सऊदी अरब: ‘एमबीएस’ ने बदल कर रख दी है इस देश की तस्वीर
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सऊदी अरब: ‘एमबीएस’ ने बदल कर रख दी है इस देश की तस्वीर

प्रमुख तेल उत्पादक देश होने के नाते सऊदी अरब दुनिया भर की राजनीति को प्रभावित करता है. 

 मोहम्मद बिन सलमान ने दुनियाभर में अपनी और देश की साख तेजी से बढ़ाई है.  (फोटो: Reuters)

नई दिल्ली: सऊदी अरब मध्य एशिया का एक अहम देश है. इस देश का मध्य एशिया के इतिहास और वर्तमान राजनीति में खासा दखल और प्रभाव रहा है. यही वजह है कि जब भी अमेरिका जैसा देश इस क्षेत्र में अपना प्रभुत्व बढ़ाने की कोशिश करता है, तब वह सऊदी अरब पर विशेष ध्यान देता है और उसकी मध्य एशिया की नीति उसी मुताबिक निर्धारित होती हैं. सऊदी अरब आज दुनिया का सबसे बड़े कच्चे तेल का उत्पादक देशों में से एक है. ओपेक देशों के समूह में यह सबसे ज्यादा प्राकृतिक तेल का उत्पादन करने वाला देश है. इसके अलावा इस्लाम का उदय भी इसी देश में हुआ था. और दुनिया भर के इस्लाम मानने वाले लोगों के प्रमुख तीर्थ स्थल, मक्का और मदीना इसी देश में हैं. 

  1. बदली रही है साउदी अरब की तस्वीर
  2. मध्य-पूर्व का सबसे बड़ा प्राकृतिक तेल उत्पादक
  3. ओपेक देशों में भी सबसे ज्यादा तेल उत्पादन

भौगोलिक स्थिति
सऊदी अरब उत्तरी और मध्य अरब प्रायद्वीप में स्थित देश है. यह पश्चिम में लाल सागर, उत्तर में जोर्डन और इराक, दक्षिण में यमन और ओमान, पूर्व में यूएई, कतर, कुवैत और पारस की खाड़ी से घिरा है. देश का पश्चिमी और मध्य क्षेत्र में नजद क्षेत्र कहा जाता है जिसका अर्थ उच्च भूमि है जहां इस्लाम फला फूला. इस सूखे और बंजर क्षेत्र में कबीलाई संस्कृति हावी रही. इस देश के पूर्व क्षेत्र में अकूत प्राकृतिक तेल के भंडार मौजूद है, जिन्होंने 1960 के बाद देश को संपन्न बनाने में अहम भूमिका अदा की. 

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इस्लामिक धर्मतंत्र है सऊदी अरब में
इस समय सऊदी अरब की जनसंख्या 3 करोड़ बीस लाख है यहां का क्षेत्रफल 22.4 लाख वर्ग किलोमीटर (864,869 वर्ग मील) है. यहां की मुद्रा रियाल है. देश की राजधानी रियाद है. प्रमुख भाषा अरबी है और इस देश के अधिकतर लोग इस्लाम को मानने वाले हैं जिनमें ज्यादातर सुन्नी मुसलमान हैं. यहां का धर्म वहाबी इस्लाम है जो सुन्नी इस्लाम का कट्टर स्वरूप है. 85-95 प्रतिशत लोग सुन्नी संप्रदाय को मानने वाले हैं. जबकि 10-15 प्रतिशत लोग शिया संप्रदाय को मानने वाले हैं. इस देश में राजतंत्र और इस्लामिक धर्मतंत्र है. यहां कोई राजनैतिक दल नहीं है और किसी भी तरह का चुनाव यहां नहीं होता है. पूरी शासन प्रणाली पर शाही परिवार का ही वर्चस्व है जहां शाह ही सरकार के प्रमुख हैं. 

प्राकृतिक तेल उत्पादन ने बनाया दुनिया का अहम देश
बड़ा तेल उत्पादक होने के कारण सऊदी अरब दुनिया के बाकी देशों के लिए भी काफी महत्वपूर्ण हो जाता है. कच्चे तेल का उत्पादन वैश्विक राजनीति को दिशा देने के प्रमुख कारकों में से एक है. ऐसे में सऊदी अरब में क्या हो रहा है, इस पर दुनिया भर के देशों की नजर होना स्वाभाविक है. इसके साथ ही सऊदी अरब भौगोलिक रूप से भले ही कई इस्लामिक देशों से घिरा हो, मध्य एशिया के बीच यह एक बड़ा देश है और पूरे क्षेत्र के देशों पर विशेष प्रभाव डालता है. यह ओपेक ( प्राकृतिक तेल उत्पादन करने वाले देशों का एक समूह) देशों में सबसे ज्यादा कच्चे तेल का उत्पादन करता है.

