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ZEE जानकारी: हॉन्ग कॉन्ग में चीन के खिलाफ सड़कों पर उतरे हजारों लोग

बुधवार को Hong Kong में प्रदर्शनकारियों ने संसद का घेराव किया. ये लोग Hong Kong की प्रत्यर्पण नीति में बदलाव के बिल का विरोध कर रहे थे. 

ZEE जानकारी: हॉन्ग कॉन्ग में चीन के खिलाफ सड़कों पर उतरे हजारों लोग

अब आपको HongKong ले चलते हैं, जहां चीन के ख़िलाफ़ विरोध भड़क उठा है. Hong Kong में आजकल बीजिंग की तानाशाही वाली व्यवस्था का विरोध हो रहा है. लोग सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं. 

बुधवार को Hong Kong में प्रदर्शनकारियों ने संसद का घेराव किया. ये लोग Hong Kong की प्रत्यर्पण नीति में बदलाव के बिल का विरोध कर रहे थे. इस मुद्दे पर बुधवार को संसद में बहस की जानी थी. लोगों के विरोध को देखते हुए ये बिल वहां की संसद में पेश नहीं हुआ. लेकिन भीड़ तब हिंसक हो गई....जब उसे हटाने के लिए पुलिस ने कड़ी कार्रवाई की. लोगों पर आंसू गैस के गोले छोड़े गए और Rubber वाली गोलियां भी चलाई गईं. जिसकी वजह से बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं. 
 
इससे पहले 9 जून को क़रीब दस लाख लोग चीन के समर्थन वाली Hong Kong की सरकार के विरोध में उतरे थे. उस दिन भी शांतिपूर्ण प्रदर्शन के बाद हिंसा हुई थी. प्रदर्शनकारियों ने सरकार को बुधवार 3 बजे तक प्रत्यर्पण बिल वापस लेने का वक्त दिया था. लेकिन जब सरकार तैयार नहीं हुई तो लोग बुधवार को हाथों में छाता लेकर सड़क पर उतरे. पुलिस Hong Kong में चीन का इतना विरोध क्यों है,ये समझाने के लिए आपको क़रीब 180 साल पीछे का इतिहास बताएंगे. लेकिन ये समझ लीजिए कि Hong Kong के लोग प्रत्यर्पण कानून में बदलाव का विरोध क्यों कर रहे हैं.

Hong Kong में One Country,Two systems है. यानी Hong Kong चीन का हिस्सा तो है लेकिन उसकी अपनी अलग राजनीतिक और न्याय व्यवस्था है.1997 में चीन का हिस्सा बने हांगकांग और चीन में प्रत्यर्पण संधि नहीं है. यानी चीन, Hong Kong से किसी आरोपी को सौंपने की मांग नहीं कर सकता . लेकिन अब चीन के समर्थन वाली Hong Kong की सरकार प्रत्यर्पण कानून मे बदलाव करना चाहती है. जिसके बाद चीन के साथ प्रत्यर्पण संभव होगा. यानी मुकदमा चलाने के लिए किसी आरोपी को चीन भेजा जा सकेगा. सरकार के इस कदम का कड़ा विरोध हो रहा है. क्योंकि Hong Kong के लोगों को चीन की न्याय व्यवस्था पर भरोसा नहीं है. उन्हें लगता है कि चीन, इस प्रत्यर्पण संधि का राजनीतिक वजहों से गलत इस्तेमाल करेगा. लेकिन सबसे बड़ा मुद्दा Hong Kong को मिली Autonomy है. लोगों को डर है कि इस क़ानून से चीन उसे ही छीनना चाहता है.

Hong Kong में विरोध-प्रदर्शन और लोगों की नाराजगी की खबर चीन तक नहीं पहुंचने दी जा रही है.चीन में वहां की ख़बरों पर पूरी तरह सेंसरशिप है. चीन को डर है कि Hong Kong की बग़ावत की आग उसके दूसरे इलाकों में भी फैल सकती है. लेकिन, प्रदर्शनकारियों ने इसका भी रास्ता निकाल लिया है. Hong Kong में प्रदर्शन कर रहे लोग मैसेजिंग App, Telegram के जरिये अपनी बात दूसरों तक पहुंचा रहे हैं. 

Telegram से भेजी जा रही सूचनाओं को पकड़ा नहीं जा सकता. क्योंकि इसके मैसेज Encrypted होते हैं. चीन में पश्चिमी देशों के सोशल मीडिया पर भी सेंसरशिप लागू है. लेकिन Telegram की वजह से चीन की एक नहीं चल पा रही है. Hong Kong में प्रदर्शनकारियों ने Telegram पर अपने ग्रुप बना लिए हैं और इसके जरिये ही प्रदर्शन की जगह और समय तय किया जा रहा है. इसका तोड़ निकालने के लिए चीन के हैकर्स ने टेलीग्राम पर साइबर हमला भी किया था. इस बात की जानकारी Telegram के CEO Pavel Durov ने दी है. आपको बता दें कि चीन ने वर्ष 1989 में लोकतंत्र के समर्थन में किए जा रहे एक आंदोलन को सेना की मदद से कूचल दिया था. 4 जून को बीजिंग के Tiananmen square चौक पर छात्रों के खिलाफ सेना ने टैंक का इस्तेमाल किया था. माना जाता है कि उस दौरान दस हजार से ज्यादा छात्रों की मौत हुई थी. चीन ने उस आंदोलन से जुड़ी जानकारियां बाहर नहीं आने दी थी. लेकिन इस दौर में सूचनाओं को कंट्रोल करना चीन के लिए मुश्किल साबित हो रहा है.