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नीदरलैंड्स: समुद्रतल से नीचे है देश का एक चौथाई हिस्सा, लेकिन बहुत ऊंची है लोगों की सोच

नीदरलैं को दुनिया का पहला पूंजीवादी देश माना जाता है. 

नीदरलैंड्स: समुद्रतल से नीचे है देश का एक चौथाई हिस्सा, लेकिन बहुत ऊंची है लोगों की सोच
नीदरलैंड के लोग पर्यावरण के प्रति बहुत जागरुक हैं. (फोटो: Reuters)

नई दिल्ली: यूरोपीय देश अपनी सम्पन्नता के लिए जाने जाते हैं. इस महाद्वीप का इतिहास बताता है कि कैसे विपरीत भौगोलिक परिस्थितियों के बाद भी यहां के लोगों ने अपनी चतुराई और जीवटता से प्राकृतिक संसाधनों का दोहन किया और आधुनिक शिक्षा के दम पर न केवल दुनिया भर में लंबे समय तक राज किया बल्कि खुद को समृद्धशाली बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी. इन्हीं में से एक देश है उत्तरी पश्चिम यूरोप का नीदरलैंड्स जिसे हॉलैंड भी कहा जाता है. वास्तव में हॉलैंड नीदरलैंड्स के 12 प्रांतों में से केवल 2 प्रांतों को कहा जाता है, लेकिन 16वीं से 18वीं सदी में हॉलैंड नाम दुनिया में फैला जबकि उससे पहले यहां के लोगों को डच कहा जाता था. इतिहास में भी डच नाम बहुत ज्यादा प्रचलित रहा है. जो कि यहां की भाषा और यहां के लोगों दोनों को कहा जाता है. 

क्यों चर्चा में आ गया नीदरलैंड्स
18 मार्च को ही नीदरलैंड में के उत्रेक्थ शहर में ट्राम में गोलीबारी की घटना हुई जिसमें तीन लोगों की मौत और 9 लोग घायल हो गए. शुरुआती जांच के आधार पर यह आतंकवादी घटना होने का संदेह है. यह हमला ऐसे समय पर हुआ जब पूरी दुनिया न्यूजीलैंड जैसे शांत देश में आतंकी हमले में मारे गए लोगों के लिए शोक व्यक्त कर रही थी. न्यूजीलैंड के क्राइस्टचर्च की दो मस्जिद में हमलावरों ने गोलीबारी कर 50 लोगों को मार दिया. इसकी दुनिया के सभी देशों ने एक सुर में भर्त्सना की है. 

​​​terrorist attack in Utrecht of Netherlands​​​

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दरअसल ऐसा नहीं है कि नीदरलैंड आतंकवाद के प्रभाव से पूरी तरह से मुक्त देश है. यहां पहले भी आतंकी साजिशों को अंजाम देने की कोशिश में लोग हिरासत में लिए जा चुके हैं. पिछले साल दिसंबर में ही नीदरलैंड में आतंकी हमले की साजिश करने के आरोप में जर्मन पुलिस ने कुछ लोगों को गिरफ्तार किया था. वैसे तो नीदरलैंड बी एक शांत देश है लेकिन दुनिया में अशांति फैलाने वाले आतंकी यहां भी अपनी नापाक वारदतों को अंजाम देकर दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचना चाहते हैं. 

वर्तमान नीदरलैंड
विभिन्न राजनैतिक उतार चढ़ावों से भरपूर रहा नीदरलैंड में एक संवैधानिक, लोकतांत्रिक राजशाही है. 16वीं सदी से ही यहां गणतंत्र स्थापित हो गया था. सबसे पहले समुद्री व्यापार डचों ने ही शुरू किया था. यह यूरोपीय संघ का प्रमुख देश है जो 2005 में संघ में शामिल हुआ था. यहां की जनसंख्या 1 करोड़ 70 लाख है. देश का सबसे बड़ा शहर एम्सटर्डम यहां की राजधानी है जबकि हेग शहर में सरकारी काम होता है. डच यहां की राजकीय भाषा है. जबकि अंग्रेजी, पैपियामेंटो, वेस्ट फरीसियन क्षेत्रीय भाषाएं हैं. ईसाई धर्म प्रमुख है जबकि यूरो यहां की मुद्रा है. 2013 से यहां किंग विलियम एलेक्जेंडर ने अपनी मां बेट्रिक्स के 33 साल बाद गद्दी छोड़ने के बाद शाही सत्ता संभाली है. इन दिनों प्रधानमंत्री मार्क रूटे ने 2017 से देश की बागडोर चार पार्टी के गठबंधन की मदद से संभाली है. रूटे इससे पहले 2010 से देश के प्रधानमंत्री रहे हैं. विभिन्न समुदायों का देश होते हुए नीदरलैंड के नागरिक काफी जागरुक हैं. 