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वर्तमान परिदृश्य और भारत
अपनी प्राकृतिक तेल संपदा के चलते और मध्य पूर्व में प्रमुख भौगोलिक अहमियत को देखते हुए भारत की इस देश में खासी दिलचस्पी है. इसके अलावा इस क्षेत्र (मध्य एशिया) में कई अप्रवासी भारतीय यहां काम कर रहे हैं. यहां अपना रोजगार करते हुए ये भारतीय न केवल अपने देश में स्थित अपने परिवार को आर्थिक सहायता देते हैं, बल्कि अपने देश की अर्थव्यवस्था को भी ताकत प्रदान करते हैं. भारत में केरल की मजबूत अर्थव्यवस्था का एक बड़ा कारण मध्य पूर्व देशों में काम करने वाले भारतीय भी हैं. इस लिहाज से इस क्षेत्र के लिए भारत की विदेश नीति के ये अहम तत्व हैं. सऊदी अरब भारत के लिए एक अहम देश है, यह देश भारत का चौथा सबसे बड़ा आर्थिक भागीदार है. भारत का 20 प्रतिशत कच्चा तेल सऊदी अरब से ही आता है. 

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संक्षिप्त इतिहास
सऊदी अरब सुन्नी संप्रदाय बहुल देश है, जो कड़े कानूनों और महिलाओं के सीमित अधिकारों के लिए चर्चित रहा है. इसके अलावा यहां के शेखों की अमीर लाइफ स्टाइल को लेकर भी काफी कहानियां दुनिया भर में चर्चा में रहती हैं. सऊदी अरब में अभी अल साउद वंश का शासन चल रहा है. सन 1932 में शाह अब्द अल अजीज ने इस वंश की स्थापना की थी जिसके बाद से उनके वंशज सऊदी अरब पर शासन कर रहे हैं. इस समय शाह सलमान बिन अब्दुलाजीज अल साउद देश गद्दी पर काबिज हैं. जिन्होंने अपने भाई शाह अब्दुल्ला के बाद जनवरी 2015 में गद्दी संभाली थी. शाह सलमान ने अपने पुत्र मोहम्मद बिन सलमान को अपना वारिस जून 2017 में घोषित किया है. 

कौन हैं मोहम्मद बिन सलमान या एमबीएस
मोहम्मद बिन सलमान अल असद, जो कि अंतरारष्ट्रीय जगत में ‘एमबीएस’ के नाम से भी जाने जाते हैं, का अरब राजनीति में गहरा प्रभाव और दखल है. 33 वर्षीय युवराज मोहम्मद बिन सलमान कई वर्षों से शासक वर्ग का हिस्सा रहे हैं. धीरे-धीरे मोहम्मद बिन सलमान का देश की राजनीति में और शासन में प्रभाव बढ़ता गया जिसमें उनका अमेरिका से सहयोग हासिल करने की उपलब्धि को उल्लेखनीय माना जाता है. युवराज सलमान का फिलहाल सरकार के प्रमुख विभागों पर, जिनमें रक्षा से लेकर आर्थिक विभाग शामिल है. इस समय वे अपने देश के उप प्रधानमंत्री हैं जबकि प्रधानमंत्री का पद अभी शाह के पास है. युवराज सलमान देश के रक्षा मंत्री के तौर पर भी दुनिया भर में जाने जाते हैं.

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इन दिनों क्यों चर्चा में हैं एमबीएस
युवराज सलमान पिछले साल तब सबसे ज्यादा चर्चा में आए जब सऊदी अरब मूल के पत्रकार जमाल खशोगी की तथा कथित हत्या हो गई. जमाल सऊदी सरकार के खिलाफ वॉशिंग्टन पोस्ट में पिछले कुछ समय से लेख लिख कर खासे चर्चा में थे. आखिरी बार वे 2 अक्टूबर 2018 में तुर्की स्थित सऊदी अरब के दूतावास में  प्रवेश करते देखे गए थे जिसके बाद उन्हें कभी नहीं देखा गया. तुर्की ने आरोप लगाया कि सऊदी अरब सरकार ने ही खशोगी को गायब करवा कर उन्हें मार दिया गया है.  आरोप यह लगाया गया कि चूंकि सऊदी अरब में युवराज किसी भी खिलाफत को सहन नहीं कर सकते, उसी की सजा जमाल खशोगी को दी गई. खशोगी का मामले को तुर्की ने गंभीरता से लिया, वहीं अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एमबीएस के साथ दिखाई दे रहे हैं. वहीं दूसरी तरफ यह भी बताया जा रहा है कि अमरीकी खुफिया एजेंसी सीआईए मान रही है कि खशोगी की हत्या एमबीएस के इशारे पर ही हुई थी.  

तमाम विराधों के बावजूद एमबीएस का वर्चस्व कायम
एमबीएस की सबसे बड़ी सफलता अब तक यही है कि वे ट्रम्प का विश्वास हासिल करने और उसे बनाए रखने में कामयाब रहे हैं. यही वजह है कि तमाम विरोधों चाहे वह उनके देश के अंदर हो या वैश्विक स्तर पर, वे अपना प्रभत्व कायम रखने में कामयाब रहे हैं. युवराज सलमान को अति रूढ़िवादी साम्राज्य की छवि तोड़ने का श्रेय दिया जाता है. उनके इन उल्लेखनीय फैसलों में महिलाओं को कार चलाने की इजाजत देना शामिल है. देश में विकास की रफ्तार को अलग गति देने के साथ-साथ युवराज सलमान ने दुनिया भर में सऊदी अरब की तस्वीर बदली है. 

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