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ZEE जानकारी: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ रही है भारत की ताकत

ख़बर है, कि भारत, अमेरिका के Major Defence Partner से उसकी Top Priority बन गया है. और ये भारत की विदेश नीति की बहुत बड़ी जीत है. 

ZEE जानकारी: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ रही है भारत की ताकत

और अब हम आप के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की बढ़ती ताकत बताने वाला विश्लेषण लेकर आए हैं. ख़बर है, कि भारत, अमेरिका के Major Defence Partner से उसकी Top Priority बन गया है. और ये भारत की विदेश नीति की बहुत बड़ी जीत है. 

अगले ही हफ्ते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी G20 Summit के लिए जापान के Osaka शहर जाने वाले हैं. जहां उनकी मुलाकात अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump से होगी. लेकिन इस मुलाकात से पहले एक बड़ी ख़बर आई है.

अमेरिका के दो बड़े Senators ने Arms Export Control Act में संशोधन का प्रस्ताव वहां की Senate में रखा है. इसके तहत भारत को भी Nato Allies जैसा दर्जा दिए जाने की बात कही गई है. इस Bill के पास होने से भारत और अमेरिका के बीच, हथियारों वाली दोस्ती पहले से कहीं ज़्यादा मज़बूत हो जाएगी. और Defence Sales के मामले में भारत, अमेरिका की प्राथमिकता बन जाएगा. फिलहाल, इज़राएल, ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड और दक्षिण कोरिया...अमेरिका के Nato Allies हैं. अमेरिका इन सभी देशों को International Traffic in Arms Regulations के तहत हथियार बेचता है.

और Bill पास होते ही भारत भी अमेरिका के Nato सहयोगियों की बराबरी पर आ जाएगा. जिस Act में संसोधन का प्रस्ताव रखा गया है, वो अमेरिका के राष्ट्रपति को हथियारों के आयात और निर्यात पर फैसला लेने की शक्ति देता है. 

यानी जो Act, अमेरिका के राष्ट्रपति को अपने सहयोगी देशों को हथियार बेचने का Executive Freedom देता है. उसी Act में बदलाव करके भारत का नाम शामिल किए जाने की बात कही गई है. इसके अलावा अमेरिका ने पहले से भारत को Major Defence Partner का Status दे रखा है. और Act में बदलाव के बाद भारत का नाम शामिल किए जाने का सबसे बड़ा फायदा भारत को होगा. क्योंकि, अमेरिका, तत्काल प्रभाव से भारत की हथियारों वाली ज़रुरतों को पूरा कर सकेगा.

हालांकि, इस ख़बर में अमेरिका का अपना हित भी छिपा हुआ है. अमेरिका ने हथियार सौदों की विदेश नीति का इस्तेमाल करके South Korea, Japan, Saudi Arabia, Egypt और U.A.E जैसे देशों से मज़बूत रिश्ते बनाए हैं. और अब भारत के साथ भी वो ऐसे ही संबंध बनाना चाहता है.

वर्ष 2013 से 2017 के बीच भारत, हथियार खरीदने वाला दुनिया का सबसे बड़ा देश था . इन 5 वर्षों के दौरान दुनिया भर में हुई हथियारों की खरीददारी के मामले में भारत का हिस्सा 12 प्रतिशत था. 

भारत ने अपने सबसे ज़्यादा हथियार Russia से खरीदे हैं. 2013 से 2017 के बीच भारत ने 62 प्रतिशत हथियार Russia से, 15 प्रतिशत अमेरिका से और 11 प्रतिशत हथियार इज़राएल से खरीदे थे. 

अमेरिकी कंपनियों की कोशिश है, कि वो इस मामले में Russia को पीछे छोड़ दें. क्योंकि, भारत हथियारों का बहुत बड़ा बाज़ार है. और यही वजह है कि 2013 के बाद अमेरिका से हथियारों की खरीद 557 प्रतिशत बढ़ गई है.

एक सच्चाई ये भी है, कि अमेरिका, भारत के बाज़ार में अपनी जगह, अभी तक नहीं बना पाया है. अमेरिका, भारत के साथ Surface-to-Air Missile... Patriot का सौदा करना चाहता था. लेकिन Russia का S-400 मिसाइल सिस्टम, अमेरिका के Patriot से बेहतर है. इसलिए भारत ने S-400 को चुना. 

एक अनुमान के मुताबिक.. आने वाले दस वर्षों में भारत 230 अरब डॉलर यानी करीब 16 लाख करोड़ रुपये, हथियार ख़रीदने के लिए खर्च कर सकता है.

Arms Export Control Act में संशोधन का प्रस्ताव लाकर अमेरिका अपनी भूल में सुधार कर रहा है. क्योंकि, उसे पता है, कि भारत से बड़ा बाज़ार उसे कहीं और नहीं मिलेगा. इसे आप भारत का बढ़ता कद भी कह सकते हैं. बीते कुछ वर्षों में भारत ने रक्षा सौदों में अपनी रणनीति में बदलाव किया है. इससे पहले भारत दोस्ती के आधार पर रक्षा सौदे करता था.

लेकिन अब भारत रक्षा सौदों को अपनी विदेश नीति में संतुलन के लिए भी इस्तेमाल कर रहा है. Deal वाली इन दोस्तियों से ये पता चलता है कि भारत धीरे धीरे कूटनीति की दुनिया का एक बहुत बड़ा खिलाड़ी बन चुका है. पहले भारत, यारी-दोस्ती वाले दबाव में आ जाता था और सिर्फ दोस्तों से ही डील करता था. लेकिन अब डील और दोस्ती अलग अलग है. भारत अपने हितों को साधने के लिए सबको साथ लेकर चल रहा है.