समुद्र से हासिल की है यहां लोगों ने जमीन
नीदरलैंड्स का मतलब ही निम्न भूमि का इलाका है. पश्चिम यूरोप के इस देश के उत्तर और पश्चिम में उत्तरी सागर, दक्षिण में बेल्जियम, पूर्वी में जर्मनी की सीमा लगती है. फ्रांस और यूनाइटेड किंगडम से यह समुद्री सीमाएं बांटता है. यूरोप की चार प्रमुख नदियों, राइन, मास, वाल, और शेल्ड नदी के डेल्टा का इलाका निम्न भूमि है. वहीं दक्षिण पूर्व क्षेत्र उच्च भूमि है जो समुद्र तल से ऊंचा है. देश का सबसे ऊंचा क्षेत्र दक्षिण पूर्व में जर्मनी और बेल्जियम की सीमारेखा से लगा इलाका है. देश का 41,864 वर्ग किलोमीटर (16,164 वर्ग मील) में से चौथाई से भी अधिक क्षेत्र समुद्र सीमा से नीचे हैं इसमें से बहुत सा इलाका तो समुद्र तल से 1 मीटर नीचे तक है.

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नीदरलैंड के लिए आसान नहीं था समुद्र से जमीन हासिल करना 

करीब दो हजार साल पहले से ही नीदरलैंड के वासियों ने निम्न नम क्षेत्रों ने जमीन हासिल करने का सिलसिला शुरू कर दिया था. पहले उन्होंने बाढ़ से बचने के लिए उन्होंने जमीन से उठे हुए गांव बनाए जो आज भी मौजूद हैं. इसके बाद उन्होंने आसपास की जमीन पर तटबंध बनाए. यह व्यवस्था 13वीं सदी में असफल हो गई जिससे पूरे देश को बाढ़ का सामना करना पड़ा. इसके बाद तटबंध बनाने के साथ ही नहरें बनाई गईं और पंपों का पानी निकालने के लिए उपयोग किया गया. पानी निकालने के लिए पहले पवनचक्की का उपयोग किया गया जो देश की पहचान बन गए. 

बाढ़ नहीं तोड़ सकी लोगों के इरादे
1916 में जोयडरजी में आई बाढ़ के बाद यहां बड़ी परियोजना लागू की गई जिसके बाद 1932 तक अंततः जुइदिर्जी की खाड़ी को 30 किलोमीटर लंबे तटबंध की मदद से एक मीठे पानी के तालाब में बदल दिया गया. 1953 में एक बार फिर एक बड़ी बाढ़ ने नीदरलैंड के डेढ़ हजार से ज्यादा लोगों की जान ले ली और 70 हजार से ज्यादा लोग विस्थापित हो गए. इस घटना के बाद से नीदरलैंड में पुनर्निर्माण का एक नया दौर शुरू हुआ और तटबंध में सुधार और समुद्र किनारे बांध भी बनाए गए. इसके साथ ही इसेल्मर इलाके में भी जमीन को उपयोगी बनाया गया जिससे फ्लीवोलैंड नाम का नया प्रांत बना जो कि सदियों से समुद्र में डूबा था. 

