Colonel Muammar Gaddafi: 'हूरों' के साथ गुलछर्रे उड़ाता था ये रंगीन मिजाज कर्नल! वो तानाशाह जिसकी मौत पर देशभर में मना था जश्न
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Colonel Muammar Gaddafi: 'हूरों' के साथ गुलछर्रे उड़ाता था ये रंगीन मिजाज कर्नल! वो तानाशाह जिसकी मौत पर देशभर में मना था जश्न

DictatorColonel Muammar Gaddafi: ‘जब ब्रिटिश महारानी 50 और थाइलैंड के राजा 68 सालों तक राज सकते हैं तो मैं क्यों नहीं कर सकता?'... ये शब्द थे लीबिया के उस तानाशाह गद्दाफी के थे, जो खुद को राष्ट्राध्यक्ष के बजाए कर्नल कहलाना पसंद करता था. इस रंगीन मिजाज तानाशाह ने बादशाहों की तरह अपने महलों में हरम बनवा रखा था.

Colonel Muammar Gaddafi: 'हूरों' के साथ गुलछर्रे उड़ाता था ये रंगीन मिजाज कर्नल! वो तानाशाह जिसकी मौत पर देशभर में मना था जश्न

Libya, Colonel Muammar Gaddafi: दुनिया में एक से बढ़कर एक सनकी तानाशाह हुए हैं. लेकिन उनमें से एक कुछ ऐसे थे जिन्हें अपने देश की जनता का लहू चूसने के साथ दूसरे देशों में खून की होली खेलने में मजा आता था. मानवता के दुश्मन और अंतरराष्ट्रीय कानून पर भरोषा न करने वालों की सूची में बात लीबिया के लड़ाका तानाशाह की जिसने पश्चिमी देशों की नाक में ऐसा दम किया कि उसके खात्मे के लिए नाटो की फौज को उतारना पड़ा. गद्दाफी बेहद रंगीन मिजाज शख्स था. उसकी सबसे करीबी सुरक्षा घेरे में खूबसूरत लेकिन बेहद खतरनाक लेडी किलर्स का दस्ता तैनात रहता था. इस डिक्टेटर ने अपनी सुरक्षा में विदेशी गॉर्ड्स  लगाए थे, क्योंकि उसे अपनों पर भरोसा नहीं था.

तानाशाह बनने की कहानी

7 जून 1942 को लीबिया के सिर्ते शहर में जन्मा गद्दाफी अरब राष्ट्रवाद से प्रभावित था. बेनगाजी के मिलिट्री कॉलेज से पढ़ाई पूरी करने के बाद उसने लीबिया की फौज में कई बड़े पदों पर काम किया. इस दौरान उसका तत्कालीन शासक इदरीस से 36 का आंकड़ा रहा. कुछ समय बाद उसने सेना छोड़ कर सरकार के विरोधी गुट के साथ काम करना शुरू कर दिया. गद्दाफी ने विरोधी गुट के साथ तख्तापलट प्लान बनाया. उसने वो समय चुना जब राजा इदरीस तुर्की में इलाज करा रहे थे. उसने 1 सितंबर 1969 को विद्रोहियों के साथ मिलकर इदरीस की सत्ता पर कब्जा करते हुए देश के सेना प्रमुख की शपथ ली और लीबिया की मदद से उस क्षेत्र बनाए गए अमेरिकी और ब्रिटिश सैन्य ठिकानों को बंद कर दिया. यहीं से वो पश्चिमी देशों की आंख में चुभ गया.

रॉबिनहुड जैसी छवि-लीबिया का हीरो था गद्दाफ़ी

गद्दाफी एक खूबसूरत और करिश्माई फौजी अधिकारी था, उसकी तेल खनन नीति के लिए उसे किसी तेज दिमाग नेता के तौर पर देखा जा रहा था. 1970 के दशक में अरब देशों में तेल की कीमतों से आई बहार के बाद शुरू हुई खुशहाली के दौर का नायक था गद्दाफी. शुरूआत में उसने अच्छे काम किए और और देश का नायक बन गया. पहले लीबियाई लोगों के लिए कल्याणकारी योजनाएं चलाईं. तेल के प्रॉफिट से उनकी खुशहाली का रास्ता बनाया. लोग उसे अपना रहनुमा मानने लगे थे. लेकिन ताकत और ओहदे का नशा उस पर ऐसा चढ़ा कि अपने नफरती फैसलों से तानाशाह और खलनायक बन गया.

गद्दाफ़ी के हरम में थीं सैकड़ों खूबसूरत लड़कियां

गद्दाफी ने अपनी दौलत का एक बड़ा हिस्सा अपनी अय्याशी पर भी खर्च कर दिया, अपने हरम में मौजूद लड़कियां और सुरक्षा में तैनात महिला बॉडीगार्ड पर वो दौलत पानी की तरह बहाता था. साथ ही उसने अपनी दूसरी बीवी साफिया फर्काश को तोहफे में बुराक एयर नाम की एयरलाइंस कंपनी खरीद कर दी थी. माना जाता है कि गद्दाफी की इस बीवी के पास एक टन सोना था. लीबिया में विद्रोह भड़कने के बाद सफिया जर्मनी भाग गई थी.

लीबिया के इस तानाशाह ने बादशाह की तरह अपने महलों में हरम बनवा रखा था, जिसे उसने दूर दूर से लाई गई खूबसूरत लड़कियों से आबाद किया था. गद्दाफी ने अपनी अय्याशी कभी दुनिया से छुपाने की कोशिश नहीं की, लीबिया का ये तानाशाह अपने हरम के अलावा अपने इर्द गिर्द भी खूबसूरत लड़कियों से घिरा रहता था. 

लीबिया का ये तानाशाह अपनी अय्याशी के लिए तब सुर्खियों में आया, जब 2009 में इटली में दी एक पार्टी के लिए गद्दाफी ने 200 खूबसूरत लड़कियों को एक शाम के लिए हायर किया, गद्दाफी को इतालवी लड़कियां बेहद पसंद थी. उसके पास इटली की लड़कियों का घेरा रहता था. गद्दाफी इटली से खूबसूरत लड़कियों को गैरकानूनी तौर पर लीबिया बुलवाता था.

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