पश्चिम एशिया में जारी जंग के बीच सऊदी अरब और यमन के हूती विद्रोहियों में संघर्ष शुरू हो गया है. हूतियों के हमलों के बीच पाकिस्तान और तुर्किये ने सऊदी अरब की मदद करने से इनकार कर दिया. इस बीच खबर है कि सऊदी इजरायल से मदद मांग रहा है. क्या इजरायल सऊदी की मदद करेगा, जो एक सुन्नी मुस्लिम देश है. पूरी डिटेल इस रिपोर्ट में...
मक्का रक्षा समझौता सिर्फ एक सैन्य संधि नहीं, बल्कि मिडिल ईस्ट में सुरक्षा संतुलन को नए सिरे से परिभाषित करने वाला बड़ा कदम है. जहां एक ओर यह तीनों देशों को सुरक्षा का कवच देता है तो वहीं दूसरी तरफ भारत के लिए यह कूटनीतिक संतुलन साधने और अपनी ऊर्जा सुरक्षा को बनाए रखने की एक नई चुनौती पेश कर रहा है. आइए डिटेल से समझते हैं...
Middle East Crisis: पश्चिम एशिया के तेजी से बिगड़ते सुरक्षा हालातों के बीच इस्लामी दुनिया के तीन शक्तिशाली देशों ने हाथ मिला लिया है. सऊदी अरब, तुर्किये और पाकिस्तान ने मक्का में एक 'संयुक्त रक्षा समझौते' पर मुहर लगाई और अपने सैन्य और रणनीतिक रिश्तों को नए मुकाम पर पहुंचा दिया है.
अमेरिका के 60 साल पुराने एक गुनाह की सज़ा पूरी दुनिया भुगत रही है, और वही गुनाह अमेरिका एक बार फिर करने जा रहा है. दुनिया की नज़र में एक तरफ पाकिस्तान और क़तर 10 दिन के सीज़फ़ायर की कोशिश में जुटे हैं, तो दूसरी तरफ़ शिकस्त से बौखलाए अमेरिका और ट्रंप ने अब एक ऐसा ख़तरनाक पासा फेंका है, जो पूरे रीजन को न्यूक्लियर तबाही के मुहाने पर खड़ा कर सकता है. सऊदी अरब को दिया जा रहा न्यूक्लियर तोहफ़ा क्या गल्फ़ को अमन देगा या फिर शिया-सुन्नी फ़साद की एक ऐसी आग को भड़काएगा, जिसे बुझाना किसी के बस में नहीं होगा.
Middle East Conflict Update: मिडिल ईस्ट में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है. अमेरिका ने ईरान पर लगातार 11वें दिन एयरस्ट्राइक की, जबकि कूटनीतिक स्तर पर तनाव कम करने की कोशिशें अब तक बेअसर साबित हुई हैं. जानिए ताजा घटनाक्रम, दोनों देशों की रणनीति, क्षेत्रीय सुरक्षा पर असर और इस बढ़ते संघर्ष से जुड़ी सभी अहम जानकारी.
ईरान और अमेरिका के बीच सीज फायर की हर कोशिश नाकाम हो चुकी है, और दोनों देश एक बार फिर जंग की आग में कूद गए है. एक दूसरे के ठिकानों पर ज़ोरदार हमले कर रहे हैं. इसी बीच अमेरिका ने ईरान के पड़ोसी देश इराक और तुर्किये को साधना शुरू कर दिया है. दोनों देशों पर अमेरिका मेहरबान हो रहा है, लेकिन कहा जाता है कि अमेरिका से दुश्मनी से भी बेकार है दोस्ती रखना. आइये समझते हैं कि आखिर अमेरिका इन देशों से क्यों दोस्ती का हाथ बढ़ा रहा है, और इसके दूरगामी परिणाम क्या होंगे?
अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रही बातचीत आखिरी चरण में आकर क्यों अटक गई? जानिए किन मुद्दों पर दोनों देशों के बीच सहमति नहीं बन सकी, इसका मिडिल ईस्ट और वैश्विक राजनीति पर क्या असर पड़ सकता है, और आगे क्या संभावनाएं हैं?
अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते पर लगभग बात बन गई है. हालांकि, ये शांति समझौता इजरायल को बिल्कुल नहीं भा रहा है. इजरायल की ओर से लेबनान पर लगतार हमले किए जा रहे हैं. JCFA के सीईओ ने दावा किया कि अमेरिका में होने वाले मध्यावधि चुनाव से पहले केवल अस्थायी युद्धविराम लगाने की कोशिश की जा रही है.
हम ट्रंप और ईरान वॉर से जुड़ी दूसरी बड़ी खबर का विश्लेषण करेंगे। अमेरिका ने दुनिया का पहला ड्रोन रेस्क्यू ऑपरेशन कर एक नया इतिहास रचा है। यह बहुत ही दिलचस्प खबर है। इसे बहुत ध्यान से देखिएगा। हम आपको दुनिया में पहली बार हुई इस ड्रोन रेस्क्यू ऑपरेशन की अब जानकारी देने जा रहे हैं। दरअसल 8 जून को अमेरिकी नेवी का एक अपाचे हेलीकॉप्टर हॉर्मूस के नजदीक गश्त पर था। इस हेलीकॉप्टर का मकसद ईरानी आईआरजीसी की स्पीड बोट्स को हॉर्मूस के बाहर निकलने से रोकना था। अमेरिका का दावा है कि इसी दौरान आईआरजीसी ने सतह से हवा में मार करने वाली एक मिसाइल दागी।
Middle East Crisis: ईरान के जब्त अरबों डॉलर को लेकर अमेरिका एक बड़े और विवादित प्लान पर काम कर रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, खाड़ी देशों में हुए संघर्षों और युद्ध से हुई तबाही की 'रिकवरी' के नाम पर इन फंड्स को इस्तेमाल करने की तैयारी है. यह कदम अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नया तनाव पैदा कर सकता है और ईरान-अमेरिका संबंधों को और अधिक जटिल बना सकता है.