सक्षिप्त इतिहास: आसपास से आकर बसते रहे यहां लोग
प्रागऐतिहासिक काल में यहां हमेशा ही आधुनिक मानव के रहने के प्रमाण मिले हैं. 9वीं ईसा पूर्व से तीसरी सदी ईसापूर्व तक जलवायु परिवर्तन के कारण उत्तर से लोगों पलायान कर इस क्षेत्र में प्रवेश किया जिससे यहां अनेक भाषा बोलने वाली संस्कृतियां पनपीं. इस क्षेत्र में अस्तित्व के लोगों को पानी से ज्यादा संघर्ष करना पड़ा. पहली सदी ईसापूर्व में यहां रोमन साम्राज्य का प्रभुत्व आया, लेकिन उत्तरी फिरीसी उसके प्रभाव से मुक्त ही रहा. 5वीं सदी में रोमान साम्राज्य के कमजोर होने के बाद पूरे क्षेत्र में फिरीसियन सम्राज्य का कब्जा हो गया. इस दौरान (6 सदी से लेकर 7वीं सदी) यूरोप के इस भाग में फ्रेंच, इंग्लैंड और डच का भाषाई बंटावारा हुआ. 7वीं सदी में यह साम्राज्य अपने चरम पर था जिसका केंद्र उत्रेक्थ शहर था. 12वीं सदी के पहले तक फिरीसियन क्षेत्र छोटे राज्य में बंटा रहा. यहीं से इस क्षेत्र में कृषि का विकास हुआ. 

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स्वर्णिम डच युग
14वीं सदी में काउंटी ऑफ हॉलैंड सत्ता का केंद्र बन गया. 15वीं सदी तक एम्सटर्डम के प्रमुख व्यापार केंद्र बन गया. 16वीं सदी के उत्तरार्ध में हॉलैंड सहित सात डच भाषी प्रांतों ने मिल कर एक संघ की स्थापना की जिसका केंद्र हेग शहर था. इस संघ में सभी प्रांतों का अपना स्वतंत्र शासन था. 17वीं सदी डच गणराज्य का स्वर्णिम युग था. इस दौरान डचों ने हर क्षेत्र में विकास किया और दुनिया में भी कई जगह उपनिवेश बनाए. 

डच गणराज्य को दुनिया का पहला पूंजीवादी देश कहा जाता है. एस्ट्रडम उस समय सबसे सम्पन्न व्यापारिक क्षेत्र था. 19वीं सदी के आरम्भ में डच गणराज्य में राजशाही आई और युद्ध में उलझने के कारण यह देश दिवालिया होने की कगार तक आ गया, लेकिन उपनिवेश डच ईस्ट इंडिया (आज का इंडोनेशिया) से मिली मदद के दम पर और कृषि सुधारों के कारण डचों ने अपनी सम्पन्नता फिर से हासिल कर ली. डच गणराज्य में सबसे देर से औद्योगिकरण हुआ और यूरोप में सबसे आखिर में दासता का अंत यहीं हुआ. 

प्रकृति से जूझकर जानी है पर्यावरण की कीमत
19वीं सदी में वैसे तो डच तटस्थ रहे लेकिन उन्होंने जर्मनी की मदद की. दूसरे विश्वयुद्ध में जर्मनी ने नीदरलैंड पर कब्जा कर लिया. जो इस युद्ध के अंत से मुक्त हो सका. 1949 में इंडोनेशिया आजाद हो गया. इसी साल नीदरलैंड ने नाटो की सदस्यता ले ली. आज नीदरलैंडएक प्रमुख औद्योगिक आधुनिक विचारों वाला जागरुक देश है. 
नीदरलैंड के लोग ने प्रकृति से लड़कर पर्यावरण के महत्व को समझा है. वे ग्लोबल वार्मिक के नुकसान से परिचित हैं और भली भांति जानते हैं कि वे खुद कितने खतरे हैं. यहां की सरकार लोगों को साइकिल से ऑफिस जाने के लिए प्रोत्साहन के दौर पर पैसे देती है. कहा जाता है कि यहां आबादी से ज्यादा साइकिलें हैं. 

इच्छामृत्यु
दुनिया में यह बहस आज भी चल रही है कि क्या किसी व्यक्ति को, जो कि गंभीर लाइलाज बीमारी से पीड़ित है, इस बात की इजाजत दी जाए कि वह अपनी पीड़ाओं से मुक्ति पाने के लिए अपने जीवन का अंत करने का चुनाव कर सके. इसे अंग्रेजी में यूथेनेसिया यानि कि इच्छामृत्यु कहते हैं. इसकी कानूनी इजाजत के लिए यूरोप के देशों ने पहल की और नीदरलैंड ने 2001 में इसे कानूनी तौर पर अपनाया. नीदरलैंड के साथ बेल्जियम, कनाडा न्यूजीलैंड जैसे देशों में भी इच्छामृत्यु को कानूनी मान्यता है.