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न्यूजीलैंड: दक्षिण प्रशांत का देश, जहां मस्जिद पर आतंकी हमले ने किया दुनिया को हैरान

न्यूजीलैंड जैसे शांत और दूरस्थ देश में आतंकी हमले ने दुनिया भर को चौंका दिया है.

न्यूजीलैंड: दक्षिण प्रशांत का देश, जहां मस्जिद पर आतंकी हमले ने किया दुनिया को हैरान
न्यूजीलैंड में पहली बार इतना बड़ा आतंकी हमला हुआ है. (फोटो: Reuters)

नई दिल्ली: न्यूजीलैंड प्रशांत महासागर के दक्षिण में एक ऐसा देश है जो भारत से 11,965 किमी दूर है. इस देश का अंतरराष्ट्रीय राजनीति में कोई गहरा दखल भी नहीं है, इसके बाद भी भारत के लगभग सभी लोग इस देश को जानते हैं, तो इसकी वजह क्रिकेट है. न्यूजीलैंड क्रिकेट टीम आज दुनिया की शीर्ष पांच टीमों में से एक मानी जाती है. न्यूजीलैंड क्रिकेट के अलावा यहां की बेहतरीन प्राकृतिक खूबसूरती ने दुनिया भर को, खासकर हॉलीवुड फिल्म निर्मातओं का आकर्षण केंद्र है. एक खास देश है. 15 मार्च को यहां के एक प्रमुख शहर क्राइस्टचर्च में शुक्रवार की नमाज के दौरान एक व्यक्ति ने गोलीबारी कर कई लोगों की हत्या कर दी. न्यूजीलैंड जैसे देश में मुस्लिमों पर हमले की घटना ने दुनिया भर के लोगों को हैरान कर दिया है कि आखिर यहां ऐसा क्यों हुआ. 

न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री जेसिंदा आर्डर्न ने इस घटना के चलते इस दिन को देश के इतिहास का सबसे काला दिन बताया. पीड़ितों सहित स्थानीय नागरिक तक इस हमले से हैरान है.  लोगों का ताज्जुब इस बात पर ज्यादा थी कि जब यहां वे अपनी धार्मिक गतिविधि को खुद काफी सीमित रखते हैं ऐसे में इस तरह के हमले का क्या औचित्य था. शाम तक 49 लोगों की मारे जाने और 20 लोगों के घायल होने की पुष्टि की गई थी जबकि दो वाहनों से विस्फोटक भी बरामद किए गए जिन्हें पुलिस के मुताबिक निष्क्रिय कर दिया गया था. इसकी वजह से क्राइस्टचर्च में 16 मार्च को शुरू होने वाला न्यूजीलैंड और बांग्लादेश के बीच टेस्ट मैच रद्द कर दिया गया. पूरे शहर की घेराबंदी कर दी गई. 

आतंकी हमला ही है यह
जहां प्रधानमंत्री आर्डर्न ने इसे एक जाहिर आतंकी घटना बताया है. बताया गया कि संदिग्ध हमलावर के पास एक घोषणापत्र था जिसमें उनके इरादे लिखे थे जिसमें उसने खुद को 28 साल का चरम दक्षिणपंथी और आव्रजन विरोधी विचारधारा का ऑस्ट्रेलियाई नागरिक बताया था. वहीं ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री स्कॉट मैरिसन ने भी पुष्टि करते हुए कहा है कि हमलावर ऑस्ट्रेलियाई नागरिक एक चरमपंथी और अति दक्षिणपंथी आतंकी है. 

दुनिया के एक कोने में शांत देश है न्यूजीलैंड
न्यूजीलैंड ऑस्ट्रेलिया महाद्वीप के पूर्व में और प्रशांत महासागर के दक्षिण में स्थित न्यूजीलैंड ऐसा देश है जहां सबसे आखिरी में यहां लोग आकर बसे.  270,467 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र के कई द्वीपों से बने न्यूजीलैंड में दो बड़े प्रमुख द्वीप (उत्तरी और दक्षिणी द्वीप) हैं. इन द्वीपों के पूर्व में ऑस्ट्रेलिया का तस्मानिया सागर है और बाकी सब जगह से प्रशांत महासागर से घिरा है. यहां की जैवविविधता में दुनिया की बहुत सी विलुप्तप्राय प्रजातियां पाई जाती है जिनके संरक्षण में दुनियाभर के पर्वावरणविदों के साथ ही पर्यटकों को भी अपनी ओर खींचती है. उत्तरी द्वीप में यहां की 40 लाख की जनसंख्या में से 30 लाख लोग रहते हैं जबकि उससे बड़े दक्षिणी द्वीप में 10 लाख लोग रहते हैं. राजधानी वेलिंगटन उत्तरी द्वीप में स्थित है, लेकिन इसके उत्तरी सिरे में सबसे बड़ा शहर ऑकलैंड है. यहां 95 % लोग अंग्रेजी बोलते हैं इसके अलावा माओरी यहां के मूल निवासियों की भाषा है.