सऊदी अरब में पुरातत्वविद उस वक्त भौचक्के रह गए, जब उन्हें तपती रेत के भीतर से खजाने का भंडार मिला. दावा किया जा रहा है कि घड़े में भरा खजाना करीब 1200 साल पहले छिपाया गया रहा होगा.
US Attack on Iran: अमेरिका ने ईरान पर यह कार्रवाई ऐसे समय में की है जब पिछले तीन महीनों से जारी संघर्ष को खत्म करने के लिए बातचीत चल रही है. इस युद्ध में अब तक हजारों लोगों की जान जा चुकी है और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी इसका असर साफ दिखाई दे रहा है.
Israel attacks Lebanon: लेबनान की बेका घाटी में इजरायली हमलों ने तबाही मचा दी है. महज कुछ ही घंटों में इजरायल ने 180 से भी ज्यादा हमले किए. इन हमलों में मासूम बच्चों और महिलाओं सहित 30 से ज्यादा लोग मारे गए और 40 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं.
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि मिडिल ईस्ट में लंबे समय से चल रहे तनाव और कठिन हालात को देखते हुए अब समय आ गया है कि क्षेत्र के देश एक साझा मंच पर आएं. अमेरिका की कोशिशों के बाद सभी संबंधित देशों को एक साथ 'अब्राहम अकॉर्ड्स' पर साइन करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए, ताकि इलाके में स्थायी शांति और सहयोग का रास्ता मजबूत हो सके.
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बड़ा कदम उठाने के संकेत दिए हैं. ईरान अब इस रणनीतिक समुद्री रास्ते से गुजरने वाले जहाजों पर नया 'सर्विस टैक्स' लगाने की तैयारी में है.
कैप्टागन शरीर और दिमाग पर तेज असर डालता है. इसे लेने के बाद कुछ समय के लिए व्यक्ति को ऊर्जा ज्यादा महसूस होती है. भूख और नींद कम हो जाती है, जबकि आत्मविश्वास और उत्तेजना बढ़ सकती है. यही कारण है कि युद्ध और हिंसा में शामिल कुछ समूहों के बीच इसकी मांग बढ़ी.
लावरोव ने कहा कि भारत जैसे देशों के पास ऐसा कूटनीतिक प्रभाव है, जिसके जरिए ईरान और UAE को बातचीत की मेज पर लाया जा सकता है. उनका मानना है कि अगर क्षेत्रीय ताकतें संवाद के रास्ते को मजबूत करें, तो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ते तनाव और किसी बड़े टकराव की आशंका को टाला जा सकता है.
अमेरिका से जारी टेंशन के बीच ईरान में अब आंतरिक कलह उजागर होने लगी है. हाल में आई एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान और संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर घालिबाफ विदेश मंत्री अब्बास अराघची को हटाने पर विचार कर रहे हैं. यह रिपोर्ट ऐसे समय पर आई है, जब अमेरिका के साथ ईरान की दूसरे दौर की वार्ता पर सस्पेंस बना हुआ है.
अमेरिका- ईरान के बीच होने वाली दूसरे दौर की शांति वार्ता से पहले सस्पेंस बढ़ता जा रहा है. ईरान ने क्लियर किया है कि वह इस्लामाबाद होने वाली बैठक में हिस्सा नहीं लेगा. इधर अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया कि ईरान से डील अब होकर ही रहेगा. मिडिल ईस्ट में अस्थायी सीजफायर की मियाद भी 22 अप्रैल को पूरी होने जा रही है. ऐसे में मिडिल ईस्ट में युद्ध के भविष्य को लेकर चिंता गहराने लगा है.
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक दिलचस्प बयान सामने आया है. ट्रंप ने एक इंटरव्यू में दावा किया कि 'यह युद्ध अब खत्म हो चुका है.' उन्होंने बातचीत के दौरान संकेत दिया कि अमेरिका-ईरान टकराव अब अतीत की बात बन चुका है और हालात काबू में हैं.
एक अमेरिकी अधिकारी ने, नाम न छपने की शर्त पर बताया कि ईरान के साथ बातचीत का रास्ता पूरी तरह बंद नहीं हुआ है. पाकिस्तान से वापस लौटने के बाद भी अमेरिका को ये उम्मीद है कि अभी भी ईरान वापस वार्ता के लिए आएगा और शर्तें भी मानेगा. यानि कि इस वार्ता के कूटनीतिक दरवाजे भी भी खुले हैं.
IDF on Operation Roaring Lion: इजरायल और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच एक बड़ा दावा सामने आया है. इजरायल डिफेंस फोर्स ने कहा है कि अब तक की कार्रवाई में उसने ईरान और लेबनान पर 18,000 से ज्यादा बम गिराए हैं. इजरायली सेना की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इन हमलों के दौरान ईरान के 4,000 से अधिक ठिकानों को निशाना बनाया गया. इन हमलों से ईरान की सैन्य क्षमता और उसके रक्षा ढांचे को गंभीर नुकसान पहुंचा है.