, क्रिकेट, फुटबाल, गोल्फ, हैंडबाल, कबड्डी, कराटे, स्केटिंग, तैराकी, टेबल टेनिस, टेनिस और वॉलीबाल की एकेडमी भी संचालित की जा रही हैं. 
(इनपुट भाषा)