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इतिहास छोटा, लेकिन वर्तमान से नहीं है अछूता
न्यूजीलैंड में 13वीं सदी से पहले के मानव अवशेषों के प्रमाण नहीं मिले हैं. .यहां पहली बसाहट पोलिनेसियन लोगों, जो कि प्रशांत महासागर द्वीपों (ओसियाना) के मूल निवासी थे, ने 13वीं सदी में की थी. सैकड़ों सालों तक यहां लोगों ने धीरे-धीरे माओरी जनजाति ने अपनी संस्कृति विकसित की. यहां 17वीं सदी में डच (नीदरलैंड) के लोगों ने सबसे पहले यहां कदम रखे, लेकिन 1769 में कैप्टन कुक के आने के बाद से यहां यूरोपीय लोगों की आवाजाही सही मायनों में बढ़ी. शुरुआत में यहां आने वाले लोगों ने माओरियों से व्यापार ही किया और यहां के यात्री ही बने रहे लेकिन जल्द ही यहां यूरोपियनों (खासकर ब्रिटिशों) और माओरियों का संघर्ष शुरू हो गया. 19वीं सदी के पूर्वार्ध में करीब 40 हजार माओरियों मारे गए. 1840 तक ऑस्ट्रेलिया के न्यू साउथ वेल्स के अधीन रहने के बाद न्यूजीलैंड एक स्वतंत्र ब्रिटेन उपनिवेश बन को गया लेकिन माओरी मूल निवासियों से ब्रिटिश संघर्ष जारी ही रहा, जबकि 1852 में सरकार और 1854 तक संसद की पहली बैठक हो चुकी थी. 

ब्रिटेन की तरह है शासन व्यवस्था
1893 में यहां महिलाओं का मताधिकार मिला जिससे न्यूजीलैंड ऐसा करने वाला पहला देश बन गया. 1947 के बाद न्यूजीलैंड में ब्रिटेन की संसद का प्रभाव तो खत्म हो गया, लेकिन न्यूजीलैंड में संवैधानिक राजशाही का शासन हो गया जिसकी प्रमुख ब्रिटेन की महारानी ही रहीं जिनके पास वैसे ही अधिकार थे जैसे इंग्लैंड में. न्यूजीलैंड का कोई लिखित संविधान नहीं है. इंग्लैंड की ही तरह न्यूजीलैंड में सबसे शक्तिशाली यहां की संसद है जिसका प्रमुख प्रधानमंत्री है. यहां महारानी का प्रतिनिधित्व गवर्नर जनरल करता है जिसे प्रधानमंत्री की सलाह पर महारानी नियुक्त करती हैं. यहां की संसदीय प्रणाली भारत और ब्रिटेन की ही तरह काम करती है. 

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यहां का लोकतंत्र है मिसाल
न्यूजीलैंड दुनिया का सबसे मजबूत राजनैतिक स्थिरता वाला देश माना जाता है. यहां की जनभागीदारी और लोकतांत्रिक संस्थाएं विश्वस्तरीय मानी जाती है. हालांकि यहां माओरी समुदाय के लोगों को सामाजिक मान्यता को लेकर कई बार चिंताएं जताई जाती हैं, शहरी वातावरण में माओरी समुदाय के मिलने की खबरें भी बढ़ रही हैं. न्यूजीलैंड में करीब 30% लोग धर्म को नहीं मानते. यहां ज्यादातर ईसाई धर्म के लोग हैं लगभग 20% लोग माओरी हैं, इनमें से जो लोग ईसाई हैं वे पूरी जनसंख्या के 1.6% लोग हैं. यहां बहुत ही कम मात्रा में हिंदु, बौद्ध और इस्लाम को मानने वाले लोग है. यहां सभी को अपने धर्म को मानने की पूरी स्वतंत्रता है. 

आर्थिक उन्नति ने बनाया विकसित देश
न्यूजीलैंड ने द्वितीय विश्व युद्ध के बाद आधुनिक बाजार अर्थव्यवस्था के दम पर तेजी से आर्थिक विकास किया है. यहां की करेंसी न्यूजीलैंड डॉलर है जिसे कीवी डॉलर है. यहां की भूतापीय ऊर्जा देश की 22 % ऊर्जा की आपूर्ति करती है. इसके अलावा हाइड्रोइलेक्ट्रिक स्रोत भी काफी मात्रा में हैं जो करीब 18% योगदान देते हैं. यहां की अर्थ्व्यवस्था अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर ज्यादा निर्भर है जिसमें कृषि उत्पाद जैसे फल सब्जी, गेंहू, डेयरी उत्पाद शामिल हैं. वहीं पर्यटन, बैंकिंग और बीमा, कपड़ा, उत्खनन जैसे उद्योग देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं.

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भारत और न्यूजीलैंड संबंध
न्यूजीलैंड में डेढ़ लाख से ज्यादा भारतीय मूल के लोग रहते हैं. यहां 20 हजार से ज्यादा भारतीय छात्र उच्च शिक्षा हासिल कर रहे हैं. दोनों देशों की सेनाओं ने कोसोवो और सूडान में संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों में सयुंक्त भागीदारी की है. दोनों देश कॉमनवेल्थ समूह का हिस्सा होने पर काफी कुछ साझा करते हैं. इसके अलावा देश एक दूसरे के आर्थिक हितों में ध्यान रखते हुए व्यापार व्यवसाय बढ़ने के लिए परस्पर सहयोग कर रहे हैं. क्रिकेट की वजह से काफी दोनों देशों के बीच काफी सांस्कृतिक आदान प्रदान होता है.