योग दिवस News

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Jun 21,2022, 10:22 AM IST
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ओम सृष्टि का एकमात्र ऐसा स्वर है जिसके उच्चारण में प्राण वायु शरीर के भीतर जाती है, जबकि शेष सभी उच्चारणों में प्राण वायु बाहर आती है। यानी ओम के उच्चारण से हम अधिकतम प्राण वायु अर्थात ऊर्जा ग्रहण करते हैं। इसके स्पष्ट उच्चारण से जो स्पंदन पैदा होता है वह हमारी संपूर्ण शारीरिक रचना को प्रभावित करता है। इसके सही उच्चारण से पंचमहाभूत पृथ्वी, आकाश, जल, वायु और अग्नि का शरीर में संतुलन बना रहता है। शरीर में इन तत्वों के असंतुलन से ही बीमारियां और विकार उत्पन्न होते हैं। आधुनिक चिकित्सा विज्ञानियों का मानना है कि मेटाबोलिक डिसऑर्डर यानी चयापचय असंतुलन के कारण ही शारीरिक व्याधियां पनपती हैं। इसलिए ओम के जाप को नकारने के बजाय जरूरत तो यह है कि भारतीय ज्ञान परंपरा के इस अनूठे अक्षर को और गहराई से परखा जाए
Jun 21,2020, 15:48 PM IST
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Jun 19,2019, 18:00 PM IST
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